ग्रहण-जनित दुष्प्रभावों को विंध्यधाम की त्रिकोणात्मक देवियां विनष्ट करें: मां विंध्यवासिनी का स्मरण करें

सूर्य-ग्रहण, 21जून '20 : क्या करें, क्या न करें ! सरलतम एवं आडम्बर-विहीन उपाय
जब रविवार को सूर्यग्रहण और सोमवार को चन्द्रग्रहण होता है तब उसे चूड़ामणि योग-ग्रहण कहते हैं। इसमें किए गए आध्यात्मिक-कार्यों का करोड़-गुणा लाभ मिलता है।-------
ग्रहण का स्पर्श : पूर्वाह्न 10:30 बजे
मध्य : मध्याह्न 12:17 बजे
मोक्ष (समाप्त) : अपराह्न 2:40 बजे------
क्या करें और क्या न करें ?------
1- सूर्यग्रहण के 12 घण्टे पहले यानी 20 जून की रात 10:30 बजे के पहले बच्चे, वृद्ध तथा गर्भधात्री मां को छोड़कर अन्य को भोजन त्याग देना चाहिए ।
2- इसके पहले घर की हर वस्तु घी, दूध, मट्ठा छोड़कर सबमें कुश या तिल डाल देना चाहिए ताकि ग्रहण से वायुमंडल पर पड़ने वाले प्रभाव से खाद्य वस्तुएं सुरक्षित रहें ।
3-ग्रहण लगने के पूर्व और ग्रहण के बाद तीर्थ नदी में स्नान करना चाहिए । यदि तीर्थ नदी संभव न हो तो तीर्थनदी का स्पर्श, पान एवं घर पर ही स्नान करना चाहिए । यह भी न संभव हो तो तीर्थनदी का स्मरण करके स्नान करना चाहिए ।
4-ग्रहण के मध्य जप, हवन, दान का विधान बताया गया है। लेकिन घर में माता-पिता तथा खुद से अशक्त परिवार के सदस्यों की निरन्तर की जा रही उपेक्षा, उन्हें मदद न कर जगह-जगह पुण्य के दान का कोई लाभ नहीं है ।
5-ग्रहणकाल में यदि माता-पिता जीवित हैं तो उनके प्रति किए गए गलत व्यवहार के लिए माफी मांगनी चाहिए । यदि जीवित नहीं हैं तो जितना संभव हो, लोगों से यह कहना चाहिए कि जीते-जीते माता-पिता तथा अन्य वरिष्ठ जनों का मेरे द्वारा अपमान एवं उपेक्षा हुई है। यह प्रायश्चित-यज्ञ और हवन है। फिर किसी हवन की जरूरत नहीं पड़ेगी।
6-मातृ-पितृ ऋण न चुका कर अन्य धर्मकर्म व्यर्थ बताए गए हैं ।
7- अपने से अशक्त को कभी पीड़ित किया है तो उससे बिना विलम्ब किए खेद/क्षमा मांगे ।
8-ग्रहणकाल में काम, क्रोध, झूठ बोलने से बचना चाहिए ।
9-सूर्य को बिलकुल उदित और अस्त (अभी आधे निकले हों या आधे अस्त हो गए हों ) होते नहीं देखना चाहिए । पानी में भी सूर्य के प्रतिबिंब को खुली आंख से नहीं देखना चाहिए । इसी प्रकार मध्याह्न सूर्य एवं ग्रहण काल के सूर्य को नहीं देखना चाहिए । ग्रहण काल के सूर्य को देखने का विधान बताया गया है। ग्रहण के पूर्व आकाश में कोई हल्की चादर बांध दें, उसकी छाया किसी बर्तन में रखे जल, तेल या दर्पण में देखनी चाहिए या वैज्ञानिक चश्मे से सुर्य को देखना चाहिए । गर्भधात्री मां न देखे।
10-ग्रहणकाल में रसोई में बचे पके भोजन को नहीं करना चाहिए ।
11-ग्रहणकाल में चाकू, कैची का प्रयोग नहीं करना चाहिए ।
12- श्राद्ध के लिए किसी वटुक को अनाज, धन जो संभव हो दे देना चाहिए । शर्त यही कि माता-पिता, जरूरतमंद भाई-बहन, भांजा-भतीजे आदि को तड़पा कर दिए गए दान पर पूर्वज प्रसन्न नहीं होते ।
13-ग्रहण के दौरान सर्वाधिक मंत्र मातृपि चरणकमलेभ्यो: नम: का जप मातापिता को ध्यान करते हुए करना चाहिए । विवाहिताएं सास-श्वसुर चरणकमलेभ्यो: नमः का जप करें । यदि कोई भाई नहीं है तो सास-श्वसुर के साथ मातापिता को भी शामिल कर लें लेकिन दामाद सास-श्वसुर को शामिल न करे, पुण्य नष्ट होंगे । देवाधिदेव महादेव कभी ससुराल के पक्षधर नहीं रहे बल्कि श्वसुर दक्ष के प्रबल-विरोधी थे ।
14-यह सूर्यग्रहण जिन राशियों के लिए शुभ है, उन राशियों के लोग शुभ प्रवृतियों को बढ़ाते रहें तथा सात्विक जीवन जीते रहने पर दृढ़ रहें और जिनके लिए हानिप्रद है, वे नकारात्मक कार्यों से बचें । जो काम करने से मन रोके, जो काम एकांत मांगे, उससे तौबा करें।
15-मेष, सिंह, कन्या, मकर के लिए शुभता लेकर ग्रहण आया है तो वे नकारात्मक भाव मन में लाएं ही नहीं और वृष, मिथुन, कर्क, तुला, वृश्चिक, धनु, कुंभ एवं मीन राशि वाले जीवन ब्रेक को सही रखें ।
इन 15 विन्दुओं पर गौर कर तदनुरूप जीवन जीने से सारे बुरे ग्रह स्वमेव अनुकूल होंगे तथा कुंडलीदोष का प्रभाव नष्ट होगा । सकारात्मक कार्य से दूसरों को नहीं खुद को ही लाभ होता है।
                       सलिल पांडेय, मिर्जापुर।

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