ग्राम प्रधान की फुलवारी: पेड़-पौधों से घिरा होना शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा होता है-मानसिक तनाव को भी दूर करता है-गीता देवी हरिशंकर

शिवाकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: बागवानी सभी का शौक होता है, लेकिन अधिकतर शहर निवासी इस शौक को पूरा नहीं कर पाते हैं। आजकल अच्छा हरा-भरा वातावरण और शुद्ध हवा में खुली सांस बहुत कम लोगों को नसीब है। पेड़-पौधों से घिरा होना शारीरिक स्वास्थ्य की दृष्टि से तो अच्छा होता ही है साथ ही आपके मानसिक तनाव को भी दूर करता है। फ्लैट और अपार्टमेंट में यह संभव नहीं हो पाता है। लेकिन अगर आपके पास कोई छोटी बालकनी या फिर ऐसी जगह है, जहां धूप आती है तो आप आराम से कुछ छोटे गमले तो लगा ही सकते हैं, जिससे घर का एक कोना हरियाली से भर जाता है और आपको तनावमुक्त बनाने में मदद करता है।

    आपको बता दें कि, दश बरस से अधिक समय से ग्राम प्रधान पाराकला गीता देवी और उनके पति हरिशंकर बागवानी कर रहे हैं और वह पेड़-पौधों की देखरेख बच्चों की तरफ करते हैं। उनकी फुलवारी में दर्जनों किस्म के फूल खिलते हैं और रोज कई लोग उसे देखने पहुंचते हैं।

 बागवानी से उनका यह लगाव काबिलेतारीफ है। महाराजगंज तहसील क्षेत्र के पराकला ग्राम की प्रधान और उनके पति ने 10 बरस पहले बागवानी के शौक को बहुत गंभीरता से आगे बढ़ाना शुरू किया था और उसका परिणाम आज उनकी फुलवारी को देखकर नजर आता है। उनकी फुलवारी में दर्जनों फूल खिलते हैं और हरियाली दिल को सुकून देती है।

      कई लोग बागवानी को शौकिया तौर पर करते हैं ताकि घर के अगले हिस्से या छत को कुछ सुंदरता दी जा सके। किन्तु कुछ लोग बागवानी से प्यार भी करने लगते हैं और उन्हें इस काम में बहुत आनंद आने लगता है। गीता देवी और उनके पति हरिशंकर दूसरी तरह के लोगों में हैं, जोकि बागवानी से प्रेम करते हैं। वे बताते हैं कि, बचपन से ही उन्हें पेड़-पौधों से लगाव हो गया था और आज उनके बगीचे में दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के फूल हैं, लताएं हैं और फलदार पेड़ भी हैं।

 उन्होंने हर पौधे को बड़े जतन से पाला है और उसका ख्याल रखा है। ग्राम प्रधान गीता देवी बताती हैं कि, 10 बरस पहले 2015 में जब वह ग्राम प्रधान बनी तभी से उन्होंने इस घर की फुलवारी को संवारने का काम किया आज इस घर के बड़े हिस्से में उनकी फुलवारी है।

     इस फुलवारी में गेंदा, गुलाब, चांदनी, बेला, गुलदावरी, चमेली, मोगरा, गुलमोहर, जुई, कनेर आदि का होना ही नहीं चकित करता है, बल्कि यह भी चौंकाता है कि, इसी फुलवारी में फलदार वृक्षों कागजी नींबू, कथरिया नींबू, एप्पल बेर, अमरूद, नारियल, देसी बेर, बगऊ बेर, आंवला, आम, सरीफा, कटहल, अंबार, जामुन, अशोक जैसे पेड़ भी है, जो हर बरस फलदार पेड़ फल देते हैं।

     इसके अलावा प्रधान गीता देवी के पति हरिशंकर हरी सब्जियों के भी शौकीन है, उन्होंने अपनी फुलवारी में सोया मेथी, फूल गोभी, बंद गोभी, मूली, लहसुन, धनिया, बैंगन आदि की बेहतरीन खेती भी करते हैं। उन्होंने बांस, टायर वगैरह जैसी बेकार हो चुकी चीजों का रचनात्मक उपयोग करके अपने बगीचे को सुंदर बनाया है।

      उनकी फुलवारी में फूल देने वाले पौधों के साथ-साथ कुछ बड़े पेड़ भी हैं। वह कहते हैं कि, इस तरह की फुलवारी बनाने के लिए बहुत सारी चीजें जुटानी भी पड़ती हैं। उन्होंने अपने भवन परिसर को खरफूस की मड़हिया से बेहतरीन तरीके से सजाया हुआ है, जो उनके निवास को चार चांद लगाता है। बगल में ही स्थित  उनकी फुलवारी की खूबसूरती पर फिदा होकर रोज कई लोग वहां देखने पहुंचते हैं।

     प्रधान गीता देवी कहती हैं कि, वह इंटरनेट पर गार्डनिंग से जुड़े कई चैनल और पेज देखती हैं और इन्हीं से उन्हें नए आयडियाज मिलते हैं। करीब पांच बरस पहले उन्होंने बेकार हो चुकी चीजों से गार्डन को सजाने की कला सीखना शुरू किया था और अब उनके कारण उनकी फुलवारी बहुत निखर गई है।

      प्रधान गीता देवी के पति हरिशंकर बताते हैं कि, कुछ पेड़ बरसों पुराने हैं। कुछ फूल के पौधे फुलवारी में ऐसे हैं जोकि खास मौसम में ही फूल देते हैं। वह खुद अपने हाथों से निराई गुड़ाई करके पौधों को जैविक खाद देते हैं। वह हर दिन 2 घंटे का समय अपनी फुलवारी के लिए जरूर देते हैं।

 जितना समय गीता देवी और उनके पति हरिशंकर अपनी फुलवारी को देते हैं और जिस तरह की देखरेख पेड़-पौधों की करते हैं उससे उनकी खुशी सीधे तौर पर जुड़ी है। लोग अक्सर उनके यहां आते हैं और अपने घर प्रांगण की फुलवारी को सजाने के लिए उनसे मशविरा मांगते हैं। उनका तब एक ही जवाब होता है कि, पेड़-पौधों से प्यार कीजिए, उसके बिना आप स्वस्थ नहीं रह सकते।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