"कर्मवीर ना हो अधीर" (कमल बाजपेई)

◆कर्मवीर जब हो अधीर,
घर वापस रोता जाये जब,
चूलें हिल जातीं रुकती गति,
ईश्वर ही पार लगाये तब ।
◆उथल पुथल सब ओर है,
जन जीवन रसहीन,
श्रमिक वर्ग की पीड़ा से,
मन हो रहा मलीन ।
◆करना ही है तो करो,
जन जीवन कल्याण,
इस अभाव में रह जावोगे,
खाली घटक समान ।
◆भोले - भाले बने तुम,
लगते हो नादान,
ऊपर से तुम आदमी,
अंदर से शैतान ।
◆कुछ तुमको मिलना नहीं,
कर मानव अपमान,
इस ज़ुबान पर ही बसे,
रहते हैं भगवान ।
◆बिना तथ्य जाँचे कभी,
मत बोलो कुछ बैन,
झुकने ना पड़ जाए कब,
लाख टके के नैन ।
◆सभी हाथ आगे बढ़े,
पोछे इनके अश्रु,
मन, वाणी अरु कर्म से,
सुखदेवे सर्वस्व ।
◆Written by ~ कमल बाजपेई

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