◆रे सखी मधुमास आया,
फूल सा कुसुमित प्रकम्पित,
दनुज - दानव सब अचम्भित,
राग एक उसने सुनाकर,
मन मेरा भी गुदगुदाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆सुन मिलन का गीत सुन्दर,
मै गई उस ओर आतुर,
देख पाई ना किसी को,
गा रहा यह कौन छुपकर,
तब किसी ने फुसफुसाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆गा रही कोयल निराली,
झूमकर अमराई डाली,
लता कुसुमित सा लिए तन,
तरु का मन भी ना अचेतन,
देख उनका मिलन अद्भुत,
मन मेरा हर्षाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆पीली सरसों खेत वाली,
पनघटों की पीत साड़ी,
लहर - लह लहराता आँचल,
दे गया एक टीस खाली,
था पता मुझको नही यह,
कौन सा है मास आया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆हर कली से मिलूँ जाकर,
सुरभि का संकेत पाकर,
तितलियों का रंग चुराकर,
उडूं गाउँ गुनगुनाकर,
मन मेरा भी रुक न पाया,
रे सखी मधुमास आया ।
Written by - कमल बाजपेई
फूल सा कुसुमित प्रकम्पित,
दनुज - दानव सब अचम्भित,
राग एक उसने सुनाकर,
मन मेरा भी गुदगुदाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆सुन मिलन का गीत सुन्दर,
मै गई उस ओर आतुर,
देख पाई ना किसी को,
गा रहा यह कौन छुपकर,
तब किसी ने फुसफुसाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆गा रही कोयल निराली,
झूमकर अमराई डाली,
लता कुसुमित सा लिए तन,
तरु का मन भी ना अचेतन,
देख उनका मिलन अद्भुत,
मन मेरा हर्षाया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆पीली सरसों खेत वाली,
पनघटों की पीत साड़ी,
लहर - लह लहराता आँचल,
दे गया एक टीस खाली,
था पता मुझको नही यह,
कौन सा है मास आया,
रे सखी मधुमास आया ।
◆हर कली से मिलूँ जाकर,
सुरभि का संकेत पाकर,
तितलियों का रंग चुराकर,
उडूं गाउँ गुनगुनाकर,
मन मेरा भी रुक न पाया,
रे सखी मधुमास आया ।
Written by - कमल बाजपेई

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