रायबरेली: अंचल में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा बुधवार को धूमधाम से निकाली गई। श्रद्वालुओं ने विधि विधान से पूजा पाठ के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा को रथ में बैठा कर रस्सी के सहारे खींचते हुये मौसी के घर पहुंचाया।
आपको बता दें कि, पूरी जिले में ऐतिहासिक रथ यात्रा का आयोजन दुलदुला विकासखंड में स्थित कस्तूरा में किया जाता है। रियासत काल से चले आ रहे इस रथयात्रा उत्सव का नेतृत्व जशपुर राज परिवार द्वारा किया जाता है। बुधवार को यहां आयोजित रथ यात्रा महोत्सव में छेरापहरा पूर्व जशपुर रियासत के राजा व सांसद रणविजय सिंह जूदेव ने किया।
परंपरा के मुताबिक कस्तूरा में जशपुर रियासत के राजा रणविजय सिंह जूदेव के नेतृत्व में रथ यात्रा उत्सव का आयोजन किया गया। यहां राजपुरोहित रामचंद्र मिश्र पुराणिक के नेतृत्व में पुरोहितों ने द्वारा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा का नेत्रदान व सोलह श्रृंगार कर रथ यात्रा की तैयारी पूरी कर ली गई थी। शनिवार की सुबह से ही कस्तुरा के जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा देखने के लिए जिले के लोगों को हुजूम उमडने लगा था। दोपहर होते होते मंदिर परिसर का पूरा मैदान श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया था। चारों ओर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा था। मंदिर की घंटी और नगाड़े की थाप में भक्त झूम रहे थे। जयकारा लगा रहे थे। राज परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ऐतिहासिक रथ यात्रा प्रारंभ हुई। इसके बाद जय घोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभ्रद और माता सुभद्रा को रथ में बैठाया गया।
रथ में बैठाने के बाद श्रद्वालुओं ने रथ को रस्सी से खींचते हुए मौसी बाड़ी तक ले गए। यहां तीनों देवताओं की प्रतिमाओं को मौसी की बाड़ी में स्थापित किया गया। इस दौरान जिले के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्वालुओं के बीच रथ को खींचने की होड़ लगी। इस ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल होने के लिए जशपुर जिले के साथ ही पड़ोसी राज्य ओडीशा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते है।
ईद के साथ रथयात्रा के त्योहार को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। इसमें शामिल होने के लिए भगवान जगन्नाथ के प्रांगण में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी। राज परिवार के राजा रणविजय प्रताप सिंह, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने परंपरानुसार रथ की रस्सी खींच कर भगवान जगन्नाथ को मौसी बाड़ी के लिए विदा किया।
।। बंटे कटहल व जामुन का प्रसाद ।।
पं मनोज रमाकांत मिश्र ने बताया कि, रथयात्रा के दिन वहां परंपरानुसार कटहल और जामुन का प्रसाद अर्पण किया जाता है। भगवान की आरती के बाद लावा प्रसाद परंपरानुसार दिया जाता है। जिसे लोग हाथों में नही बल्कि आंचल या गमझा फैलाकर ग्रहण करते हैं। सालों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी पूरी श्रद्वा के साथ पालन किया जा रहा है।
।। कस्तूरा में नहीं हुई बारिश ।।
पिछले तीन-चार दिनों से हो रही अनावरत बारिश का सिलसिला आज कस्तूरा में थमा रहा। यद्यपि जिले में कई जगह बारिश हुई। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान बारिश न होने से अंचल में अकाल की आशंका रहती है। मौसम खुलने से कस्तूरा में पूरे जिले से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने लिए भक्त जुटे रहे।
आपको बता दें कि, पूरी जिले में ऐतिहासिक रथ यात्रा का आयोजन दुलदुला विकासखंड में स्थित कस्तूरा में किया जाता है। रियासत काल से चले आ रहे इस रथयात्रा उत्सव का नेतृत्व जशपुर राज परिवार द्वारा किया जाता है। बुधवार को यहां आयोजित रथ यात्रा महोत्सव में छेरापहरा पूर्व जशपुर रियासत के राजा व सांसद रणविजय सिंह जूदेव ने किया।
परंपरा के मुताबिक कस्तूरा में जशपुर रियासत के राजा रणविजय सिंह जूदेव के नेतृत्व में रथ यात्रा उत्सव का आयोजन किया गया। यहां राजपुरोहित रामचंद्र मिश्र पुराणिक के नेतृत्व में पुरोहितों ने द्वारा स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ बलभद्र और सुभद्रा का नेत्रदान व सोलह श्रृंगार कर रथ यात्रा की तैयारी पूरी कर ली गई थी। शनिवार की सुबह से ही कस्तुरा के जगन्नाथ मंदिर में रथयात्रा देखने के लिए जिले के लोगों को हुजूम उमडने लगा था। दोपहर होते होते मंदिर परिसर का पूरा मैदान श्रद्धालुओं की भीड़ से खचाखच भर गया था। चारों ओर श्रद्धा का सैलाब उमड़ पड़ा था। मंदिर की घंटी और नगाड़े की थाप में भक्त झूम रहे थे। जयकारा लगा रहे थे। राज परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में ऐतिहासिक रथ यात्रा प्रारंभ हुई। इसके बाद जय घोष के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभ्रद और माता सुभद्रा को रथ में बैठाया गया।
रथ में बैठाने के बाद श्रद्वालुओं ने रथ को रस्सी से खींचते हुए मौसी बाड़ी तक ले गए। यहां तीनों देवताओं की प्रतिमाओं को मौसी की बाड़ी में स्थापित किया गया। इस दौरान जिले के दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्वालुओं के बीच रथ को खींचने की होड़ लगी। इस ऐतिहासिक रथयात्रा में शामिल होने के लिए जशपुर जिले के साथ ही पड़ोसी राज्य ओडीशा और झारखंड से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते है।
ईद के साथ रथयात्रा के त्योहार को देखते हुए पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए गए थे। इसमें शामिल होने के लिए भगवान जगन्नाथ के प्रांगण में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी। राज परिवार के राजा रणविजय प्रताप सिंह, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने परंपरानुसार रथ की रस्सी खींच कर भगवान जगन्नाथ को मौसी बाड़ी के लिए विदा किया।
।। बंटे कटहल व जामुन का प्रसाद ।।
पं मनोज रमाकांत मिश्र ने बताया कि, रथयात्रा के दिन वहां परंपरानुसार कटहल और जामुन का प्रसाद अर्पण किया जाता है। भगवान की आरती के बाद लावा प्रसाद परंपरानुसार दिया जाता है। जिसे लोग हाथों में नही बल्कि आंचल या गमझा फैलाकर ग्रहण करते हैं। सालों से चली आ रही इस परंपरा का आज भी पूरी श्रद्वा के साथ पालन किया जा रहा है।
।। कस्तूरा में नहीं हुई बारिश ।।
पिछले तीन-चार दिनों से हो रही अनावरत बारिश का सिलसिला आज कस्तूरा में थमा रहा। यद्यपि जिले में कई जगह बारिश हुई। मान्यता है कि रथयात्रा के दौरान बारिश न होने से अंचल में अकाल की आशंका रहती है। मौसम खुलने से कस्तूरा में पूरे जिले से भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने लिए भक्त जुटे रहे।





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