आषाढ़ मास के गुप्त नवरात्र पर मां विंध्यवासिनी धाम से मंगलकामनाए

●मां विंध्यवासिनी की निरन्तर कृपा सावन-भादो मास की गहरी वर्षा से भी अधिक बरसती रहे, ऐसी कामना ।
●साथ ही गुप्त नवरात्र की सप्तमी तिथि पर यह वरदान कि जिंदगी में कोई षड्यंत्र का सप्तद्वार वाला चक्रव्यूह खड़ा करे तो विवेक के हथियार से ध्वस्त करने की सामर्थ्य रहे।
●'अतृणे पतितो वह्नि स्वमेवोपशाम्यति'* ऋषि-वचन प्रभावशाली होता है। जिसका निम्नांकित अर्थ है।
●अर्थ- जहां घास-फूस नहीं हैं, वहां गिरी आग स्वयं शांत हो जाती है। अतः कोई छल-छद्म, क्रोध या अन्य किसी तरह आग लगाने की कोशिश करे तो कोई प्रतिक्रिया नहीं देने की सलाह दी गई है। ऐसा व्यक्ति अपनी आग में खुद ही जल जाएगा ।
                              सलिल पांडेय, 
प्रेमघनमार्ग, (वृहद त्रिकोणमार्ग के मध्य) मिर्जापुर ।

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