रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ/रायबरेली: उत्तर प्रदेश राज्य के वीवीआईपी जिले में शुमार रायबरेली जनपद की शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह शिव मंदिर की मूर्ति चोरी का रहस्य बताते हुए कहते है कि, सन 1970 में शिवगढ़ राज महल ,(महेश विलास पैलेस) के ठीक उत्तर दिशा की तरफ बने शिव मंदिर की मूर्ति चोरी हो गई थी, जो महल के ठीक पीछे मेले वाली बाग में बरामद हुई थी।पुलिस ने मूर्ति बरामद करने के बाद उस मूर्ति की स्थापना थाना बछंरावा के प्रांगण में बने मंदिर में कर दी गई थी। जिसके पूजा पाठ की जिम्मेदारी थाने की थी।
शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह आगे बताते हुए कहते है कि, उस समय थाना शिवगढ़ न होकर बछरावां हुआ करता था, लेकिन उन्होंने जब 1980 में महल में रहने का मन बनाया और रहने लगें, तब एक दिन कुछ खास लोगों ने बताया कि, महल के उत्तर दिशा की तरफ बने शिव मंदिर से 1970 में मूर्ति चोरी हो गई थी, जो महल के ठीक पीछे मेले वाली बाग से बरामद हुई। उसके बाद उस मूर्ति को थाना बछंरावा की पुलिस ने ले जाकर वहीं के मंदिर में स्थापित कर दी।
धार्मिक विचारधाराओं से ताल्लुक रखने वाले राजा राकेश प्रताप सिंह शिवगढ़ ने उस समय के पुलिस कप्तान से आदेश लेकर बछरावां थाने पहुंचे, जहां थानाध्यक्ष श्री चतुर्वेदी उस मंदिर में पूजा पाठ करते थे और उनके पास एक घोड़ा भी था। चतुर्वेदी थानेदार बछंरावा पूजा पाठ के साथ साथ घोड़े की भी सवारी के शौकीन थे। उन्होंने अपने चढ़ने के लिए एक घोड़ा रखा था, जिसकी देखभाल वे स्वयं करते थे।
जब शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह ने थाने पहुंचकर मूर्ति ले जाने के बाबत कप्तान के आदेश की बात थानेदार चतुर्वेदी से मुलाकात करने के बाद बताई, तब थानेदार चतुर्वेदी ने कप्तान के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। राजा साहब को मूर्ति ले जाने की इजाजत नही दिया।
अगले दिन फिर शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह बछरावां थाने पहुंचे और वहां के थानेदार चतुर्वेदी से बात की, उन्होंने कहा कि, उनके मन में एक विचार आया है कि, उनके पूर्वजों द्वारा महल के मंदिर में स्थापित की गई मूर्ति चोरी होने के बाद मेले वाली बाग से बरामद होने के पश्चात थाने के मंदिर में स्थापित होना और यहां मूर्ति की ठीक प्रकार से पूजा और सेवा न होने से उनका मन आहत है। इसलिए वे इस मूर्ति को यहां से ले जाकर महल के मंदिर में स्थापित कर मूर्ति की सेवा वे स्वयं करना चाहते हैं। उस पर थानेदार बछरावा ने कहा कि, ठीक है, आप एक शिवलिंग लेकर आइए और इस मंदिर में स्थापित कीजिए। उसके बाद आप यहां से यह शिवलिंग ले जा सकते हैं।
इतना सुनते ही राजा राकेश प्रताप सिंह ने एक दूसरा शिवलिंग लाकर बछंरावा थाना के मंदिर में स्थापित करने के बाद यहां पहले से स्थापित महल के मंदिर का शिवलिंग ले जाकर पुनः महल के ही मंदिर में स्थापित कर प्रतिदिन उनकी सेवा और पूजा अर्चना करने लगे। शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह जब महल में होते हैं तो, वे प्रतिदिन राजमहल के चारों तरफ बने मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के उपरांत ही अन्य कार्यों को महत्व देते हैं।
