रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: ब्लॉक सभागार में राष्ट्रीय विचार मंच के संयोजन में एक जनप्रतिनिधियों की गोष्ठी संपन्न हुई। जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर संकल्प लिया कि, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विषय में जो भ्रांतियां फैली हुई है उसका हम सब को मिलकर पर्दाफाश करना है।
आपको बता दें कि, मुख्य वक्ता के रूप में रमेश अवस्थी ने शरणार्थियों के दुखद जीवन का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया और कहा कि, यह अधिनियम उन शरणार्थियों के जीवन स्तर को उठाकर उन्हें देश की मुख्यधारा में जोड़ने का काम करेगा। लेकिन देश में घुसपैठियों के हमदर्द इस अधिनियम का विरोध मुस्लिम नागरिकों के बीच में भ्रम फैलाकर कि, इस अधिनियम से तुम्हारी नागरिकता चली जाएगी। जोकि, सरासर झूठ है। यह अधिनियम पड़ोसी इस्लामिक देशों में सताए गए अल्पसंख्यकों जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आकर बस चुके हैं उनको नागरिकता देने के लिए है ना की किसी की नागरिकता लेने के लिए है।
उन्होंने आगे कहा कि, 1955 से अब तक कई बार पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की गई है। केवल इस अधिनियम में थोड़ा संशोधन किया गया है। जैसा कि, समय-समय पर सभी अधिनियम में संशोधन होते रहते हैं। अगर देश का बटवारा धर्म के आधार पर ना हुआ होता तो, इस अधिनियम को लाने की जरूरत ही नही पड़ती। नेहरू लियाकत कमेटी के वादों का उल्लंघन न होता। तो पाकिस्तान में रह रहे दलित पिछड़ों के साथ उत्पीड़न ना होता और वह भारत में शरणार्थी के रूप में नहीं आते।
श्री अवस्थी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, अपने देश की परंपरा रही है कि, शरणार्थियों को पूरा मान सम्मान दिया गया है। उसी काम को सरकार ने अपने घोषणा पत्र के अनुसार पूरा किया है। देश के गृहमंत्री ने बार-बार यह घोषणा की है कि, अधिनियम से किसी का अहित नहीं होगा। चाहे वह जिस धर्म को मानने वाला हो।
उपस्थित लोगों ने कार्यक्रमों के माध्यम से कॉलेजों में सभाएं रैली और जनसंपर्क करके इस भ्रम को दूर करने का संकल्प लिया गया है।
महराजगंज/रायबरेली: ब्लॉक सभागार में राष्ट्रीय विचार मंच के संयोजन में एक जनप्रतिनिधियों की गोष्ठी संपन्न हुई। जिसमें क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने एक साथ मिलकर संकल्प लिया कि, नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के विषय में जो भ्रांतियां फैली हुई है उसका हम सब को मिलकर पर्दाफाश करना है।
आपको बता दें कि, मुख्य वक्ता के रूप में रमेश अवस्थी ने शरणार्थियों के दुखद जीवन का बहुत ही मार्मिक चित्रण किया और कहा कि, यह अधिनियम उन शरणार्थियों के जीवन स्तर को उठाकर उन्हें देश की मुख्यधारा में जोड़ने का काम करेगा। लेकिन देश में घुसपैठियों के हमदर्द इस अधिनियम का विरोध मुस्लिम नागरिकों के बीच में भ्रम फैलाकर कि, इस अधिनियम से तुम्हारी नागरिकता चली जाएगी। जोकि, सरासर झूठ है। यह अधिनियम पड़ोसी इस्लामिक देशों में सताए गए अल्पसंख्यकों जो 31 दिसंबर 2014 तक भारत में आकर बस चुके हैं उनको नागरिकता देने के लिए है ना की किसी की नागरिकता लेने के लिए है।
उन्होंने आगे कहा कि, 1955 से अब तक कई बार पाकिस्तान से विस्थापित होकर आए शरणार्थियों को नागरिकता प्रदान की गई है। केवल इस अधिनियम में थोड़ा संशोधन किया गया है। जैसा कि, समय-समय पर सभी अधिनियम में संशोधन होते रहते हैं। अगर देश का बटवारा धर्म के आधार पर ना हुआ होता तो, इस अधिनियम को लाने की जरूरत ही नही पड़ती। नेहरू लियाकत कमेटी के वादों का उल्लंघन न होता। तो पाकिस्तान में रह रहे दलित पिछड़ों के साथ उत्पीड़न ना होता और वह भारत में शरणार्थी के रूप में नहीं आते।
श्री अवस्थी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, अपने देश की परंपरा रही है कि, शरणार्थियों को पूरा मान सम्मान दिया गया है। उसी काम को सरकार ने अपने घोषणा पत्र के अनुसार पूरा किया है। देश के गृहमंत्री ने बार-बार यह घोषणा की है कि, अधिनियम से किसी का अहित नहीं होगा। चाहे वह जिस धर्म को मानने वाला हो।
उपस्थित लोगों ने कार्यक्रमों के माध्यम से कॉलेजों में सभाएं रैली और जनसंपर्क करके इस भ्रम को दूर करने का संकल्प लिया गया है।

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