रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली:सीएए के समर्थन में महराजगंज विकासखंड मुख्यालय पर एक विशाल मोटरसाइकिल रैली का आयोजन लोक जागरण मंच के तत्वाधान में निकाली गई। जिसमें राष्ट्रीय ध्वज लेकर नवयुवकों बूढ़े बच्चे जवानों ने भारत माता की जय, वंदे मातरम, सीएए लाना है देश को बचाना है के उद्घोष के साथ संपूर्ण महराजगंज कस्बा गुंजायमान हो रहा था। वही रैली में लोगों द्वारा निरंतर कहा जा रहा था कि, सीएए आया है देश हर्षया है। बुद्ध ने मांगा सीएए, पारसी ने मांगा सीएए, ईसाईयों ने मांगा सीएए, शरणार्थियों ने मांगा सीएए, सीएए आया है देश हर्ष आया है, के गगनभेदी नारों के साथ सैकड़ो की तादात में मोटरसाइकिल रैली निकालकर लोगों को जागरुक किया गया।
आपको बता दें कि, इस कार्यक्रम में मौजूद रमेश अवस्थी समाजसेवी ने अपने संबोधन के दौरान बताया कि, सीएए कानून नागरिकता देने का कानून है ना की किसी की नागरिकता लेने का। भारतवर्ष में शरणार्थियों की इज्जत रामराज्य से ही होती रही है। विभीषण को भगवान राम ने जब वह शरणार्थी के रूप में आया तो, उसे समुद्र के जल से तिलक करके लंकेश बना दिया। भारत अखंड था तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश भारत के ही अंग थे।
श्री अवस्थी ने आगे कहा कि, जब देश का विभाजन हुआ तो मिली-जुली आबादी देश में निवास कर रही थी 3 मई 1947 को देश के बंटवारे की घोषणा हो गई तो 77 दिन में 1947 के बीच में यह आबादी एक स्थान से दूसरे स्थान पर धार्मिक आधार पर नहीं जा सकी। तब गांधी जी ने नेहरू लियाकत कमेटी के द्वारा 26 सितंबर 1947 को प्रार्थना सभा में एक प्रस्ताव किया था कि, दोनों देशों के अल्पसंख्यक अपनी इच्छा से एक दूसरे देश जा सकते हैं और वहां की सरकारें उनका पूरा ख्याल रखेंगी। लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश अलग देश बनाने पर अपने को संवैधानिक रूप से इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया।
जिसके कारण वहां बस रहे अल्पसंख्यक, हिंदू, पारसी, जैन, इसाई के साथ गलत बर्ताव होने लगा। जिसके कारण वह शरणार्थी बनकर भारत में आकर बस गए और कुछ तो वीजा पासपोर्ट की अवधि को बढ़ाकर भारत में रह रहे हैं और कुछ अनजान जीवन शरणार्थी के रूप में भारत में बिता रहे हैं। जिससे उनको भारत की नागरिकता न मिल पाने के कारण कोई भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
श्री अवस्थी ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि, भारतीय जनता पार्टी अपने घोषणा पत्र के मुताबिक शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए कटिबद्ध है। उसी के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को पास किया है। यह अधिनियम 1955 से ही है। जिसके द्वारा विभिन्न धार्मिक समूहों को नागरिकता भारत में दी गई है। इस संशोधन में केवल जो उम्र 11 वर्ष थी वह 6 वर्ष कर दी गई है। जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में शरणार्थी के रूप में हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध आकर बस गए हैं। उनको भारत की नागरिकता दी जाएगी।
इस मौके पर विधायक रामनरेश रावत, ब्लाक प्रमुख सत्येंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहू, क्षेत्रीय महामंत्री भाजपा दिनेश तिवारी, विधानसभा प्रभारी प्रेम मिश्रा, पूर्व मंडल अध्यक्ष सरदार फत्ते सिंह, धर्मेश मिश्रा, सोहनलाल, जगमोहन, द्वारिका मौर्य, सूर्य प्रकाश वर्मा मंडल अध्यक्ष महराजगंज आदि लोग मौजूद रहे।
