मां विंध्यवासिनी मंदिर खोलने का प्रपोजल स्थगित---
मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी धाम को कोरोना से बचाव के साथ खोलने के लिए विंध्यपण्डा समाज द्वारा बनाई गई उपसमिति ने अपनी रिपोर्ट गुरुवार, 18 जून को मुख्य कार्यकारिणी को सौंपी दी थी। तत्काल विशेष बैठक कर सारी संभावनाओं पर देर शाम विचार भी कर लिया गया था । तय हुआ था कि 19 जून को प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर मंदिर खोलने का अनुरोध किया जाएगा लेकिन पल भर में स्थितियां बदल गई । पूरे जिले में प्रति घण्टे घण्टे में एक यानी लगभग 7 से 8 घण्टे के दौरान 7 पॉजिटिव केस आने से जिले में घबराहटों का भूकम्प क्या आया कि सारी मशक्कतों पर पानी फिर गया।
प्रथम ग्रासे मच्छिका पात: - इस श्लोक का अर्थ ही है कि भोजन की थाली सामने हो और जैसे ही पहला ग्रास (कौर) मुंह में डालने के लिए हाथ बढ़ाया जाए तभी थाली में मक्खी गिर जाए । यही संस्कृत की लोकोक्ति यहां भी लागू होती दिख रही है। 48 घण्टे में विंध्य पण्डा समाज के अधिकृत सदस्य गली-गली भ्रमण कर हरैक से सम्पर्क कर चुके थे और सब बड़े उत्साह में थे कि 20 मार्च से बंद मंदिर गुप्त नवरात्र की प्रतिपदा, 22 जून से खुलेगा तभी मुख्यालय लगायत विन्ध्याचल 6 केस आ गए । सब हाई-फाई परिवारों का मामला था ही, साथ ही प्रशासनिक शक्तिधाम से लेकर आध्यात्मिक शक्तिधाम तक के इर्द-गिर्द का मामला था, जबकि सिर्फ एक ग्रामीण क्षेत्र का । ऐसी स्थिति में सब के सब अवाक से हो गए है।
जगन्नाथपुरी यात्रा स्थगित से भी लोग मायूस- जिले से बहुतेरों नेआषाढ़ शुक्ल द्वितीया, 23 जून को उड़ीसा राज्य के पुरी जिले में होने वाली रथयात्रा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से अपनी यात्रा स्थगित कर दी । 18 जून को खबर आते लोगों ने पुरी के अपने परिचितों द्वैतापति एवं विद्यापति (पण्डा वर्ग) से फोन कर जानकारी ली। जगन्नाथ मंदिर के प्रमुख द्वैतापति प्रोफ़ेसर दुर्गादास पुरी ने बता दिया कि कोर्ट का सम्मान किया जाएगा। पुरी के राजा साहब ने भी कोर्ट के आदेश के पालन पर जोर दिया है। ऐसी स्थिति में रथयात्रा का प्रश्न ही नहीं रह गया।
विंध्यपण्डा समाज ने भी स्थगित किया विंध्यपण्डा समाज के अध्यक्ष श्री पंकज द्विवेदी अपने सदस्यों और नगर विधायक श्री रत्नाकर मिश्र के साथ मंदिर खोलने का अनुरोध पत्र 19 जून को मुख्यालय पर लेकर आते लेकिन अब स्थिति सामान्य होने आएंगे।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।
मिर्जापुर। मां विंध्यवासिनी धाम को कोरोना से बचाव के साथ खोलने के लिए विंध्यपण्डा समाज द्वारा बनाई गई उपसमिति ने अपनी रिपोर्ट गुरुवार, 18 जून को मुख्य कार्यकारिणी को सौंपी दी थी। तत्काल विशेष बैठक कर सारी संभावनाओं पर देर शाम विचार भी कर लिया गया था । तय हुआ था कि 19 जून को प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर मंदिर खोलने का अनुरोध किया जाएगा लेकिन पल भर में स्थितियां बदल गई । पूरे जिले में प्रति घण्टे घण्टे में एक यानी लगभग 7 से 8 घण्टे के दौरान 7 पॉजिटिव केस आने से जिले में घबराहटों का भूकम्प क्या आया कि सारी मशक्कतों पर पानी फिर गया।
प्रथम ग्रासे मच्छिका पात: - इस श्लोक का अर्थ ही है कि भोजन की थाली सामने हो और जैसे ही पहला ग्रास (कौर) मुंह में डालने के लिए हाथ बढ़ाया जाए तभी थाली में मक्खी गिर जाए । यही संस्कृत की लोकोक्ति यहां भी लागू होती दिख रही है। 48 घण्टे में विंध्य पण्डा समाज के अधिकृत सदस्य गली-गली भ्रमण कर हरैक से सम्पर्क कर चुके थे और सब बड़े उत्साह में थे कि 20 मार्च से बंद मंदिर गुप्त नवरात्र की प्रतिपदा, 22 जून से खुलेगा तभी मुख्यालय लगायत विन्ध्याचल 6 केस आ गए । सब हाई-फाई परिवारों का मामला था ही, साथ ही प्रशासनिक शक्तिधाम से लेकर आध्यात्मिक शक्तिधाम तक के इर्द-गिर्द का मामला था, जबकि सिर्फ एक ग्रामीण क्षेत्र का । ऐसी स्थिति में सब के सब अवाक से हो गए है।
जगन्नाथपुरी यात्रा स्थगित से भी लोग मायूस- जिले से बहुतेरों नेआषाढ़ शुक्ल द्वितीया, 23 जून को उड़ीसा राज्य के पुरी जिले में होने वाली रथयात्रा पर सुप्रीम कोर्ट की रोक से अपनी यात्रा स्थगित कर दी । 18 जून को खबर आते लोगों ने पुरी के अपने परिचितों द्वैतापति एवं विद्यापति (पण्डा वर्ग) से फोन कर जानकारी ली। जगन्नाथ मंदिर के प्रमुख द्वैतापति प्रोफ़ेसर दुर्गादास पुरी ने बता दिया कि कोर्ट का सम्मान किया जाएगा। पुरी के राजा साहब ने भी कोर्ट के आदेश के पालन पर जोर दिया है। ऐसी स्थिति में रथयात्रा का प्रश्न ही नहीं रह गया।
विंध्यपण्डा समाज ने भी स्थगित किया विंध्यपण्डा समाज के अध्यक्ष श्री पंकज द्विवेदी अपने सदस्यों और नगर विधायक श्री रत्नाकर मिश्र के साथ मंदिर खोलने का अनुरोध पत्र 19 जून को मुख्यालय पर लेकर आते लेकिन अब स्थिति सामान्य होने आएंगे।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर ।

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