मिर्जापुर: वन-संपदाओं से आच्छादित मिर्जापुर धरती का वह हिस्सा है जिसका आध्यात्म, साहित्य, सँस्कृति, कला, पर्यटन, उद्योग के ही क्षेत्र में नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वंतन्त्रता आंदोलन के दौरान अविस्मरणीय भूमिका का उल्लेख दूर-दूर तक आज भी होता रहता है । इसके कारण इस मण्डल का नाम देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में बड़े आदर के साथ लिया जाता है ।
गूंज रहीं बलिदान की गाथाएं !---राष्ट्रीय पर्व गणतन्त्र दिवस के अवसर पर यदि स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन पर दृष्टि जाती है तो स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की गूंजती गाथाओं से आज भी उनको नमन करने के लिए मन विवश हो जाता है ।
1857 में मजिस्ट्रेट का धोखा !--
ब्रिटिश हुकूमत से कराहते देश की मुक्ति-आंदोलन में जब बहादुर शाह जफर, तात्या टोपे, नाना साहब और झांसी की रानी ने बिगुल बजाया तो वर्तमान में आजादी के कतिपय दीवाने पहुंचे जहां क्रांतिकारी भोला सिंह, रामकरन सिंह तथा कुंवर उदवन्त सिंह ने उनका स्वागतं किया जिसपर मिर्जापुर में तैनात रहा तत्कालीन ज्वाइंट मजिस्ट्रेट विलियम रिचर्ड म्योर घबड़ा गया । समझौते के लिए धोखे से बुलवाकर इन्हें फांसी पर चढ़वा दिया । म्योर के इस धोखे से तिलमिलाए तब मिर्जापुर में ही शामिल रहे भदोही के क्रांतिकारी झूरी सिंह ने 4 जुलाई 1857 को म्योर का सिर कत्ल सिर धड़ से अलग करके किया । झूरी सिंह को भी फांसी के फंदे पर झुलाया गया ।
आजादी के लिए जब दूसरी बार बिगुल बजा और असहयोग आंदोलन शुरु हुआ तब मिर्जापुर के जे एन विल्सन, बैरिस्टर युसूफ इमाम, हनुमान प्रसाद पांडेय, उपेन्दोनाथ बनर्जी, विन्देश्वरी प्रसाद मालवीय, मौलवी अब्दुल हमीद, परमानन्द पंजाबी, मुंशी चंद्रिका प्रसाद, मास्टर गंगा प्रसाद, कन्हैयालाल मिस्त्री, सालिक राम खत्री आदि को तत्कालीन कलेक्टर ने गिरफ्तार कर जेल में यातना दी । इस गिरफ्तारी का पूरे मिर्जापुर के (भदोही तथा रावर्ट्सगंज भी एवं दुद्धी) में जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई । तमाम वकीलों ने अपनी डिग्री जला दी और आंदोलन में कूद पड़े । इस कड़ी में चुनार क्षेत्र भी जब कूद पड़ा नरोत्तम सिंह, विश्राम सिंह, पदुम प्रसाद सिंह, डॉ सरयू प्रसाद, शीतलादीन, गयाप्रसाद सिंह को गिरफ्तार किया गया । रावर्ट्सगंज में गंगाप्रसाद जायसवाल, महादेव चौबे कृष्णदत्त को यातना झेलनी पड़ी । इन लोगों को मिर्जापुर के जेल में इतना पीटा गया कि वे जेल से छूटने के बावजूद चलने में असमर्थ तो रहे लेकिन आंदोलन का अलख जगाते रहे । इतिहास के पन्नों में इस क्षेत्र के साहस की अनेक गाथाएं है । अत्यंत दुरूह दुद्धी, म्योरपुर मुड़ी सेमर और गोहड़ा ग्राम से अनेक सेनानी पकड़े गए और इनके घर तथा पशुओं की नीलामी कर दो गईं ।
किशोर उम्र के नरेश चंद स्टेशन फूंकने में जान गवां दी ।---
17 अगस्त 1942 का दिन । कुछ जोशीले युवकों ने पहाड़ा स्टेशन पर धावा बोल दिया । जिसमें अलग अलग हिस्सों किरियात, भरपूरा, बबुरा क्षेत्र के लोग भदोही के खमरिया क्षेत्र के 18 वर्षीय नरेश चंद सिन्हा के पहुंचे । नरेश चंद बी एल जे इंटर कालेज के छात्र थे। स्टेशन के रिकार्ड रूम में आग लगाई गई । लेकिन इसी आग में नेतृत्व कर रहे नरेश जल कर मर गए। आजादी के लिए शहीद होने वालों में 22 वर्ष के कश्मीर सिंह का नाम भी आदर के साथ लिया जाता है । इसके अलावा कुछ दिनों के अंतराल पर 24 अगस्त 1942 को 200 लोगों ने भैसा स्टेशन में भी आग लगा दी । यहां गोलियां चली थी जिनमें कई सेनानी मारे गए थे । जिन्हें श्रद्धांजलि आवश्यक है ।
1929 में गांधी जी आए---
इस जज्बे को देखकर सन 1929 में गांधी जी भी मिर्जापुर आए । यहां लालडिग्गी पार्क में चरखा चलाया । 1939 में नेताजी सुभाष चंद बोस भी क्रांति धारा तेज करने लालगंज आए ।
साहित्य-मनीषियों का योगदान---
आजादी आंदोलन को धार देने में साहित्यकारों की जबरदस्त भूमिका थी । जिसमें मिर्जापुर नगर के चौधरी बद्रीनारायण उपाध्याय 'प्रेमघन', महादेव प्रसाद सेठ मतवाला, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, माधव प्रसाद धवन, सीताराम द्विवेदी समन्वयी, सीताराम गुप्त, आचार्य रामचंद शुक्ल, पांडेय बेचन शर्मा उग्र, मुंशी नवजादिक लाल, शिवपूजन सहाय, काशीप्रसाद जायसवाल, बंग महिला, बटुक प्रसाद अग्रवाल आदि ऐसे सम्माननीय नाम हैं जिन्होंने अपनी लेखनी को तोप बना दिया ।
मुंशी प्रेमचंद के छोटे भाई महताब राय ने भी 1922 में यही से कलम से लड़ाई का अड्डा बनाया । मुंशी प्रेमचंद को चुनार जेल में जब एक अध्यापक के रूप में तैनात किया गया तो वे भी अंग्रेजों की ज्यादती से विचलित होकर अनेक कहानियां यहीं लिखी ।
इस प्रकार वृहद मिर्जापुर (अब सोनभद्र और भदोही अलग)ने आजादी आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया है ।
पर्यटनकी दृष्टि से अद्भुत जिला--
पर्यटन की यहां अनन्त संभवनाएं हैं । उद्योग के क्षेत्र में यहां के गलीचों का पश्चिमी देशों में किसी मेहमान की तरह स्वागत किया जाता है । बर्तन उद्योग की वजह से इस जिले का संबन्ध यूपी के अलावा बिहार नेपाल तक है । मिर्जापुर के विंध्यक्षेत्र का उल्लेख तो लगभग सभी पुराणों में है।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©लेखकाधीन



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