रजनीकांत अवस्थी
शिवगढ़/रायबरेली: स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों की समग्र उन्नति के लिए शिवगढ़ बीआरसी सभागार में चल रहे निष्ठा प्रशिक्षण में चौथे दिन उप शिक्षा निदेशक राजेंद्र प्रसाद पहुंचे और उन्होंने शिक्षकों को बताया कि, समाज में सबसे बड़ी आलोचना शिक्षकों की हो रही है। इसलिए हम सब शिक्षकों को समय से आना होगा और समय से जाना होगा रिजल्ट तो आएगा इसकी चिंता मत करें।
उन्होंने बताया कि, हम शिक्षकों के अंदर जो प्रतिभा है वह हमको ईश्वर ने दी है। हमको यह नहीं देखना चाहिए। हमको बच्चों को ब्लैक बोर्ड में पढ़ाते समय चाक और स्याही हाथ में लग जाएगी कौन क्या कह रहा है। इसके बारे में हम लोगों को नहीं सोचना है। उन्होंने एक दोहे के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि, साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुमाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय। अर्थात इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है। जो सार्थक को बचा लेता है और निरर्थक को उड़ा देता है।
ऐसा ही अध्यापकों को बनना है जिसके लिए सरकार आपके साथ खड़ी है और आप लोगों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। हम लोग शिक्षक हैं सबसे अलग हैं सबसे अच्छा आचरण हम लोगों का होना चाहिए। जब आप अच्छे होंगे तो आपका जिला अच्छा होगा। आपका प्रदेश अच्छा होगा। आपका देश अच्छा होगा।
उप शिक्षा निदेशक की बातों पर सभी शिक्षक गम्भीरता से सुन रहे थे, उन्होंने वहां पर मौजूद शिक्षकों से 3 दिन से चल रहे प्रशिक्षण के बारे में जानकारी ली तो शिक्षकों ने बखूबी जवाब दिया।
इस अवसर पर बछरावां खण्ड शिक्षा अधिकारी बछरावां पद्म शेखर मौर्य, महराजगंज बीइओ सुरेश कुमार, नरेंद्र कुमार, शिखा बाजपेई, रुचि लोगानी, आशुतोष यादव, संतोष कुमार, हरिकेश सिंह सहित प्रशिक्षक मौजूद रहे।
शिवगढ़/रायबरेली: स्कूल प्रमुखों और शिक्षकों की समग्र उन्नति के लिए शिवगढ़ बीआरसी सभागार में चल रहे निष्ठा प्रशिक्षण में चौथे दिन उप शिक्षा निदेशक राजेंद्र प्रसाद पहुंचे और उन्होंने शिक्षकों को बताया कि, समाज में सबसे बड़ी आलोचना शिक्षकों की हो रही है। इसलिए हम सब शिक्षकों को समय से आना होगा और समय से जाना होगा रिजल्ट तो आएगा इसकी चिंता मत करें।
उन्होंने बताया कि, हम शिक्षकों के अंदर जो प्रतिभा है वह हमको ईश्वर ने दी है। हमको यह नहीं देखना चाहिए। हमको बच्चों को ब्लैक बोर्ड में पढ़ाते समय चाक और स्याही हाथ में लग जाएगी कौन क्या कह रहा है। इसके बारे में हम लोगों को नहीं सोचना है। उन्होंने एक दोहे के माध्यम से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए कहा कि, साधु ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुमाय, सार-सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय। अर्थात इस संसार में ऐसे सज्जनों की जरूरत है जैसे अनाज साफ़ करने वाला सूप होता है। जो सार्थक को बचा लेता है और निरर्थक को उड़ा देता है।
ऐसा ही अध्यापकों को बनना है जिसके लिए सरकार आपके साथ खड़ी है और आप लोगों को प्रशिक्षित भी किया जा रहा है। हम लोग शिक्षक हैं सबसे अलग हैं सबसे अच्छा आचरण हम लोगों का होना चाहिए। जब आप अच्छे होंगे तो आपका जिला अच्छा होगा। आपका प्रदेश अच्छा होगा। आपका देश अच्छा होगा।
उप शिक्षा निदेशक की बातों पर सभी शिक्षक गम्भीरता से सुन रहे थे, उन्होंने वहां पर मौजूद शिक्षकों से 3 दिन से चल रहे प्रशिक्षण के बारे में जानकारी ली तो शिक्षकों ने बखूबी जवाब दिया।
इस अवसर पर बछरावां खण्ड शिक्षा अधिकारी बछरावां पद्म शेखर मौर्य, महराजगंज बीइओ सुरेश कुमार, नरेंद्र कुमार, शिखा बाजपेई, रुचि लोगानी, आशुतोष यादव, संतोष कुमार, हरिकेश सिंह सहित प्रशिक्षक मौजूद रहे।


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