रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश को तीन चरण बीत जाने के बाद चौथे चरण के लिए लॉकडाउन कर दिया है, और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।
आपको बता दें कि, स्कूल और कॉलेज बंद पड़े हैं, ताकि छात्रों को इस वायरस से बचाया जा सके। बच्चों की छुट्टियां हो गई हैं और उन्हें घर पर ही रहना पड़ रहा है। ऐसे में जहां मांओं द्वारा इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और नए क्राफ्ट सिखाने में कर रही हैं, तो वहीं बच्चे भी नई चीजें सीख रहे हैं और परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।
वक़्त से पहले शुरू हो गई छुट्टियां
ये छुट्टियां बच्चों के लिए गर्मियों के पहले शुरू हुए मॉनसून जैसी हैं। हालांकि, कुछ माएं इन छुट्टियों से ज्यादा खुश नहीं हैं, जबकि कुछ वर्किंग महिलाएं इसे एक लंबे वीकेंड के तौर पर ले रही हैं। कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मजबूत करने में कर रहे हैं।
रायबरेली के महराजगंज क्षेत्र में मऊ गांव की रहने वाली हाउसवाइफ के तौर पर काम करने वाली एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता की धर्मपत्नी कांति अवस्थी 21 साल और 17 साल की दो बेटी व 20 साल तथा 15 साल के दो बेटों की मां हैं। वह कहती हैं, " उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे की अभी वीकेंड ही चल रहा हो।"
वह कहती हैं कि, इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और दूसरे क्राफ्ट सिखाने के लिए किया जा सकता है। वो आगे कहती हैं, "इस बार समर कैंप्स नहीं होंगे और ऐसे में घर ही लर्निंग ग्राउंड बन गया है।" बच्चों के घर में ही बंद होने पर वह कहती हैं, "हां, घर तितर-बितर पड़ा हुआ है, लेकिन मैं घर को ज्यादा वक्त तक साफ करने के लिए तैयार हूं। मुझे बच्चों के घर पर रहने में कोई शिकायत नहीं है।"
छोटे बच्चों को संभालने में हो रही दिक्कत
महराजगंज रायबरेली रोड पर स्थित सोथी गांव निवासी आशीष शुक्ल की धर्मपत्नी मोहनी शुक्ला का बेटा 8 वर्ष का तथा बेटी 5 वर्ष की है। वह बताती हैं, "उनके दोनों बच्चे किताबें पढ़कर उनके साथ टीवी पर ख़बरें देखकर वक्त बिताते है। यह उसके लिए एक अच्छा ब्रेक है।
वहीं कस्बा महराजगंज के रहने वाले वरिष्ठ संवाददाता सुभाष पांडेय की धर्म पत्नी अनुपमा पांडेय बताती हैं, कि उनके दोनो बेटों को घर पर घुटन होती है, क्योंकि उसे बाहर जाने और दोस्तों से मिलने की इजाजत नहीं मिल रही है। उन्हें अपने दोनों बेटों को यह समझाने में काफी वक्त लगा कि, वह टेक्नोलॉजी के ज़रिए अपने दोस्तों के साथ वर्चुअली कनेक्टेड है।"
कोरोना वायरस, फैमिली हाइजीन और अनुशासन
कई महिलाएं इस बात से खुश हैं कि, उनके बच्चे इस दौरान हाइजीन के बारे में जागरुक हो रहे हैं और ज्यादा अनुशासित बन रहे हैं।
वहीं महराजगंज नगर पंचायत के चेयरमैन सरला साहू बताती हैं कि, वह अपने बच्चों के साथ अब ज्यादा वक्त बिताती हैं, और उन्हें कहानियां सुनाती हैं, सामान्य वक्त में बिजी शेड्यूल के चलते बच्चों को वो इतना वक्त नहीं दे पाती थीं। वे कहती हैं, "उनके बच्चे अब हाइजीन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और वे अपने स्नैक्स बनाने और क्राफ्ट्स को सीखने में वक्त लगा रहे हैं।" वे खुश हैं कि, उनके बच्चे अपने दादा और अन्य रिश्तेदारों से हर रोज़ बात कर पाते हैं, क्योंकि सभी के पास अब पर्याप्त वक्त है। वो कहती हैं, "अब वो सब कुछ कर रही हैं जिसे वे इतने वक्त से मिस कर रही थी।
