लक्ष्मी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में हुई नवजात बालिका की मौत के मामले में पीड़िता ने जिलाधिकारी को ट्वीट कर मांगा न्याय।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी
बछरावां/रायबरेली: कोविड-19 वैश्विक महामारी को लेकर जहां 1 माह से अधिक समय से लाकडाउन के कारण आम जनमानस संक्रमण को लेकर अपने घरों में जीवन यापन कर रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ बछरावां नगर व क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टर बगैर डिग्री डिप्लोमा के अवैध नर्सिंग होम संचालित करके इलाज के नाम पर धन उगाही का धंधा जोरों पर है। इसी तरह अवैध धन उगाही के मामले को लेकर मारपीट की घटना दिनांक 29 अप्रैल 2020 को बछरावां के मोहल्ला दक्षिण चमरिया स्थित लक्ष्मी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर की घटना मानवता को शर्मसार करने वाली है।   
      आपको बता दें कि, बानगी के तौर पर बिटान पत्नी रविशंकर निवासी ग्राम रसूलपुर ने थाना प्रभारी को लिखित शिकायत में आरोप लगाया है कि, उनकी ननद गुड़िया पत्नी रविशंकर को 19 अप्रैल 2020 को थुलेंदी ग्राम की आशा के द्वारा डिलीवरी के लिए समझा-बुझाकर लक्ष्मी हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया तथा भर्ती के दौरान ₹25000 में ऑपरेशन करके डिलीवरी करने की बात शिवानी गुप्ता द्वारा कहीं गई। दिनांक 20 अप्रैल 2020 को ऑपरेशन के उपरांत लापरवाही की वजह से नवजात शिशु बालिका की मौत हो गई।
      उसके उपरांत इलाज के नाम पर ₹20000 जमा कराए गए, इसके उपरांत 29 अप्रैल 2020 को झोलाछाप डॉक्टर शिवानी गुप्ता द्वारा ₹10000 बकाया बताकर जमा कराने की बात कही, तो पीड़ित के परिवारीजनों और तीमारदारों ने लाकडाउन खत्म हो जाने के बाद व्यवस्था करा कर ₹10000 देने के लिए कहा था। लेकिन शिवानी गुप्ता और उनके स्टाफ द्वारा जबरिया तत्काल रुपए जमा कराने को लेकर वाद विवाद हुआ।
     तभी हॉस्पिटल के स्टाफ व शिवानी गुप्ता द्वारा पीड़िता व उनके तीमारदारों को जमकर मारा पीटा गया। इस घटना को लेकर उनके परिवारजनों ने जिला अधिकारी के ट्विटर पर शिकायत किया। जिलाधिकारी ने मामले को संज्ञान में लेकर तत्काल एसीएमओ को कार्यवाही के लिए कहा, जिस पर दिनांक 30 अप्रैल 2020 को उप जिलाधिकारी विनय कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी राघवेंद्र चतुर्वेदी व थाना अध्यक्ष पंकज तिवारी की टीम ने अस्पताल की जांच कराकर बंद कराया। 
    वहीं आलम तो यह है कि, बगैर डिप्लोमा के वर्षों से संचालित इस नर्सिंग होम में अनुभव के आधार पर नॉर्मल डिलीवरी से लेकर सीजर ऑपरेशन तक किए जाते हैं, और हर वर्ष स्कोप नर्सिंग होम व लक्ष्मी हॉस्पिटल में दो चार मौतें होना आम बात हो चुकी हैं।जिसको लेकर आए दिन बवाल होते रहते हैं, दूसरी तरफ बछरावा सीएचसी के प्रभारी से लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी के रहमों करम पर इस तरह के दर्जनों नर्सिंग होम हर क्षेत्र में कुकुरमुत्ता की तरह झोलाछाप डॉक्टरों के मकड़जाल में फंसकर गरीब असहाय अपना घर खेत बेचकर जीवन बचाने का प्रयास करते हैं। वहीं बछरावा सीएचसी की आशा बहू, स्वास्थ्य कर्मी एएनएम व स्वास्थ्य कर्मी के द्वारा 20 से 30% कमीशन के चक्कर में इन झोलाछाप डॉक्टरों के यहां अच्छे इलाज के नाम पर भर्ती करा कर धन उगाही का काम करते हैं।

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