रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य में निराश्रित, बेसहारा गोवंशों को संरक्षित करने के लिये साल 2019 के जनवरी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल ने नगरीय तथा ग्रामीण शासी निकायों के अंतर्गत अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों की स्थापना और उनके संचालन की योजना को मंजूरी दी थी। योगी सरकार की मंशा रही कि, गौवंशों को उपयुक्त संरक्षण मिले और खुले में सड़कों पर इनके घूमने से होने वाली दुर्घटनाओं पर भी रोक लगाई जा सके। दूसरे किसानों का अपना अलग ही दर्द रहा कि, छुट्टा गौवंशों से उनकी खेती को काफी नुकसान होता आया है। नीलगायों से कहीं ज्यादा गौवंशों का झुंड उनकी फसलों को चट कर जा रहा है। इसी उद्देश्य से अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों को खोले जाने की स्वीकृति प्रदान करते हुए निराश्रित गोवंशों को संरक्षण देने के साथ उनके चारा-पानी के मुक्कमल इंतजाम के भी निर्देश दिए गए थे। यह व्यवस्था नगरीय और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में की गई थी।
आपको बता दें कि, मुख्यमंत्री योगी की मंशा के अनुरूप, प्रदेश में मौजूदा वित्तीय वर्ष 2023-24 में अस्थाई गोवंश आश्रय स्थलों में प्रति गोवंश रोजाना 50 रुपए के दर से अनुदान दिया जा रहा है। पहले यह राशि 30 रूपए निर्धारित की गई थी जिसे बाद में बढ़ाकर 50 रूपए किया गया है। इससे गौ आश्रय स्थलों में गोवंश के रख-रखाव, उनके इलाज, पोषण युक्त आहार, उचित शेड समेत तमाम सहूलियतों को पूर्ण करने में मदद मिलती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का कहना है कि, गौवंशों की सेवा करना हमारा कर्तव्य है, संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दे रहे हैं कि, गौशालाओं में गौंवशों के लिए चारा पानी के लिए अच्छी व्यवस्था करें। हमारी टीम ने जब ग्राम पंचायत मोन में बनी महर्षि ओरीदास कांजी हाउस (गौशाला) की पड़ताल की तो उसी तर्क पर ग्राम प्रधान ने गौशाला की हालत बदल कर रख दी।
मामला विकासखंड महराजगंज के मोन गांव का है, जहां ग्राम प्रधान श्यामकला के पति अमरेश कुमार ने वास्तव में गौशाला की हालात बदल कर रख दी है। "एसके इण्डिया न्यूज़" और "दैनिक प्रज्ञांश न्यूज़" की टीम पहुंचते ही देखने को मिला कि, ग्राम प्रधान पति अमरेश कुमार गौशाला की साफ-सफाई करवाते मिले। उसके बाद देखा गया कि, गौशाला के भूसा स्टोर में पर्याप्त मात्रा में भूसा के अलावां जानवरो को खिलाने के लिए चुनी चोकर, पशु आहार व हरा चारा (बरसींन) की भी व्यवस्था दिखाई दी। गौशाला बाउंड्री वॉल के बाहर लगभग एक बीघा पशुओं के लिए हरे चारे का इन्तजार किया गया है जोकि जानवरों को खिलाया जाता है।
वहीं लोगों ने बताया कि, आज तक गौशाला में ऐसा पहली बार हुआ है जो ग्राम प्रधान ज्यादा वक्त यहां बिताते हैं। मजदूरों के साथ लगकर गौवन्शो को चारा पानी की व्यवस्था खुद करते हैं। इससे काफी दिन पहले "एसके इण्डिया न्यूज़" और "दैनिक प्रज्ञांश न्यूज़" की पड़ताल में गौशाला का खुलासा किया था। जहा देखा गया था कि, व्यवस्थाएं सरकार की मंशा के अनुरूप नहीं है। किंतु आज ग्राम प्रधान पति ने गौशाला की हालत बदल कर रख दी है।
ग्राम प्रधान श्यामकला के पति अमरेश कुमार ने बताया कि, उनकी पत्नी को जनता ने प्रधान बनाया है। उनका फर्ज है गांव का विकास करना, उनकी ग्राम पंचायत में सरकार ने जिला पंचायत निधि से गौशाला बनवाया है। उन्हें सौभाग्य मिला है कि, वह भी गौवंश की सेवा कर रहे है।
आपको यह भी बता दें कि, तत्कालीन ग्राम प्रधान सरोजनी देवी के पति भाजपा नेता डॉ माताफेर सिंह के अथक प्रयासों के बाद जिला पंचायत रायबरेली द्वारा 26 फरवरी 2019 को महर्षि ओरीदास कांजी हाउस का निर्माण कराया गया था, जिसका उद्घाटन प्रदेश सरकार के मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिनेश प्रताप सिंह के करकमलों द्वारा हुआ था।
लगभग चार बीघा क्षेत्रफल में बनाई गई मोन ग्राम पंचायत की इस गौशाला में 217 गोवंशीय की देखभाल पांच केयरटेकर भगवान दीन, सुरेश, राकेश, मुनीश, रतीपाल करते हैं। वहीं रखवाली के लिए एक चौकीदार भी फूलचंद रखा गया है, जो 24 घंटे गौशाला की देखरेख करता है। हमारी टीम द्वारा की गई पड़ताल में चुनी-चोकर से लेकर चारा-पानी की व्यवस्था और सेड के चारों तरफ गौवंशीय को ठंड से बचने के लिए तिरपाल तथा गौशाला के अंदर थोड़ी-थोड़ी दूर पर अलाव की व्यवस्था मुकम्मल मिली। गौवंशीय के नाद (जिसमें खाने के लिए चार रखा जाता है) चमचमाते मिले।
प्रधान पति के अलावा गौशाला की सेवा में जुटे कर्मचारियों ने बताया कि, मवेशियों को खिलाने के लिए नमक, गुड सहित चूनी-चोकर जैसे पशु आहार और हरा चारा दिया जाता है। सभी कर्मचारी 24 घंटे सेवा देते हैं, और समय पर उन्हें वेतन मिलता है।









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