चौधरी चरण सिंह ने किसानों के उत्थान के लिए आजीवन काम किया।। Raebareli news ।।

विभिन्न  द्वारा किसान दिवस के रूप में मनायी गयी पुण्य तिथि
जिला प्रशासन प्रतिमा के रख-रखाव की कर रहा अनदेखी
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: भारत के पांचवे प्रधानमन्त्री चौधरी चरण सिंह की पुण्यतिथि जिले के विभिन्न संगठनों द्वारा सिंचाई विभाग निरीक्षण भवन परिसर में किसान दिवस के रूप में मनायी गयी।  परिसर में लगी मूर्ति पर सभी ने माला व पुष्प अर्पित कर श्रद्धाँजलि अर्पित की। 
      आपको बता दें कि, इस अवसर पर सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष ओ.पी. यादव ने कहा कि, चौधरी साहब ने किसानों के उत्थान के लिए आजीवन काम किया।  चैधरी साहब ने कहा था कि, देश की खुशहाली का रास्ता खेत खलिहानों से होकर गुजरता है।
       श्री यादव ने कहा कि, सिंचाई विभाग परिसर में चौधरी चरण सिंह की स्थापित प्रतिमा का विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा सही रखरखाव नहीं किया जा रहा है, उसकी अनदेखी की जा रही है, जिसके लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है।
      उद्योग व्यापार प्रतिनधि मण्डल के प्रान्तीय संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी ने कहा कि चौधरी चरण सिंह 1940 में सत्याग्रह आन्दोलन में जेल गये।  1952 में उ0प्र0 के राजस्व मन्त्री बने।  1952 में जमींदारी उन्मूलन विधेयक पारित किया।  संत गाडगे सेवक कमलेश चौधरी ने कहा कि चौधरी साहब मोरार जी देसाई सरकार में देश के गृह मन्त्री बने, उसके बाद बगावत कर पार्टी छोड़ दी और 28 जुलाई 1979 को प्रधानमन्त्री का पद संभाला।  19 अगस्त 1979 को कांग्रेस के समर्थन वापस लेने के कारण पद से त्याग-पत्र दे दिया।  
        स्वर्णकार विचार मंच के मण्डल संयोजक भौमेश स्वर्णकार ने कहा कि, चरण सिंह की सरकार में किसान विरोधी पटवारियों ने सामूहिक रूप से त्याग-पत्र दे दिया था। चौधरी साहब ने सभी के त्याग-पत्र स्वीकार कर लेखपाल के पद का सृजन कर नई नियुक्तियाँ कर ऐतिहासिक कार्य किया था।  सपा नेता शिवेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि चैधरी चरण सिंह उ0प्र0 की सम्मिलित सरकार के मुख्यमन्त्री बने।  गौरव सिंह ने कहा कि चैधरी साहब का जन्म 23 दिसम्बर 1902 को स्वर्गवास 29 मई 1979 को हुआ था। 
       व्यापार मण्डल के जिला उपाध्यक्ष संजय पासी ने कहा कि चैधरी चरण सिंह आपातकाल में 1970 में जेल गये थे। हाशमी समाज के जिलाध्यक्ष अकबर अली एडवोकेट ने कहा कि, चैधरी चरण सिंह ने गाजियाबाद में वकालत का कार्यभार संभाला और इनका विवाह गायत्री देवी के साथ 1929 में सम्पन्न हुआ।

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