दलित किसान की निर्माण हत्या, गुस्साए परिजनों ने पुलिस को शव सौंपने से किया इंकार



शिवाकांत अवस्थी 

तिलोई/रायबरेली: अमेठी जिले के मोहनगंज थाना क्षेत्र के हसवां गांव में दलित किसान की हत्या के मामले को लेकर विगत सोमवार को परिवारीजनों और ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा। सभी ने पुलिस को दलित किसान की हत्या का जिम्मेदार ठहराते हुए न सिर्फ हंगामा किया, बल्कि पुलिस को शव सौंपने से इंकार कर दिया। दो घंटे तक खूब हंगामा और विरोध प्रदर्शन हुआ। लोगों का आरोप था कि, घटना की सूचना पर दो घंटे लेट मौके पर पुलिस पहुंची। समय से पुलिस पहुंच जाती तो दलित किसान की जान बच जाती।   मामले में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि समेत छह हमलावरों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है, लेकिन अभी तक कोई हमलावर पकड़ा नही जा सका है।

    आपको बता दें कि, हंसवा गांव निवासी गुरुबख्श पासी 50 की शनिवार की रात नौ बजे उस समय चुनावी रंजिश में हत्या कर दी गई थी, जब वह धान की बेडन देखने के बाद खेत से घर वापस लौट रहा था। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ने साथियों के साथ पीट-पीटकर उसे मार दिया था। मौके पर पहुंचे उसके भाई सुखराम पासी को भी पीटकर अधमरा कर दिया था। सुबह परिवारीजन और ग्रामीण हत्या की घटना से आक्रोशित हो गए।   पुलिस शव लेने पहुंची, तो परिवारीजनों ने शव सौंपने से इंकार करते हुए हंगामा करना शुरू कर दिया। सभी पुलिस मुर्दाबाद के नारे लगाने लगे और मोहनगंज थानेदार और अन्य पुलिस कर्मियों को हटाने की जिद पर अड़ गए। ग्रामीणों का कहना था कि, घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई थी। थानेदार और उनके मातहत दो घंटे लेट से मौके पर पहुंचे। समय से गुरुबख्श पासी को अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका, जिससे उसकी मौत हो गई। हमलावर भी मौके से फरार हो गए। 

   अमेठी जिले के एडीएम सुधीर कुमार व एएसपी विनोद कुमार दुबे ने मौके पर पहुंचकर परिवार के लोगों को जांच करा कर दोषियों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया है। जिसके बाद लोगों ने शव पुलिस के सुपुर्द किया। तब पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। थानाध्यक्ष भरत उपाध्याय ने बताया कि, ग्राम प्रधान प्रतिनिधि ध्रुवराज पासी, कृष्ण कुमार पासी, सूरज पासी, राम कैलाश, राम सागर पासी, रामकुबेर के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। प्रथम दृष्ट्या चुनावी रंजिश में हत्या की बात सामने आई है। हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए प्रयास किया जा रहा है। 

    आपको यह भी बता दें कि, मृतक गुरुबख्श पासी गांव के पंचायत चुनाव में प्रधानी को लेकर आरोपी ध्रुवराज पासी की दादी कृष्णवती का जमकर विरोध किया था। बावजूद इसके धुव्रराज की दादी चुनाव जीत गई थी। इसी को लेकर दोनों पक्षों में खटास पैदा हो गई थी। पंचायत चुनाव के बाद से दोनों पक्षों के बीच खींचतान चल रही थी। इसकी जानकारी भी पुलिस को थी। बावजूद इसके पुलिस ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजतन दलित किसान की हत्या कर दी गई।

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