लेखन चोरों के विरुद्ध अभियान जारी

मिर्जापुर । 'लचक' (लेखन चोर कंट्रोल) फ्रंट की मुहिम में धीरे-धीरे दूसरों के लेखन को अपना नाम देकर वाहवाही लूटने वाले चिह्नित होने लगे हैं । कुछ तो चोर सोशल मीडिया पर ही मूल लेखक के नाम पर जेसीबी चलाकर ध्वस्त कर अपनी इमारत खड़ी करते देखे जा रहे हैं तो कुछ प्रिंट मीडिया में भी ।
चोरी भी सीनाजोरी भी--
युग 'चोरी और सीनाजोरी का' ही कहें कि यदि किसी पाकेटमार या दुकान से चोरी करते किसी को पुलिस रंगेहाथ पकड़ती है तो 10-20 लोग चोर की तरफ से थाने और एसपी आफिस का घेराव कर दलील देते हैं कि यह चोर नहीं बहुत बड़ा धर्मात्मा और साव है । यदि यह चोरी नहीं करता तो इसके बीमार बच्चे का इलाज कैसे होता ? पुलिस को ललकारते कि 10-20 हजार की चोरी में इतनी सक्रियता ? लाखों की फलां जगह डकैती पड़ी, उसमें चुप्पी साधे है पुलिस ?
यही हालत लेखन चोरों की भी है---
जब लेखन चोर पकड़े जाते हैं तो दलील देते हैं कि वे सरस्वती के वरद पुत्र हैं । वे दसों-बीसों साल से कलम घिस रहे हैं । आंखें तरेरते है, गोया आंखों से ही निगल जाएंगे । सच मे वे बेचारे हैं और  नहीं जानते कि किसी दिन कॉपीराइट एक्ट के मुकदमे में फंस जाएंगे तो उन्हें मूल लेखक को हर्जाना देना होगा ।
© यह  लोगो मूल लेखक के  स्वत्वाधिकार को चिह्नित करता है ।
                      -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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