शिवगढ/रायबरेली: उत्तर प्रदेश राज्य के वीवीआईपी जिले में शुमार रायबरेली जनपद की शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह शिव मंदिर की मूर्ति चोरी का रहस्य बताते हुए कहते है कि, सन 1970 में शिवगढ़ राज महल ,(महेश विलास पैलेस) के ठीक उत्तर दिशा की तरफ बने शिव मंदिर की मूर्ति चोरी हो गई थी, जो महल के ठीक पीछे मेले वाली बाग में बरामद हुई थी।पुलिस ने मूर्ति बरामद करने के बाद उस मूर्ति की स्थापना थाना बछंरावा के प्रांगण में बने मंदिर में कर दी गई थी। जिसके पूजा पाठ की जिम्मेदारी थाने की थी।
शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह आगे बताते हुए कहते है कि, उस समय थाना शिवगढ़ न होकर बछरावां हुआ करता था, लेकिन उन्होंने जब 1980 में महल में रहने का मन बनाया और रहने लगें, तब एक दिन कुछ खास लोगों ने बताया कि, महल के उत्तर दिशा की तरफ बने शिव मंदिर से 1970 में मूर्ति चोरी हो गई थी, जो महल के ठीक पीछे मेले वाली बाग से बरामद हुई। उसके बाद उस मूर्ति को थाना बछंरावा की पुलिस ने ले जाकर वहीं के मंदिर में स्थापित कर दी।
धार्मिक विचारधाराओं से ताल्लुक रखने वाले राजा राकेश प्रताप सिंह शिवगढ़ ने उस समय के पुलिस कप्तान से आदेश लेकर बछरावां थाने पहुंचे, जहां थानाध्यक्ष श्री चतुर्वेदी उस मंदिर में पूजा पाठ करते थे और उनके पास एक घोड़ा भी था। चतुर्वेदी थानेदार बछंरावा पूजा पाठ के साथ साथ घोड़े की भी सवारी के शौकीन थे। उन्होंने अपने चढ़ने के लिए एक घोड़ा रखा था, जिसकी देखभाल वे स्वयं करते थे।
जब शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह ने थाने पहुंचकर मूर्ति ले जाने के बाबत कप्तान के आदेश की बात थानेदार चतुर्वेदी से मुलाकात करने के बाद बताई, तब थानेदार चतुर्वेदी ने कप्तान के आदेश को मानने से इनकार कर दिया। राजा साहब को मूर्ति ले जाने की इजाजत नही दिया।
अगले दिन फिर शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह बछरावां थाने पहुंचे और वहां के थानेदार चतुर्वेदी से बात की, उन्होंने कहा कि, उनके मन में एक विचार आया है कि, उनके पूर्वजों द्वारा महल के मंदिर में स्थापित की गई मूर्ति चोरी होने के बाद मेले वाली बाग से बरामद होने के पश्चात थाने के मंदिर में स्थापित होना और यहां मूर्ति की ठीक प्रकार से पूजा और सेवा न होने से उनका मन आहत है। इसलिए वे इस मूर्ति को यहां से ले जाकर महल के मंदिर में स्थापित कर मूर्ति की सेवा वे स्वयं करना चाहते हैं। उस पर थानेदार बछरावा ने कहा कि, ठीक है, आप एक शिवलिंग लेकर आइए और इस मंदिर में स्थापित कीजिए। उसके बाद आप यहां से यह शिवलिंग ले जा सकते हैं।
इतना सुनते ही राजा राकेश प्रताप सिंह ने एक दूसरा शिवलिंग लाकर बछंरावा थाना के मंदिर में स्थापित करने के बाद यहां पहले से स्थापित महल के मंदिर का शिवलिंग ले जाकर पुनः महल के ही मंदिर में स्थापित कर प्रतिदिन उनकी सेवा और पूजा अर्चना करने लगे। शिवगढ़ रियासत के राजा राकेश प्रताप सिंह जब महल में होते हैं तो, वे प्रतिदिन राजमहल के चारों तरफ बने मंदिरों में पूजा-अर्चना करने के उपरांत ही अन्य कार्यों को महत्व देते हैं।

0 टिप्पणियाँ