"गुरुकुल की तरह रहो घर माँ" "कमल बाजपेयी"

◆पूर्वज हमरे कह गए, सबको यह समुझाय,
साई इतना दीजिए, जामे कुटुम्ब समाय,
मैं भी भूखा ना रहू, साधु ना भूखा जाय ।
◆घर की सुख सुविधा छोड़ो, परहित की बात करो सबसे,
आपन परार ना अब सोचो, है आये गया वायरस जबसे ।
◆घर के अंदर है बंद सबै, मार्केट मा कूकुर घूमै,
बस खुली दवा की दूकानै, जिनमा मनई है दूर खड़े ।
◆रुपिया डोलची से उई पकड़ै, लागय जैसे उई परमहंस,
मुँह बांधे जैनी बने सबै, बापू के वानर तीन जने।
◆थोड़ी मा बसर करो भैया, सबका नेचर समझाई दिहिस,
पूर्वज हमारे कह गए सबको यह समझाय,
साई इतना दीजिए, जामे कुटुम्ब समाय,
मैं भी भूखा ना रहू, साधु ना भूखा जाय ।
◆आना जाना सब कही बंद, ईश्वर मा ध्यान धरो साई,
भौतिकता का अब तुम छोड़ो, थोड़ी मा रहो सुखी भाई ।
◆कपड़ा लत्ता गाड़ी बंगला, लगता इनका अब समय गया ,
गुरुकुल की तरह रहो घर मा, जबसे सबका लॉकडाउन भया ।
◆सब धरा यहीं रह जाना है, सारी दुनिया परिवार एक,
मन के कलेष सब दूर करो, सबको अपना भाई मानो ।
◆सबके सब प्रकृति ते लड़ बैठे, भगवानो ते ऊपर मानै,
धरती माँ का कुछ ना समझै, मंगल ग्रह की मन मा ठानै ।
◆मुला एकै झटका मा सबका, औकात याद दिलवाये दिहिसि,
◆नाकन ते चना चबवाये दिहिसि, नानी की याद दिलाये दिहिसि ।
◆पूर्वज हमरे कह गए, सबको यह समुझाय,
साई इतना दीजिए, जामे कुटुम्ब समाय,
मैं भी भूखा ना रहू, साधु ना भूखा जाय ।
◆written by कमल बाजपेयी

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