सलिल पांडेय
मिर्जापुर: विदा होते वर्ष के रोजनामचा ( दैनिक लिखापढ़ी का रजिस्टर) का पन्ना खोलते आजादी मिलने के महीने अगस्त पर जब नजर टिकी तो लगा कि वर्ष '19 में जरूर ऐसा कुछ हो गया कि जनपद में एक उन्नीस टाइप का काम हुआ, जिससे जनपद की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर छीछालेदर युक्त चर्चा हो गई । अंतरराष्ट्रीय संचार माध्यमों ने 21वीं सदी के काले अध्याय में जिले का नाम लिख दिया ।
सत्ताधारी नेताओं की अम्पायरिंग में लगा प्रशासन हुआ क्लीन बोल्ड--
अगस्त महीने का अंतिम सप्ताह चमकते प्रशासनिक सूरज के अस्त की नींव तब रखी गई जब लोकतंत्र के दूसरे स्तम्भ कार्यपालिका को चतुर्थ स्तम्भ पत्रकारिता ने गुगली बाल फेंक कर ध्वस्त कर दिया ।
नमक-रोटी कांड---
लाखों के शास्त्री पुल पर विंध्याचल धाम के पैसे के दुरुपयोग, हेलीकॉप्टर बाबा, नमामि गंगे को लेकर नगरपालिका पर आक्रमण, कार्यदायी संस्थाओं से उठ रहे त्राहिमाम की गूंज के बीच नामी गिरामी नहीं बल्कि एक ग्रामीण अंचल के पत्रकार ने मिड डे मील के अंतर्गत देश के भावी कर्णधारों को दूध-दही, फल-फूल दिए जाने के नियमों को चट्ट कर नमक रोटी दिए जाने का मुद्दा उठाया तो उसे नौ दस रुपए के प्रशंसा प्रमाण पत्र देने की जगह नौ लाख की हवेली की ओर ले जाने का उपाय किया गया । फिर क्या था? जैसे जनपद स्तर के मुट्ठी भर स्वार्थलिप्सा में डूबे लोगों को छोड़ पूरी धरती की मीडिया कराह उठी । इस आवाज से धरती के साथ आसमान भी कांप उठा और मां विंध्यवासिनी के धाम में स्थित कालीखोह की मां काली का तीसरा नेत्र जागृत हो गया और तानाशाही शक्तियां मुंह के बल धड़ाम से गिर पड़ीं ।
चार कमिश्नर, चार एसपी एवं दो कलेक्टर को देखा '19 ने---
वर्ष '19 में कमिश्नरों में श्री एम एम लाल की सक्रियता, श्री ए के सिंह के कड़कदार प्रशासन के साथ सेवानिवृत्ति मण्डल मुख्यालय के लिए उल्लेखनीय चैप्टर रहा है तो कुछ ही दिनों के लिए श्री के राममोहन राव एवं बाद में वर्तमान कमिश्नर श्रीमती प्रीति शुक्ला ने चौथी कमिश्नर के रूप में यहां आकर नई पारी शुरू की । एसपी के रूप में आते और जाते श्रीमती शालिनी प्रशासनिक गुणाभाग के तहत वर्ष 19 शुरू होने कुछ ही दिन पहले यहां से हटीं तो नियमों से सख्त श्री विपिन कुमार मिश्र राजनीतिक षडयंत्र के शिकार हुए और हटाए गए । इसके बाद आए श्री अमित गुप्त कुछ ही दिन रहे कि जिले में त्रिकोणीय पुलिस सेवा करने वाले श्री अवधेश पांडेय को जानबूझ कर 'बलि का बकरा' नमक रोटी की आड़ में बना दिया गया । पांचवे एसपी के रूप में डॉ धर्मवीर सिंह हैं जो डीएम के रूप में 'यथा नाम तथा गुण' को चरितार्थ करते श्री सुशील कुमार पटेल के साथ हाथ में डंडा लेकर नवम्बर महीने से नगर और ग्रामीण अंचलों में घूमते नजर आ रहे हैं । एकमात्र मण्डल में अनुभवी डीआईजी श्री पीयूष कुमार श्रीवास्तव का गाइड लाइन अपने पुलिस अधीक्षकों को मिलता रहा है ।
डीएम के पद पर दो की तैनाती--
कार्यदायी संस्थाओं में त्राहिमाम की स्थिति वर्ष 19 में रही । एसडीएम के रूप में अत्यंत सौम्य तथा हेलीकॉप्टर बाबा के मैटर में नियमों के मामले में टस से मस न होने वाली कु0 सविता यादव को मिली प्रतिकूल टिप्पणी पर जिले को मायूस होते देखा गया । इसी साल मड़िहान के तहसीलदार को भी हेलीकाप्टर बाबा मैटर में बेहोश होते देखा गया । इस बीच डेढ़ साल से जमे डीएम श्री अनुराग पटेल क्लीन बोल्ड क्या हुए कि चतुर्दिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया । इसके बाद डीएम के रूप में श्री सुशील कुमार पटेल की नियुक्ति हुई । आते ही जिले में बारावफात एवं नागरिकता कानून को लेकर शांति व्यवस्था की बखूबी जिम्मेदारी सम्हाल रहे श्री पटेल की कार्यशैली को लेकर यहां के नागरिकों द्वारा यूपी गवर्मेंट का धन्यवाद बोलते सुना जा रहा है ।
