प्रति व्यक्ति 50 ग्राम के हिसाब से बनी सेवईं
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मिर्जापुर । 'हाथ मिलाओगे तो संक्रमित हो जाओगे, गले लगे तो पॉजिटिव हो जाओगे' के माहौल के बीच आए ईद के त्योहार पर न कोई जश्न और न कोई जोश-खरोश। तमाम बन्दिशों के बीच साल भर के इस महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व को मुस्लिम समुदाय ने अत्यंत सादगी से मनाते हुए इस बार के पर्व को सुखी ईद की संज्ञा दी ।
ईदगाह पर ताले, मस्जिदों में खींची सीमारेखा- एकाएक इमामबाड़ा स्थित ईदगाह में नमाज़ पर रोक के निर्देश के चलते यहां ताला लगा दिया गया जबकि शहर के तकरीबन 5 दर्जन मस्जिदों में पेश इमाम, मुअज़्ज़िन के अलावा एकाध लोग पूरे रमज़ान महीने की तरह ईद की नमाज़ अदा की । इसके बाद औपचारिक रूप से मुस्लिमों के घर-घर में नमाज़ पढ़ी गई ।
ईद और जुमे की नमाज़- मुस्लिमों में ईद और जुमे की नमाज़ के वक्त ख़ुतबा का महत्त्व ज्यादे है । इस बार मस्ज़िदों में लाउडस्पीकर नहीं लगे थे । इसलिए पेश इमाम द्वारा पढ़ा गया ख़ुतबा लोग नहीं सुन सके ।
कोरोना से मुक्ति की दुआ- कतिपय मस्ज़िदों में पेश इमाम ने कोरोना से मुक्ति के लिए दुआ करते वक्त अल्लाह से कोरोना, प्राकृतिक आपदा, आंधी-तूफान से बचाने की दुआ मांगी । बहुत से मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोगों ने घरों में नमाज़ पढने के बाद मार्मिक ढंग से दुआ मांगी । प्रबुद्ध युवा उद्यमी मो रज़ी ने 'इंसान की नादानी को माफ करने की कामना की। मो रज़ी का मानना है कि 30 दिन के रोज़ा के बाद की गई प्रार्थना जरूर कुबूल होगी ।
कब्रिस्तान पर नहीं जा सके- कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों के मज़ार पर ईद के दिन श्रद्धा के पुष्प न चढ़ा पाने का मलाल भी देखा गया । साम्यवादी चिंतक मो सलीम का मानना था कि कब्रिस्तान पर रोक नहीं होनी चाहिए थी । क्योंकि कब्रिस्तान बहुत विशाल क्षेत्रफल में होता है। यहां फिजिकल डिस्टेंसिंग की कोई समस्या नहीं होती है । सभी अलग अलग मज़ार पर पुष्प चढ़ाते हैं ।
न कपड़ा, न खिलौना सीमित रही सेवईं- ईद पर छोटे बच्चों को कपड़ा, खिलौना आदि न दिला पाने का मलाल घर के बड़े सदस्यों का बहुत अधिक था । चूंकि न किसी का आना और न कहीं जाना संभव है लिहाजा घर में प्रति व्यक्ति 50 ग्राम के हिसाब से सेवईं बनी । यानी 5 सदस्यों का घर है तो 250 ग्राम से काम चल गया । वरना इतने ही सदस्यों वाले घरों में डेढ़-दो किलो तक सेवईं बनती रही है ।
ला & आर्डर के लिए हर मस्ज़िद पर पहले जैसी ही व्यवस्था थी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
© लेखन के साथ छेड़छाड़ दण्डनीय है ।
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मिर्जापुर । 'हाथ मिलाओगे तो संक्रमित हो जाओगे, गले लगे तो पॉजिटिव हो जाओगे' के माहौल के बीच आए ईद के त्योहार पर न कोई जश्न और न कोई जोश-खरोश। तमाम बन्दिशों के बीच साल भर के इस महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व को मुस्लिम समुदाय ने अत्यंत सादगी से मनाते हुए इस बार के पर्व को सुखी ईद की संज्ञा दी ।
ईदगाह पर ताले, मस्जिदों में खींची सीमारेखा- एकाएक इमामबाड़ा स्थित ईदगाह में नमाज़ पर रोक के निर्देश के चलते यहां ताला लगा दिया गया जबकि शहर के तकरीबन 5 दर्जन मस्जिदों में पेश इमाम, मुअज़्ज़िन के अलावा एकाध लोग पूरे रमज़ान महीने की तरह ईद की नमाज़ अदा की । इसके बाद औपचारिक रूप से मुस्लिमों के घर-घर में नमाज़ पढ़ी गई ।
ईद और जुमे की नमाज़- मुस्लिमों में ईद और जुमे की नमाज़ के वक्त ख़ुतबा का महत्त्व ज्यादे है । इस बार मस्ज़िदों में लाउडस्पीकर नहीं लगे थे । इसलिए पेश इमाम द्वारा पढ़ा गया ख़ुतबा लोग नहीं सुन सके ।
कोरोना से मुक्ति की दुआ- कतिपय मस्ज़िदों में पेश इमाम ने कोरोना से मुक्ति के लिए दुआ करते वक्त अल्लाह से कोरोना, प्राकृतिक आपदा, आंधी-तूफान से बचाने की दुआ मांगी । बहुत से मुस्लिम समुदाय के प्रबुद्ध लोगों ने घरों में नमाज़ पढने के बाद मार्मिक ढंग से दुआ मांगी । प्रबुद्ध युवा उद्यमी मो रज़ी ने 'इंसान की नादानी को माफ करने की कामना की। मो रज़ी का मानना है कि 30 दिन के रोज़ा के बाद की गई प्रार्थना जरूर कुबूल होगी ।
कब्रिस्तान पर नहीं जा सके- कब्रिस्तान में अपने पूर्वजों के मज़ार पर ईद के दिन श्रद्धा के पुष्प न चढ़ा पाने का मलाल भी देखा गया । साम्यवादी चिंतक मो सलीम का मानना था कि कब्रिस्तान पर रोक नहीं होनी चाहिए थी । क्योंकि कब्रिस्तान बहुत विशाल क्षेत्रफल में होता है। यहां फिजिकल डिस्टेंसिंग की कोई समस्या नहीं होती है । सभी अलग अलग मज़ार पर पुष्प चढ़ाते हैं ।
न कपड़ा, न खिलौना सीमित रही सेवईं- ईद पर छोटे बच्चों को कपड़ा, खिलौना आदि न दिला पाने का मलाल घर के बड़े सदस्यों का बहुत अधिक था । चूंकि न किसी का आना और न कहीं जाना संभव है लिहाजा घर में प्रति व्यक्ति 50 ग्राम के हिसाब से सेवईं बनी । यानी 5 सदस्यों का घर है तो 250 ग्राम से काम चल गया । वरना इतने ही सदस्यों वाले घरों में डेढ़-दो किलो तक सेवईं बनती रही है ।
ला & आर्डर के लिए हर मस्ज़िद पर पहले जैसी ही व्यवस्था थी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर
© लेखन के साथ छेड़छाड़ दण्डनीय है ।



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