मिर्जापुर। हर वर्ष होली पर्व के अवसर पर होलिका जलाई जाती है । यह उल्लास और उमंग का पर्व इसलिए है क्योंकि पौराणिक काल के अति शक्तिशाली राजा हिरण्यकशिपु के तमाम प्रयासों के बावजूद सत्य रूपी प्रह्लाद नहीं जलाया जा सका ।
सत्य नहीं झूठ-फरेब जलता है---
सत्य का रूप हर काल में आह्लाद भरा होता है । झूठ फरेब भले ही थोड़े से काल के लिए लाभप्रद लगे लेकिन इसका अंत हमेशा बुरा ही होता है । इसी आह्लाद रूपी प्रह्लाद को जलाने के कुप्रयास में हिरण्यकशिपु को अपने परिवार की एक सदस्य को खो देना पड़ा ।
प्रतीकार्थ---
प्रतीकात्मक अर्थ है इस कथानक का । मनुष्य जब भी झूठ-फरेब से कोई उपलब्धि हासिल करना चाहता है तो उसे कुछ न कुछ खोना पड़ता है । सर्वप्रथम इस स्थिति में मनुष्य का आत्मबल धू धू कर जलता है । नकारात्मकता के चलते व्यक्ति हमेशा डरा डरा रहता है । अपने से छोटे कद के व्यक्ति से आंख में आंख मिलाकर बात नहीं कर पाता है । होलिका जल कर खाक होने के प्रतीकों पर ध्यान दिया जाए तो मनुष्य के मन-मस्तिष्क में किन्हीं न किन्हीं कारणों से कुप्रवृत्तियाँ यदि जन्म ले रही हैं तो स्वविवेक से उसे जला देना चाहिए । यदि व्यक्ति स्वतः खुद में सुधार नहीं करता है तो कुप्रवृत्तियाँ का राज्य स्थापित हो जाएगा और उस राज्य को बचाने में मन हिरण्यकशिपु बनकर हमेशा परेशान करता रहेगा ।
गोस्वामी तुलसीदास की होलिका- -
गोस्वामी तुलसीदास ने 'काम-क्रोध मद-लोभ सब नाथ नरक के पंथ' का उल्लेख रामचरित मानस के सुंदरकांड में किया है । व्यक्ति को अपने मानस को सुंदरकांड बनाने के लिए खुद-ब-खुद प्रयास करना चाहिए । रामचरितमानस का यह संदेश है कि मनुष्य का जीवन रामरचित है । राम द्वारा रचित मनुष्य यदि चाहे तो वह अपने जीवन के साथ अपने घर-परिवार, आसपास के वातावरण को सुंदर बना लें वरना आगे उसका जीवन लंकाकांड की तरह युद्ध भरा हो जाएगा और उसका बहुमूल्य जीवन रावण की तरह नष्ट हो जाएगा । हमारे ऋषियों का संदेश, ज्ञान और उपदेश हमेशा मनुष्य को सत्यपथ पर ले चलने का रहा है । मनुष्य शरीर को 'बड़े भाग मानुष तन पावा, सुर दुर्लभ सब ग्रन्थन गावा' का यह निहितार्थ है कि यदि सत्य का दामन पकड़ कर कोई जीवन जीए तो वह देव-तुल्य बन जाएगा । आखिर श्रीराम और श्रीकृष्ण मनुष्य की तरह ही जन्म लेकर आज भी पूज्य हैं । नकारात्मक जीवन व्यक्ति को पशुवत बना लेता है । अनीतिपूर्वक भौतिक धन-संपदा अर्जित कर बहुमूल्य आनन्द को खो देना घाटे का सौदा है । यदि घाटे की जगह उल्लास, उमंग, उत्साह और आनन्द का जीवन पाना है तो झूठ फरेब की होलिका को तत्काल जला देना चाहिए । होलिका जलाए जाने के कथानक को इस रूप में लेना चाहिए ।
-सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
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तिवराने टोला में होलिका सजाते दिनेश तिवारी (मुन्ना), मनोज गुप्ता, ऋषभ तिवारी, कल्लू यादव और अन्य ।

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