महराजगंज/रायबरेली:सीएए के समर्थन में महराजगंज विकासखंड मुख्यालय पर एक विशाल मोटरसाइकिल रैली का आयोजन लोक जागरण मंच के तत्वाधान में निकाली गई। जिसमें राष्ट्रीय ध्वज लेकर नवयुवकों बूढ़े बच्चे जवानों ने भारत माता की जय, वंदे मातरम, सीएए लाना है देश को बचाना है के उद्घोष के साथ संपूर्ण महराजगंज कस्बा गुंजायमान हो रहा था। वही रैली में लोगों द्वारा निरंतर कहा जा रहा था कि, सीएए आया है देश हर्षया है। बुद्ध ने मांगा सीएए, पारसी ने मांगा सीएए, ईसाईयों ने मांगा सीएए, शरणार्थियों ने मांगा सीएए, सीएए आया है देश हर्ष आया है, के गगनभेदी नारों के साथ सैकड़ो की तादात में मोटरसाइकिल रैली निकालकर लोगों को जागरुक किया गया।
आपको बता दें कि, इस कार्यक्रम में मौजूद रमेश अवस्थी समाजसेवी ने अपने संबोधन के दौरान बताया कि, सीएए कानून नागरिकता देने का कानून है ना की किसी की नागरिकता लेने का। भारतवर्ष में शरणार्थियों की इज्जत रामराज्य से ही होती रही है। विभीषण को भगवान राम ने जब वह शरणार्थी के रूप में आया तो, उसे समुद्र के जल से तिलक करके लंकेश बना दिया। भारत अखंड था तो पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश भारत के ही अंग थे।
श्री अवस्थी ने आगे कहा कि, जब देश का विभाजन हुआ तो मिली-जुली आबादी देश में निवास कर रही थी 3 मई 1947 को देश के बंटवारे की घोषणा हो गई तो 77 दिन में 1947 के बीच में यह आबादी एक स्थान से दूसरे स्थान पर धार्मिक आधार पर नहीं जा सकी। तब गांधी जी ने नेहरू लियाकत कमेटी के द्वारा 26 सितंबर 1947 को प्रार्थना सभा में एक प्रस्ताव किया था कि, दोनों देशों के अल्पसंख्यक अपनी इच्छा से एक दूसरे देश जा सकते हैं और वहां की सरकारें उनका पूरा ख्याल रखेंगी। लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश अलग देश बनाने पर अपने को संवैधानिक रूप से इस्लामिक राष्ट्र घोषित कर दिया।
जिसके कारण वहां बस रहे अल्पसंख्यक, हिंदू, पारसी, जैन, इसाई के साथ गलत बर्ताव होने लगा। जिसके कारण वह शरणार्थी बनकर भारत में आकर बस गए और कुछ तो वीजा पासपोर्ट की अवधि को बढ़ाकर भारत में रह रहे हैं और कुछ अनजान जीवन शरणार्थी के रूप में भारत में बिता रहे हैं। जिससे उनको भारत की नागरिकता न मिल पाने के कारण कोई भी सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
श्री अवस्थी ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि, भारतीय जनता पार्टी अपने घोषणा पत्र के मुताबिक शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए कटिबद्ध है। उसी के तहत नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को पास किया है। यह अधिनियम 1955 से ही है। जिसके द्वारा विभिन्न धार्मिक समूहों को नागरिकता भारत में दी गई है। इस संशोधन में केवल जो उम्र 11 वर्ष थी वह 6 वर्ष कर दी गई है। जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में शरणार्थी के रूप में हिंदू, सिख, ईसाई, पारसी और बौद्ध आकर बस गए हैं। उनको भारत की नागरिकता दी जाएगी।
इस मौके पर विधायक रामनरेश रावत, ब्लाक प्रमुख सत्येंद्र प्रताप सिंह, जिला पंचायत सदस्य प्रभात साहू, क्षेत्रीय महामंत्री भाजपा दिनेश तिवारी, विधानसभा प्रभारी प्रेम मिश्रा, पूर्व मंडल अध्यक्ष सरदार फत्ते सिंह, धर्मेश मिश्रा, सोहनलाल, जगमोहन, द्वारिका मौर्य, सूर्य प्रकाश वर्मा मंडल अध्यक्ष महराजगंज आदि लोग मौजूद रहे।


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