रायबरेली के इस विद्यालय में अव्यवस्थाओं की झड़ी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: वैसे तो क्षेत्र में परिषदीय विद्यालयों का हाल बुरा है लेकिन ब्लॉक क्षेत्र के बसकटा जमुरवां गांव का प्राथमिक विद्यालय ऐसा विद्यालय है जिसमें सुरक्षा के लिए ना तो बाउंड्री वाल है और न ही पर्याप्त सुरछित भवन। यहां पर बाउंड्री वाल की जगह बांस के डंडे गाडकर तार लगाकर विद्यालय की सुरक्षा का बंदोबस्त किया गया है। वही प्रवेश द्वार पर बांस के टट्टर का गेट लगाया गया है।
आपको बता दें कि, तहसील मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर बस बसकटा जमुरवा गांव में प्राथमिक विद्यालय में विद्यालय भवन के साथ-साथ 2 अतिरिक्त कक्ष भी हैं। शिक्षक के रूप में यहां दो अध्यापक और एक शिक्षामित्र तैनात है। गांव से बाहर निर्जन स्थान पर बसा यह स्कूल एक एकड क्षेत्रफल में विद्यालय का हाल बेहाल है।
ग्राम प्रधान चंद्रावती के पति दयाशंकर धोबी बताते हैं कि, कई बार ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक विद्यालय में सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्री वाल की मांग की गई, लेकिन अनसुनी कर दी गई। इस समय मात्र 65 विद्यार्थी ही पंजीकृत हैं बाउंड्री वाल न होने से आवारा जानवर अक्सर विद्यालय परिसर में शिक्षण कार्य के दौरान भी घुस आते हैं और कई बार तो भयभीत छात्र पढ़ाई छोड़ कर भाग जाते हैं। विद्यालय के चारों तरफ अध्यापकों और ग्राम प्रधान ने आपसी सहयोग से बांस के खंभे गाड़ कर तार लगवा दिए हैं। जो जानवर क्षतिग्रस्त कर देते हैं।
यही नहीं मुख्य द्वार पर भी बांस का टट्टर गेट के रूप में लगाया गया है जो सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशीष द्विवेदी ने बताया है कि, विद्यालय की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल तथा गेट का इंतजाम होना बहुत जरूरी है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: वैसे तो क्षेत्र में परिषदीय विद्यालयों का हाल बुरा है लेकिन ब्लॉक क्षेत्र के बसकटा जमुरवां गांव का प्राथमिक विद्यालय ऐसा विद्यालय है जिसमें सुरक्षा के लिए ना तो बाउंड्री वाल है और न ही पर्याप्त सुरछित भवन। यहां पर बाउंड्री वाल की जगह बांस के डंडे गाडकर तार लगाकर विद्यालय की सुरक्षा का बंदोबस्त किया गया है। वही प्रवेश द्वार पर बांस के टट्टर का गेट लगाया गया है।
आपको बता दें कि, तहसील मुख्यालय से महज 5 किलोमीटर दूर बस बसकटा जमुरवा गांव में प्राथमिक विद्यालय में विद्यालय भवन के साथ-साथ 2 अतिरिक्त कक्ष भी हैं। शिक्षक के रूप में यहां दो अध्यापक और एक शिक्षामित्र तैनात है। गांव से बाहर निर्जन स्थान पर बसा यह स्कूल एक एकड क्षेत्रफल में विद्यालय का हाल बेहाल है।
ग्राम प्रधान चंद्रावती के पति दयाशंकर धोबी बताते हैं कि, कई बार ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक विद्यालय में सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्री वाल की मांग की गई, लेकिन अनसुनी कर दी गई। इस समय मात्र 65 विद्यार्थी ही पंजीकृत हैं बाउंड्री वाल न होने से आवारा जानवर अक्सर विद्यालय परिसर में शिक्षण कार्य के दौरान भी घुस आते हैं और कई बार तो भयभीत छात्र पढ़ाई छोड़ कर भाग जाते हैं। विद्यालय के चारों तरफ अध्यापकों और ग्राम प्रधान ने आपसी सहयोग से बांस के खंभे गाड़ कर तार लगवा दिए हैं। जो जानवर क्षतिग्रस्त कर देते हैं।
यही नहीं मुख्य द्वार पर भी बांस का टट्टर गेट के रूप में लगाया गया है जो सुरक्षा की गारंटी नहीं देता है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक आशीष द्विवेदी ने बताया है कि, विद्यालय की सुरक्षा के लिए बाउंड्री वॉल तथा गेट का इंतजाम होना बहुत जरूरी है। इसके लिए विभागीय अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है।



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