महराजगंज/रायबरेली: महाशिवरात्रि के पूर्व 'स्वच्छता ही सेवा है, सफाई ही पूजा है' अभियान के तहत ब्रहस्पतिवार को एसडीएम महराजगंज सचिन यादव और तहसीलदार मंजुला मिश्रा की ओर से श्रमदान अभियान चलाकर सई नदी के तट पर स्थित प्राचीन शिवालय भवरेश्वर की सफाई की गई। इस एक दिवसीय अभियान में सई नदी के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर भवरेश्वर को संवारने के लिए सैकड़ो श्रृद्धालुओं द्वारा विशेष श्रमदान किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों और श्रद्धालुओं ने मिलकर मंदिर प्रांगण को पवित्र सई नदी के जल से धोया और सफाई कार्य में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। अभियान में तहसीलदार मंजुला मिश्रा के साथ दर्जनों महिला श्रृद्धालुओं ने भी भाग लिया और घाट की सीढ़ियों, मढ़ियों और मंदिर परिसर की सफाई की। सफाई कार्य के दौरान सभी "हर-हर महादेव, शंभु भवरेश्वर, विश्वनाथ सई नदी के जयघोष के साथ जुटे रहे। इसके बाद एसडीएम और तहसीलदार ने भवरेश्वर मंदिर में गंगाजल से विग्रहों का अभिषेक किया और श्रद्धालुओं ने भी जल अर्पित कर पूजा-अर्चना की।
*खास है भंवरेश्वर महादेव मंदिर की कहानी, इस बात पर औरगंजेब को मांगनी पड़ी थी माफी:* प्राचीन शिवालयों में शुमार भंवरेश्वर महादेव की महिमा निराली है। भक्त बताते हैं कि, यहां का शिवलिंग द्वापर युग का है। महाबली भीम ने इसकी स्थापना की थी। जब पांडवों को वनवास हुआ था तब इसका नाम भीमाशंकर था।
क्षेत्रीय बुजुर्ग बताते हैं कि, कुर्री सुदौली स्टेट की गायें यहां त्रयंबक नामक वन में चरने आती थी। लौटने पर सभी गाये महल की गौशाला में दूध देती, लेकिन एक गाय दूध ही नहीं देती थी। जब यह बात महल में फैली तो इसकी पड़ताल की गई। तब पता चला कि, वन में एक स्थान घनी झाड़ियों से घिरा था, वहीं रोज वह गाय अपना दूध चढ़ा आती थी। जब उस स्थान की सफाई की गई तो मूर्ति दिखाई दी।
तब उसी स्थान पर चबूतरा बनवाकर एक झंडा गाढ़ दिया गया और तब इसका नाम पड़ा सिद्धेश्वर। बाद में मुगल शासक औरंगजेब इधर से सेना लेकर गुजर रहा था तो हठ वश उसने शिवलिंग की खुदाई शुरू कर दी। सैनिकों ने जब इसकी खुदाई प्रारंभ की तो जितना खोदते गए उतना ही विशाल शिवलिंग मिलता गया।
आखिरकार जब अंत नहीं मिला तो सैनिकों से शिवलिंग की तुड़ाई शुरू करवानी चाही, लेकिन भंवरों के झुंड ने सैनिकों पर हमला कर दिया। यह देख औरंगजेब ने क्षमा मांगी और एक गुम्बदनुमा छोटी सी मठिया बनवाई।
तब इसका नाम भंवरेश्वर पड़ा। बाद में मंदिर का जीर्णोद्धार कुर्री सुदौली स्टेट ने कराया। मंदिर की पूजा-अर्चना की जिम्मेदारी गोस्वामी परिवार के पास है। सावन मास में लाखों श्रद्धालु यहां जुटते हैं। मनौती मांगते हैं।
इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों समेत श्रमदान के तहत क्षेत्रीय लोगों एवं श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।







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