महताब खान
रायबरेली: आल इण्डिया पयामे इंसानियत फोरम का सालाना कार्यक्रम मदरसा जियाउल उलूम मैदानपुर के प्रांगण में मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
जिसमें फोरम की ओर से चल रही सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जनसेवा के आगामी प्रयासों पर विचार विमर्श हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित फोरम के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए महासचिव मौलाना सैयद बिलाल हसनी नदवी ने अपने खिताब में कहा कि, इस वक्त मुल्क की सलामियत और इंसानियत इंतेहाई नाजुक दौर से गुजर रही है। देश का सामाजिक ताना-बाना लगातार नुकसान की तरफ बढ़ रहा है। इंसान को इंसान से जोड़ने की बजाए लोगों में इख्तेलाफ फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस वक्त गर कोई इंसान और इंसानियत की हिफाजत करता है तो गोया वह मुल्क की हिफाजत कर रहा है। आखिर में जनसरोकार में सेवारत कार्यकर्ताओ की हौसला अफजाई करते हुए मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी ने कहा कि अल्लाह ने इंसान को अशरफुल मखलूकात यानी तमाम प्राणियों में सबसे बेहतर जीव बनाकर भेजा है। लेकिन इंसान मखलूकात से अशरफ उसी वक्त हो सकता है जब वह अच्छे एख्लाक और किरदार को फैलाएगा।
आखिर में मौलाना ने मुल्क की तरक्की और इंसानियत के तहफ्फुज की दुआ के बाद कार्यक्रम का समापन किया।
इस मौके पर फोरम के सभी कार्यकर्ता व जिले के मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी सैकड़ो की संख्या मे लोग मौजूद रहे।
रायबरेली: आल इण्डिया पयामे इंसानियत फोरम का सालाना कार्यक्रम मदरसा जियाउल उलूम मैदानपुर के प्रांगण में मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी की अध्यक्षता में आयोजित हुआ।
जिसमें फोरम की ओर से चल रही सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जनसेवा के आगामी प्रयासों पर विचार विमर्श हुआ।
इस अवसर पर उपस्थित फोरम के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए महासचिव मौलाना सैयद बिलाल हसनी नदवी ने अपने खिताब में कहा कि, इस वक्त मुल्क की सलामियत और इंसानियत इंतेहाई नाजुक दौर से गुजर रही है। देश का सामाजिक ताना-बाना लगातार नुकसान की तरफ बढ़ रहा है। इंसान को इंसान से जोड़ने की बजाए लोगों में इख्तेलाफ फैलाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस वक्त गर कोई इंसान और इंसानियत की हिफाजत करता है तो गोया वह मुल्क की हिफाजत कर रहा है। आखिर में जनसरोकार में सेवारत कार्यकर्ताओ की हौसला अफजाई करते हुए मौलाना सैयद राबे हसनी नदवी ने कहा कि अल्लाह ने इंसान को अशरफुल मखलूकात यानी तमाम प्राणियों में सबसे बेहतर जीव बनाकर भेजा है। लेकिन इंसान मखलूकात से अशरफ उसी वक्त हो सकता है जब वह अच्छे एख्लाक और किरदार को फैलाएगा।
आखिर में मौलाना ने मुल्क की तरक्की और इंसानियत के तहफ्फुज की दुआ के बाद कार्यक्रम का समापन किया।
इस मौके पर फोरम के सभी कार्यकर्ता व जिले के मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवी सैकड़ो की संख्या मे लोग मौजूद रहे।

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