वास्तविक प्रशासनिक अधिकारी---
डीएम का कक्ष जहां राजनीतिक अधिक होता जिला देख रहा था । कतिपय लोगों की घेरेबंदी से प्रायः डीएम को आमजनता से दूर हो जाते देखा जा रहा था, वहीं इनके कार्यकाल में काम से काम की नीति आम जनता को सुखदायी लग रही है । न फालतू किसी को बैठाना, न किसी को डीएम पद की धौंस दिखाना सफल अधिकारी का गुण होता है । जाते हुए साल के ये दो माह प्रशासनिक क्षेत्र में सुकून भरे लग रहे हैं । कार्यदायी संस्थाओं का मानना है कि जिस तरह की सकारात्मक कार्यशैली वर्तमान डीएम के कार्यकाल में शुरू हुई है, निश्चित रूप से इसका असर विकास कार्यों के मामले में आने वाले दिनों में अनुकूल दिखेगा ।
विवादों का पुल रहा भटौली पुल --
वैसे तो दो पुल भटौली एवं चुनार पर आवागमन वर्ष '19 में आमजनता के लिए सुखद रहा लेकिन भटौली पुल अपने निर्माण से लेकर लोकार्पण तक विवादों में रहा ।
सत्तापक्ष उपेक्षित होता रहा ।-
वर्ष '19 में सत्ता पक्ष भाजपा के जनप्रतिनिधियों के धैर्य-धारण का वर्ष रहा । शिलान्यास और लोकार्पण समारोहों में जनप्रतिनिधियों का वॉक आउट पूरे साल होता रहा ।
मेडिकल कालेज की सौगात--
इन तमाम धुंध भरे माहौल में जिले में मेडिकल कालेज की स्थापना की सौगात स्वागतयुक्त है । वैसे जाते जाते वर्ष में टूट गए कर्णावती नदी पर पुल, छानबे में पैंटून ब्रिज भी जनहितकारी कार्य इस वर्ष के खाते में है तो विंध्यकारीडोर को लेकर पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाओं को लेकर भी यह साल याद किया जाएगा ।
मिर्जापुर: विदा होते वर्ष के रोजनामचा ( दैनिक लिखापढ़ी का रजिस्टर) का पन्ना खोलते आजादी मिलने के महीने अगस्त पर जब नजर टिकी तो लगा कि वर्ष '19 में जरूर ऐसा कुछ हो गया कि जनपद में एक उन्नीस टाइप का काम हुआ, जिससे जनपद की अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर छीछालेदर युक्त चर्चा हो गई । अंतरराष्ट्रीय संचार माध्यमों ने 21वीं सदी के काले अध्याय में जिले का नाम लिख दिया ।
सत्ताधारी नेताओं की अम्पायरिंग में लगा प्रशासन हुआ क्लीन बोल्ड--
अगस्त महीने का अंतिम सप्ताह चमकते प्रशासनिक सूरज के अस्त की नींव तब रखी गई जब लोकतंत्र के दूसरे स्तम्भ कार्यपालिका को चतुर्थ स्तम्भ पत्रकारिता ने गुगली बाल फेंक कर ध्वस्त कर दिया ।
नमक-रोटी कांड---
लाखों के शास्त्री पुल पर विंध्याचल धाम के पैसे के दुरुपयोग, हेलीकॉप्टर बाबा, नमामि गंगे को लेकर नगरपालिका पर आक्रमण, कार्यदायी संस्थाओं से उठ रहे त्राहिमाम की गूंज के बीच नामी गिरामी नहीं बल्कि एक ग्रामीण अंचल के पत्रकार ने मिड डे मील के अंतर्गत देश के भावी कर्णधारों को दूध-दही, फल-फूल दिए जाने के नियमों को चट्ट कर नमक रोटी दिए जाने का मुद्दा उठाया तो उसे नौ दस रुपए के प्रशंसा प्रमाण पत्र देने की जगह नौ लाख की हवेली की ओर ले जाने का उपाय किया गया । फिर क्या था? जैसे जनपद स्तर के मुट्ठी भर स्वार्थलिप्सा में डूबे लोगों को छोड़ पूरी धरती की मीडिया कराह उठी । इस आवाज से धरती के साथ आसमान भी कांप उठा और मां विंध्यवासिनी के धाम में स्थित कालीखोह की मां काली का तीसरा नेत्र जागृत हो गया और तानाशाही शक्तियां मुंह के बल धड़ाम से गिर पड़ीं ।
चार कमिश्नर, चार एसपी एवं दो कलेक्टर को देखा '19 ने---
