हजरत मोहम्मद जैसा पहले पृथ्वी पर न कोई आया न आ सकता है-उबैदुल्ला आज़मी।। Raebareli news ।।

माहताब खान
रायबरेली: दारूल उलूम हबीबिया गुलशने रज़ा जगपाल ताल, रायबरेली की तरफ से जश्ने आमदे रसूल का चौथा कार्यक्रम धोबियाना घण्टाघर, रायबरेली में आयोजित हुआ। जिसकी सरपरस्ती हज़रत मौलाना सैय्यद मो0 अहमद अशरफ जीलानी, अध्यक्षता हाफिज़ अनीस अहमद कुरैशी ने की। कारी मुम्ताज़ चिश्ती तिलावत से जलसे का आगाज हुआ।
     हाफिज़ मुमताज़ हाफिज़ गुलफाम फैज़ाबादी, क़ारी एख्लाक़ ने बारगाहे रिसालत में नात पाक पेश किया। जलसे को सम्बोधित करते हुए मुख्य वक्ता हज़रत मौलाना उबैदुल्लाह खान आज़मी पूर्व सांसद राज्यसभा ने कहा कि, मिलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम प्रत्येक व्यक्ति को मनाना चाहिये चूंकि, मीलादुन्नबी सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के कारण ही पूरा सौर मण्डल पृथ्वी आकाश अंततः सम्पूर्ण दुनिया प्रकाश में आयी।
       उन्होंने कहा कि, हुजूर का जन्म मानवता की रक्षा, पथ से भटके हुये मानव को सत्य के मार्ग पर लाने, अनाथ और बेसहारा को सुरक्षा देने, विधवाओं की इज़्ज़त, महिलाओं का सम्मान, मज़दूर के पसीना सूखने से पहले मज़दूरी देने, दुनिया में फैली हुई बुराईयों को मिटाने हेतु अल्लाह ने पूरी दुनिया में सबसे अच्छा आपको दुनिया में भेजा, न उनके जैसा कोई पृथ्वी पर आया न आ सकता है।
     दुनिया को संदेश देने से पहले उसे प्रयोगात्मक जीवन में करके दिखाया। आपने बाल्यकाल से ही न्याय की नींव रखी वह इस तरह की जब आप छोटे बालक थे तभी माई हलीमा सादिया का मात्र एक तरफ का दूध ही पीते चूंकि हलीमा सादिया के और भी बच्चे थे जिनके लिये आप एक दूध छोड़ देते। आपकी 40 साल का जीवन जो कि, नुबूवत के पहले का था उसमें भी मक्का वालों ने कभी अन्याय, किसी का हक़ मारना, किसी को क्षति पहुंचाना, किसी पर अत्याचार करना या इन जैसी दूसरी कोई भी बुराई नहीं पायी। सब आपकी सत्यता, कर्तव्यनिष्ठा, पराकर्म, के अनुयायी रहे।
      इसके बाद सैय्यद मो0 अहमद अशरफ जीलानी जायसी साहब ने जलसे को सम्बोधित करते हुए कहा कि, अच्छे एख़्लाक़ में हमें रसूल करीम का सच्चा गुलाम होना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि, आज का इन्सान हर चीज़ की खोज में लगा हुआ है मगर खुद अपनी ज़ात की खोज नहीं कर रहा है कि, वह क्यों पैदा किया गया। इन्सान पर ज़रुरी है की खोज के साथ-साथ पैदा होने की वजह को जाने और अल्लाह तआला की दी हुई नेअमतों को उसी मक़सद में लगाये। तालीमे मुस्तफा को बयान करते हुए आपने बेवाओं और यतीमों की अहमियत और जज़बए सहाबा को लोगों के सामने बयान फरमाया की हर सहाबी बेवाओं और यतीमों को अपने गले लगाया, आज हमारे समाज से बेवाओं और यतीमों की अहमियत खत्म हो गयी है। इसके बाद सलात व सलाम हुआ और फिर हज़रत सैय्यद साहब की दुआ पर जलसे का समापन हुआ।

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