◆गलत अर्थ मेरी खामोशी के,
यहां लगाए जाते है ।
जितने लोग भिन्न सब मति के,
मुझे समझ ना पाते है ।।
◆यदि मैं कहूँ सनातन संस्कृति,
है उपयुक्त आज के युग मे ।
युवा वर्ग यह नही मानते ,
दकियानूसी माना उसने ।।
◆कालचक्र का अंतराल यह,
दो पीढ़ी के बीच आ गया ।
मुझे समझ ना आया अब तक,
पाश्चात्य किस कदर छा गया ।।
◆जो कुछ कहा ऋषि पुरुषो ने,
वह सुश्रुत क्या व्यर्थ हो गया ।
क्या यह माने अंतराल में,
अर्थ आज अनर्थ हो गया ।।
◆क्या मैं मानू गलत स्वयं को,
या बदले युग देख नज़ारे ।
हे ईश्वर अब ज्ञान मुझे दो,
कर दो सबके वारे - न्यारे ।।
◆बोलो कम अब सुनो सभी की,
मन एकाग्र पठन - पाठन भी ।
अग्नि परीक्षा यही तुम्हारी,
धैर्य धरो तुम जन हितकारी ।।
◆है अब प्रकृति यही यदि मेरी,
इसे बना रहने दो भाई ।
कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदले,
नीति यही तो कहती आई ।।
◆राय सभी की लेकर मैंने,
बीच रास्ता अभी निकाला ।
गलत करो ना करने देंगे,
प्यार भरा संदेश हमारा ।।
◆- written by कमल बाजपेयी
यहां लगाए जाते है ।
जितने लोग भिन्न सब मति के,
मुझे समझ ना पाते है ।।
◆यदि मैं कहूँ सनातन संस्कृति,
है उपयुक्त आज के युग मे ।
युवा वर्ग यह नही मानते ,
दकियानूसी माना उसने ।।
◆कालचक्र का अंतराल यह,
दो पीढ़ी के बीच आ गया ।
मुझे समझ ना आया अब तक,
पाश्चात्य किस कदर छा गया ।।
◆जो कुछ कहा ऋषि पुरुषो ने,
वह सुश्रुत क्या व्यर्थ हो गया ।
क्या यह माने अंतराल में,
अर्थ आज अनर्थ हो गया ।।
◆क्या मैं मानू गलत स्वयं को,
या बदले युग देख नज़ारे ।
हे ईश्वर अब ज्ञान मुझे दो,
कर दो सबके वारे - न्यारे ।।
◆बोलो कम अब सुनो सभी की,
मन एकाग्र पठन - पाठन भी ।
अग्नि परीक्षा यही तुम्हारी,
धैर्य धरो तुम जन हितकारी ।।
◆है अब प्रकृति यही यदि मेरी,
इसे बना रहने दो भाई ।
कुछ तुम बदलो, कुछ हम बदले,
नीति यही तो कहती आई ।।
◆राय सभी की लेकर मैंने,
बीच रास्ता अभी निकाला ।
गलत करो ना करने देंगे,
प्यार भरा संदेश हमारा ।।
◆- written by कमल बाजपेयी

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