रायबरेली: कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए सरकार ने देश को तीन चरण बीत जाने के बाद चौथे चरण के लिए लॉकडाउन कर दिया है, और लोगों को घरों में रहने की सलाह दी गई है।
आपको बता दें कि, स्कूल और कॉलेज बंद पड़े हैं, ताकि छात्रों को इस वायरस से बचाया जा सके। बच्चों की छुट्टियां हो गई हैं और उन्हें घर पर ही रहना पड़ रहा है। ऐसे में जहां मांओं द्वारा इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और नए क्राफ्ट सिखाने में कर रही हैं, तो वहीं बच्चे भी नई चीजें सीख रहे हैं और परिवार के साथ ज्यादा वक्त बिता रहे हैं।
वक़्त से पहले शुरू हो गई छुट्टियां
ये छुट्टियां बच्चों के लिए गर्मियों के पहले शुरू हुए मॉनसून जैसी हैं। हालांकि, कुछ माएं इन छुट्टियों से ज्यादा खुश नहीं हैं, जबकि कुछ वर्किंग महिलाएं इसे एक लंबे वीकेंड के तौर पर ले रही हैं। कई परिवार इस लॉकडाउन का इस्तेमाल परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने और आपसी रिश्ते मजबूत करने में कर रहे हैं।
रायबरेली के महराजगंज क्षेत्र में मऊ गांव की रहने वाली हाउसवाइफ के तौर पर काम करने वाली एक हिंदी दैनिक समाचार पत्र के संवाददाता की धर्मपत्नी कांति अवस्थी 21 साल और 17 साल की दो बेटी व 20 साल तथा 15 साल के दो बेटों की मां हैं। वह कहती हैं, " उन्हें ऐसा लग रहा है जैसे की अभी वीकेंड ही चल रहा हो।"
वह कहती हैं कि, इस वक्त का इस्तेमाल बच्चों को कुकिंग और दूसरे क्राफ्ट सिखाने के लिए किया जा सकता है। वो आगे कहती हैं, "इस बार समर कैंप्स नहीं होंगे और ऐसे में घर ही लर्निंग ग्राउंड बन गया है।" बच्चों के घर में ही बंद होने पर वह कहती हैं, "हां, घर तितर-बितर पड़ा हुआ है, लेकिन मैं घर को ज्यादा वक्त तक साफ करने के लिए तैयार हूं। मुझे बच्चों के घर पर रहने में कोई शिकायत नहीं है।"
छोटे बच्चों को संभालने में हो रही दिक्कत
महराजगंज रायबरेली रोड पर स्थित सोथी गांव निवासी आशीष शुक्ल की धर्मपत्नी मोहनी शुक्ला का बेटा 8 वर्ष का तथा बेटी 5 वर्ष की है। वह बताती हैं, "उनके दोनों बच्चे किताबें पढ़कर उनके साथ टीवी पर ख़बरें देखकर वक्त बिताते है। यह उसके लिए एक अच्छा ब्रेक है।
वहीं कस्बा महराजगंज के रहने वाले वरिष्ठ संवाददाता सुभाष पांडेय की धर्म पत्नी अनुपमा पांडेय बताती हैं, कि उनके दोनो बेटों को घर पर घुटन होती है, क्योंकि उसे बाहर जाने और दोस्तों से मिलने की इजाजत नहीं मिल रही है। उन्हें अपने दोनों बेटों को यह समझाने में काफी वक्त लगा कि, वह टेक्नोलॉजी के ज़रिए अपने दोस्तों के साथ वर्चुअली कनेक्टेड है।"
कोरोना वायरस, फैमिली हाइजीन और अनुशासन
कई महिलाएं इस बात से खुश हैं कि, उनके बच्चे इस दौरान हाइजीन के बारे में जागरुक हो रहे हैं और ज्यादा अनुशासित बन रहे हैं।
वहीं महराजगंज नगर पंचायत के चेयरमैन सरला साहू बताती हैं कि, वह अपने बच्चों के साथ अब ज्यादा वक्त बिताती हैं, और उन्हें कहानियां सुनाती हैं, सामान्य वक्त में बिजी शेड्यूल के चलते बच्चों को वो इतना वक्त नहीं दे पाती थीं। वे कहती हैं, "उनके बच्चे अब हाइजीन पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं और वे अपने स्नैक्स बनाने और क्राफ्ट्स को सीखने में वक्त लगा रहे हैं।" वे खुश हैं कि, उनके बच्चे अपने दादा और अन्य रिश्तेदारों से हर रोज़ बात कर पाते हैं, क्योंकि सभी के पास अब पर्याप्त वक्त है। वो कहती हैं, "अब वो सब कुछ कर रही हैं जिसे वे इतने वक्त से मिस कर रही थी।





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