मिर्जापुर। मां दुर्गा और पार्वती का एक नाम *शताक्षी* भी है। दुर्गमासुर के अत्याचार से पीड़ित श्रद्धालुओं की पीड़ा देखने के लिए उन्हें सौ नेत्र खोलने पड़े थे । इसके अलावा हिंदी साहित्य के उद्भट विद्वान आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार शताक्षी का अर्थ रात भी होता है।
विंध्यधाम है शताक्षी धाम- मां दुर्गा की विविध शक्तियों का धाम विंध्यधाम है। पृथ्वी के अस्तित्व में आने के बाद मनु-शतरूपा की तपस्या पर प्रकट हुई त्रिपुर सुंदरी जगदम्बा इसी विंध्यधाम में आकर स्थित हुई।
मनु-शतरूपा और शताक्षी- मन के शत-शत रूप ही मनु शतरूपा हैं। कलियुग में मिले सौ वर्ष के जीवन में दृष्टि का वैविध्य शताक्षी दृष्टि ही है।
मां पार्वती का शत-नेत्र- वैज्ञानिक युग में व्यक्ति के सौ नेत्र का आशय 100 सीसी कैमरे से ही लिया जाना चाहिए । मां पार्वती ने अपराधी दुर्गमासुर की गतिविधियों को इसी तरह देखा था और उसके अत्याचार को 9 माह गर्भ में रहने वाले मनुष्य के लिए मातारानी की 9 आंखों से आंसू निकलने की कथा का उल्लेख मिलता है।
विंध्यधाम और शतक दिवस- दुर्गमासुर की श्रेणी के कोरोना के आतंक की शुरुआत होने पर 20 मार्च को शयन आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया गया था जो 28 जून तक बंद रहेगा और 29 जून को खुलेगा । मंदिर के बंद होने के 21 मार्च से 28 जून की गणना करने पर पूरे शतकीय (100) दिवस होते हैं । इस प्रकार मातारानी इस अवधि में कोरोना को 100 नेत्रों से संभवतः देखती रहीं । मंदिर खुलने के 8 जून के सरकारी-आदेश को लागू होने में जो इतने दिन लगे, उसमें भी मातारानी की इच्छा ही झलक रही है।
पण्डा-समाज की बैठक- समाज की बैठक गुरुवार, 25 जून को हुई। अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानू पाठक के साथ अन्य सदस्य तथा नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने गहन विचार-मंथन के बाद 29 जून से मंदिर खुलने की घोषणा कर दी है। महामारी के चलते अनेक प्रतिबंध तो रहेंगे ही । अब लगता है कि मातारानी की शताक्षी-दृष्टि के चलते दर्शन-पूजन में बाधा नहीं आएगी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
©आलेख को कांट-छांट (एडिट) कर बिना अनुमति का प्रयोग कापीराइट ऐक्ट का उल्लंघन और दण्डनीय है।
विंध्यधाम है शताक्षी धाम- मां दुर्गा की विविध शक्तियों का धाम विंध्यधाम है। पृथ्वी के अस्तित्व में आने के बाद मनु-शतरूपा की तपस्या पर प्रकट हुई त्रिपुर सुंदरी जगदम्बा इसी विंध्यधाम में आकर स्थित हुई।
मनु-शतरूपा और शताक्षी- मन के शत-शत रूप ही मनु शतरूपा हैं। कलियुग में मिले सौ वर्ष के जीवन में दृष्टि का वैविध्य शताक्षी दृष्टि ही है।
मां पार्वती का शत-नेत्र- वैज्ञानिक युग में व्यक्ति के सौ नेत्र का आशय 100 सीसी कैमरे से ही लिया जाना चाहिए । मां पार्वती ने अपराधी दुर्गमासुर की गतिविधियों को इसी तरह देखा था और उसके अत्याचार को 9 माह गर्भ में रहने वाले मनुष्य के लिए मातारानी की 9 आंखों से आंसू निकलने की कथा का उल्लेख मिलता है।
विंध्यधाम और शतक दिवस- दुर्गमासुर की श्रेणी के कोरोना के आतंक की शुरुआत होने पर 20 मार्च को शयन आरती के बाद मंदिर बंद कर दिया गया था जो 28 जून तक बंद रहेगा और 29 जून को खुलेगा । मंदिर के बंद होने के 21 मार्च से 28 जून की गणना करने पर पूरे शतकीय (100) दिवस होते हैं । इस प्रकार मातारानी इस अवधि में कोरोना को 100 नेत्रों से संभवतः देखती रहीं । मंदिर खुलने के 8 जून के सरकारी-आदेश को लागू होने में जो इतने दिन लगे, उसमें भी मातारानी की इच्छा ही झलक रही है।
पण्डा-समाज की बैठक- समाज की बैठक गुरुवार, 25 जून को हुई। अध्यक्ष पंकज द्विवेदी, मंत्री भानू पाठक के साथ अन्य सदस्य तथा नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने गहन विचार-मंथन के बाद 29 जून से मंदिर खुलने की घोषणा कर दी है। महामारी के चलते अनेक प्रतिबंध तो रहेंगे ही । अब लगता है कि मातारानी की शताक्षी-दृष्टि के चलते दर्शन-पूजन में बाधा नहीं आएगी ।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
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