महराजगंज/रायबरेली: एक ओर जहां घोड़े के समान हिनहिना कर हंसने वाले लोग चालबाज, मक्कार, धूर्त, अहंकारी व चरित्रहीन होते है। ये लोग सिर्फ अपना मतलब निकालने में माहिर होते है। स्वार्थ निकलने के बाद ये उस व्यक्ति को भूल जाते है। काम निकलने के बाद ये दूसरों की बुराई भी करने में नहीं चूकते है। ऐसे लोगों से दूर रहना ही उचित होता है। वहीं दूसरी ओर परमात्मा ने दुखों से मुक्ति के लिए मनुष्य को हंसने की शक्ति दी है, लेकिन आश्चर्य है कि, आज कोई भी हंसने की इस शक्ति का उपयोग नहीं कर रहा है। प्रत्येक व्यक्ति दुख, चिंता, निराशा व आंसू का उपयोग करता है। ऐसे लोग शायद यह समझते हैं कि, चिंतित होने से दूसरों का ध्यान उनकी ओर जायेगा। ऐसे लोग आत्मपीड़क होते हैं। जबकि कुछ लोग मुस्कुराते हुए अपना दिन शुरू करते हैं, और मुस्कुराते हुए ही सो जाते हैं। हंसना एक व्यायाम है। हंसने से जीवनी शक्ति बढ़ती है। मन की कुंठाएं टूटती हैं, और जीवन में जो निराशा के बीज होते हैं, वे नष्ट हो जाते हैं। यह एक वैज्ञानिक प्रक्रिया है। मगर हंसी घोड़े जैसी हिनहिना कर नहीं होनी चाहिए।
हंसी का वीडियो देखने के लिए फोटो पर क्लिक करें।आपको बता दें कि, एक ऐसा ही हंसी का वाकया उस समय देखने को मिला जब विगत बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में थाना महराजगंज की कोतवाल रेखा सिंह ने सोनिका के पिता का सपना पूरा करते हुए उसकी शादी धूमधाम से आनंद के साथ कराई। शादी समारोह में अगवानी के कार्यक्रम में जब समधी मिलन कार्यक्रम के दौरान दोनों समधी पहले गले मिलते हैं, उसके बाद एक दूसरे को पान खिलाई की रस्म पूरा करते हैं, इसी दौरान कन्या पक्ष से समधी बने भाजपा नेता व चेयरमैन पति प्रभात साहू ने जब वर पक्ष के समधी को पान खिलाया, उसके बाद वर पक्ष समधी के द्वारा प्रभात साहू को पान खिलाने को कहा गया जिस पर वह स्वयं ही उस पान के बीरा को खा गए। इस दृश्य को देखकर उपस्थित वहां सारे लोग अपनी हंसी को नहीं रोक पाए और ठहाका लगाकर हंसने लगे।

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