वर्ष '19 में कमिश्नरों में श्री एम एम लाल की सक्रियता, श्री ए के सिंह के कड़कदार प्रशासन के साथ सेवानिवृत्ति मण्डल मुख्यालय के लिए उल्लेखनीय चैप्टर रहा है तो कुछ ही दिनों के लिए श्री के राममोहन राव एवं बाद में वर्तमान कमिश्नर श्रीमती प्रीति शुक्ला ने चौथी कमिश्नर के रूप में यहां आकर नई पारी शुरू की । एसपी के रूप में आते और जाते श्रीमती शालिनी प्रशासनिक गुणाभाग के तहत वर्ष 19 शुरू होने कुछ ही दिन पहले यहां से हटीं तो नियमों से सख्त श्री विपिन कुमार मिश्र राजनीतिक षडयंत्र के शिकार हुए और हटाए गए । इसके बाद आए श्री अमित गुप्त कुछ ही दिन रहे कि जिले में त्रिकोणीय पुलिस सेवा करने वाले श्री अवधेश पांडेय को जानबूझ कर 'बलि का बकरा' नमक रोटी की आड़ में बना दिया गया । पांचवे एसपी के रूप में डॉ धर्मवीर सिंह हैं जो डीएम के रूप में 'यथा नाम तथा गुण' को चरितार्थ करते श्री सुशील कुमार पटेल के साथ हाथ में डंडा लेकर नवम्बर महीने से नगर और ग्रामीण अंचलों में घूमते नजर आ रहे हैं । एकमात्र मण्डल में अनुभवी डीआईजी श्री पीयूष कुमार श्रीवास्तव का गाइड लाइन अपने पुलिस अधीक्षकों को मिलता रहा है ।
डीएम के पद पर दो की तैनाती--
कार्यदायी संस्थाओं में त्राहिमाम की स्थिति वर्ष 19 में रही । एसडीएम के रूप में अत्यंत सौम्य तथा हेलीकॉप्टर बाबा के मैटर में नियमों के मामले में टस से मस न होने वाली कु0 सविता यादव को मिली प्रतिकूल टिप्पणी पर जिले को मायूस होते देखा गया । इसी साल मड़िहान के तहसीलदार को भी हेलीकाप्टर बाबा मैटर में बेहोश होते देखा गया । इस बीच डेढ़ साल से जमे डीएम श्री अनुराग पटेल क्लीन बोल्ड क्या हुए कि चतुर्दिक प्रतिक्रियाओं का दौर शुरू हो गया । इसके बाद डीएम के रूप में श्री सुशील कुमार पटेल की नियुक्ति हुई । आते ही जिले में बारावफात एवं नागरिकता कानून को लेकर शांति व्यवस्था की बखूबी जिम्मेदारी सम्हाल रहे श्री पटेल की कार्यशैली को लेकर यहां के नागरिकों द्वारा यूपी गवर्मेंट का धन्यवाद बोलते सुना जा रहा है ।
वास्तविक प्रशासनिक अधिकारी---
डीएम का कक्ष जहां राजनीतिक अधिक होता जिला देख रहा था । कतिपय लोगों की घेरेबंदी से प्रायः डीएम को आमजनता से दूर हो जाते देखा जा रहा था, वहीं इनके कार्यकाल में काम से काम की नीति आम जनता को सुखदायी लग रही है । न फालतू किसी को बैठाना, न किसी को डीएम पद की धौंस दिखाना सफल अधिकारी का गुण होता है । जाते हुए साल के ये दो माह प्रशासनिक क्षेत्र में सुकून भरे लग रहे हैं । कार्यदायी संस्थाओं का मानना है कि जिस तरह की सकारात्मक कार्यशैली वर्तमान डीएम के कार्यकाल में शुरू हुई है, निश्चित रूप से इसका असर विकास कार्यों के मामले में आने वाले दिनों में अनुकूल दिखेगा ।
विवादों का पुल रहा भटौली पुल --
वैसे तो दो पुल भटौली एवं चुनार पर आवागमन वर्ष '19 में आमजनता के लिए सुखद रहा लेकिन भटौली पुल अपने निर्माण से लेकर लोकार्पण तक विवादों में रहा ।
सत्तापक्ष उपेक्षित होता रहा ।-
वर्ष '19 में सत्ता पक्ष भाजपा के जनप्रतिनिधियों के धैर्य-धारण का वर्ष रहा । शिलान्यास और लोकार्पण समारोहों में जनप्रतिनिधियों का वॉक आउट पूरे साल होता रहा ।
मेडिकल कालेज की सौगात--
इन तमाम धुंध भरे माहौल में जिले में मेडिकल कालेज की स्थापना की सौगात स्वागतयुक्त है । वैसे जाते जाते वर्ष में टूट गए कर्णावती नदी पर पुल, छानबे में पैंटून ब्रिज भी जनहितकारी कार्य इस वर्ष के खाते में है तो विंध्यकारीडोर को लेकर पक्ष-विपक्ष की प्रतिक्रियाओं को लेकर भी यह साल याद किया जाएगा ।

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