मिर्जापुर। विंध्य कॉरिडोर को लेकर द्वंद्वात्मक हालात बनते जा रहे हैं। जहां पंडा समुदाय का ही एक वर्ग इसके समर्थन में है वहीं दूसरा वर्ग विरोध में कभी धाम बंद का तो कभी कलेक्ट्रेट में आकर पत्रक देने तथा सामान्य जनता से समर्थन मांगता दिख रहा है ।
यमलोक की यात्रा का उलझा मामला---
विंध्याचल के 70 वर्षीय बब्बी नामक एक दुकानदार की ट्रेन पटरियों से यमराज लोक तक की यात्रा के बाद शीतकाल की जनवरी ग्रीष्म ऋतु के जून में बदल गई है । परस्पर विरोधी दावे का सच क्या है, यह भी उलझा हुआ सा है ।
'अमर उजाला' की फ्रंट पेज की खबर के बाद 'स...न...स...नी'---
दर असल 21 जनवरी को प्रमुख अखबारों में गिने जाने वाले 'अमर उजाला' के फ्रंट पर खबर छपी कि कॉरिडोर में तोड़फोड़ की जद में आए डिप्रेशन के शिकार एक दुकानदार ने अपने जीवन को यमराज के हवाले कर दिया । इसके बाद प्रशासन आया मैदान में कि ऐसी कोई बात नहीं । यह आत्महंता-यज्ञ नहीं बल्कि इत्तिफाकन दुर्घटनात्मक हादसा है ।
अखबारी दुनियां भी दो-फांक में---
इस मैटर को लेकर प्रेस-जगत के भी 'अलग-अलग ढपली-अलग अलग राग' की स्थिति है । जो खबर में पीछे छूट गए वे आत्म-हन्ता मामला मान रहे जबकि कुछ इस पर तुले हैं कि 15 परिवारों का मुखिया कमाई पर बुलडोजर चलने की आशंका से डिप्रेस हुआ और उसे इसका हल स्वयं मौत में दिखाई पड़ा
जांच का विषय---
जिले में आते ही पूर्व के वर्षों में हुए साम्प्रदायिक सद्भाव के उलझे ताने बाने को सुलझाने में लगी कमिश्नर श्रीमती प्रीति शुक्ला और DM श्री सुशील कुमार पटेल कॉरिडोर मैटर को भी सुलझाने की कोशिश में प्रशासनिक अधिकारियों को लगाए हैं । चूंकि यह CM श्री आदित्य योगीनाथ के स्तर से लिया गया निर्णय है इसलिए इस अहम् मामले में प्रशासन फूंक फूंक कर कदम उठा रहा है । पण्डों के साथ बातचीत और नियम कानूनों की जानकारी से निरन्तर जारी है ।
नियमों के तहत मुआवजा---
कतिपय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विंध्य कॉरिडोर में नियम के तहत मुआवजा दिया जाएगा लेकिन बहुतों को सही जानकारी नहीं है लिहाजा उल्टी सीधी बातें हो रही हैं ।
पंडा समुदाय की दलील- -
पंडा समुदाय का कहना है कि मुआवजा विश्वनाथ कॉरिडोर से कम पैसा मिल रहा है । पंडा समुदाय का कहना है कि मुख्य स्थलों से हटाए जाने के बाद उनकी नियमित आय बंद हो जाएगी तो पेट-पर्दा चलेगा ?
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर
यमलोक की यात्रा का उलझा मामला---
विंध्याचल के 70 वर्षीय बब्बी नामक एक दुकानदार की ट्रेन पटरियों से यमराज लोक तक की यात्रा के बाद शीतकाल की जनवरी ग्रीष्म ऋतु के जून में बदल गई है । परस्पर विरोधी दावे का सच क्या है, यह भी उलझा हुआ सा है ।
'अमर उजाला' की फ्रंट पेज की खबर के बाद 'स...न...स...नी'---
दर असल 21 जनवरी को प्रमुख अखबारों में गिने जाने वाले 'अमर उजाला' के फ्रंट पर खबर छपी कि कॉरिडोर में तोड़फोड़ की जद में आए डिप्रेशन के शिकार एक दुकानदार ने अपने जीवन को यमराज के हवाले कर दिया । इसके बाद प्रशासन आया मैदान में कि ऐसी कोई बात नहीं । यह आत्महंता-यज्ञ नहीं बल्कि इत्तिफाकन दुर्घटनात्मक हादसा है ।
अखबारी दुनियां भी दो-फांक में---
इस मैटर को लेकर प्रेस-जगत के भी 'अलग-अलग ढपली-अलग अलग राग' की स्थिति है । जो खबर में पीछे छूट गए वे आत्म-हन्ता मामला मान रहे जबकि कुछ इस पर तुले हैं कि 15 परिवारों का मुखिया कमाई पर बुलडोजर चलने की आशंका से डिप्रेस हुआ और उसे इसका हल स्वयं मौत में दिखाई पड़ा
जांच का विषय---
जिले में आते ही पूर्व के वर्षों में हुए साम्प्रदायिक सद्भाव के उलझे ताने बाने को सुलझाने में लगी कमिश्नर श्रीमती प्रीति शुक्ला और DM श्री सुशील कुमार पटेल कॉरिडोर मैटर को भी सुलझाने की कोशिश में प्रशासनिक अधिकारियों को लगाए हैं । चूंकि यह CM श्री आदित्य योगीनाथ के स्तर से लिया गया निर्णय है इसलिए इस अहम् मामले में प्रशासन फूंक फूंक कर कदम उठा रहा है । पण्डों के साथ बातचीत और नियम कानूनों की जानकारी से निरन्तर जारी है ।
नियमों के तहत मुआवजा---
कतिपय प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि विंध्य कॉरिडोर में नियम के तहत मुआवजा दिया जाएगा लेकिन बहुतों को सही जानकारी नहीं है लिहाजा उल्टी सीधी बातें हो रही हैं ।
पंडा समुदाय की दलील- -
पंडा समुदाय का कहना है कि मुआवजा विश्वनाथ कॉरिडोर से कम पैसा मिल रहा है । पंडा समुदाय का कहना है कि मुख्य स्थलों से हटाए जाने के बाद उनकी नियमित आय बंद हो जाएगी तो पेट-पर्दा चलेगा ?
©सलिल पांडेय, मिर्जापुर



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