ईरानी बोध-कथा और चीनी व्यथा

सन्त को अदृश्य बेटे से चित्त पर और अदृश्य बीमारी कोरोना से वित्त पर चोट ?----
ईरान देश के सन्त थे मुल्ला मसरूद्दीन । उनकी शादी हुई । कुछ साल गुजर गए । उन्हें कोई संतान नहीं हुई । एक दिन शयन कक्ष में उनकी पत्नी ने कहा- ए जी, यदि हमें बेटा हुआ तो उसे कहाँ सुलाएँगे ।' मुल्ला पत्नी से कुछ दूरी बनाते हुए कहा-ये जो बीच मे जगह है, हम दोनों के बीच वहीं सुलाएँगे । पत्नी ने कहा 'यदि दूसरा हुआ तो ?' मुल्ला थोड़ा और पीछे हटे और बोले-'उसे भी हम दोनों के बीच ।' पत्नी बोली-'तीसरा हुआ तो ?' फिर मुल्ला और पीछे हुए कि बिस्तर से गिर पड़े और तेज चोट के कारण वे चीखने लगे ।
   मुल्ला की तेज चीख पर पूरा मुहल्ला दौड़ कर आया और पूछने लगा कि क्या हुआ ?
अदृश्य बेटे की वजह से चोट !---
मुहल्ले वालों को मुल्ला ने जवाब दिया-'मुझे अदृश्य बेटे ने गिरा दिया ।' बोले- 'सोचिए अभी वह पैदा नहीं हुआ तो इतना कष्ट दे रहा है और जब पैदा हो जाएगा तो कितना कष्ट देगा ।'
यही हालत चीनी व्यथा है कोरोना वायरस की !---
विश्व की सेहत मंदी के लिए गठित WHO ने इस प्रकार की किसी बीमारी से इनकार किया है । लेकिन अपने देश भारत में मीडिया तंत्र, जो बहुराष्ट्रीय कंपनियों के विज्ञापनों के दबाव में साष्टांग की मुद्रा में रहती है, ने हायतौबा मचा दिया है कि चीन की यह बीमारी पूरे भारत को निगल जाएगी ।
खांसी, बुखार और सांस की तकलीफ--
यह बीमारी हर देश में और हर काल में रही है । इस टाइप की बीमारी की चपेट में वे ही आते हैं जिनका आहार-बिहार पूरी तरह 2×2=5 की तरह है । ज्यादा माडर्न बनने के कक्कर में रहते हैं । जबकि श्रीमद्भगवतगीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण ने सही आहार-बिहार का उपदेश दिया है । हालांकि उसको मानने पर पिछड़े माने जाएंगे और पोंगा पंडित ।
बीमारीके नामसे डराया जा रहा ।----
भारत ने बड़े धूम-धड़ाके से 21 जून को विश्व योग दिवस शुरू किया । भारी भरकम व्यय भी होता है इस दिवस पर । गुमान था कि विश्व को हम बेहतर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य देंगे । स्थिति यह दिख रही कि हम डर रहे और जनसाधारण को डरा भी रहे । अपने देश में कुपोषण और भूख से पीड़ित के लिए कोई व्यवस्था नहीं और इसी वक्त चीन से आने वालों की सेहत की VIP जांच शुरू हो गई है ।
कोरोना से बजट बढ़ेगा--
कोरोना से बचाव के लिए अस्पतालों में वार्ड, बचाव के लिए मीटिंग-सीटिंग और ईटिंग (मीटिंगों में जल-जलपान), बड़े बड़े इश्तहार और दवा कम्पनियों में सड़ रहीं दवाएं सब खप जाएंगी । अगर यह दुष्प्रचार नहीं है तो क्यों WHO ऐसे किसी वायरस से इनकार कर रहा है ।
                      -सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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