दबंग भूमाफिया पूर्व प्रधान ने हजम किए ग्राम समाज के लाखों की रकम।। Raebareli news ।।

विगत 9 वर्षों से ग्राम समाज के 10 बीघा आम की बाग पर अवैध कब्जा करके बेच रहा है आम
लकड़ कटों से मिलकर बेच लिए आम के बेशकीमती कई पेड़
ग्रामीणों की लाख शिकायत के बावजूद स्थानीय राजस्व प्रशासन नहीं कर रहा कार्यवाही
ग्रामीणों ने मामले की शिकायत डीएम की चौखट तक पहुंचाने का किया निश्चय
विनय तिवारी
रायबरेली: तहसील क्षेत्र के सोथी गांव में ग्राम समाज की 10 बीघे जमीन पर लगे कलमी आम की विशाल बाग पर गांव के ही एक पूर्व प्रधान और दबंग प्रवृति के व्यक्ति ने 9 वर्षों से अवैध कब्जा करके लाखों रुपए की आमदनी कर ली है। आज भी उनका कब्जा बरकरार है। ना तो एक पैसा दबंग पूर्व प्रधान द्वारा ग्राम पंचायत के खाते में जमा किया गया और ना ही बाग के इर्द-गिर्द गांव के किसी गरीब व्यक्ति को आम लेने के लिए फटकने दिया जा रहा है। मामला सुर्खियों में है। लेकिन पता चला है कि, दबंग पूर्व प्रधान की राजस्व महकमे में गहरी पकड़ है। जिसके चलते गांव के ही कुछ उत्साही लोग शिकायतों पर शिकायत किए जा रहे हैं। किंतु पूर्व प्रधान की रसूखदार शख्सियत के आगे लेखपाल से लेकर एसडीएम तक घुटना टेकने को मजबूर हैं। शिकायतकर्ताओं ने पुन: जिले की ईमानदार, कर्मठ और तेजतर्रार जिलाधिकारी की चौखट पर शिकायती पत्र देकर मामले के जांच कराने की तथा प्रधान द्वारा अब तक अवैध कब्जे के द्वारा कमाए गए लाखों रुपए वसूल कर सरकारी खजाने में जमा कराने तथा पूर्व प्रधान का अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है।
     आपको बता दें कि, तहसील क्षेत्र के सोथी गांव में ग्राम समाज की 10 बीघे जमीन पर लगभग 90 आम तथा अन्य के विशाल वृक्ष लगे हुए हैं। जिस पर वर्तमान समय में गांव के पूर्व प्रधान जितेंद्र सिंह और उनके गुर्गों ने कब्जा कर रखा है। गांव के ही रहने वाले प्रदीप सिंह पुत्र रमाकांत सिंह, सुरेश सिंह पुत्र श्रीकांत सिंह, मेजर सिंह पुत्र गयाबक्स सिंह, रमाकांत सिंह पुत्र शिव शंकर सिंह, राम निहोर पासी पुत्र विश्राम आदि ने उच्चाधिकारियों को दिए गए लिखित शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि, दूर-दूर तक मशहूर इस विशाल बाग की नीलामी वर्ष 2010-11 में 64500 में किया गया था। इसके बाद से बाग की नीलामी नहीं कराई गई है, और विगत 9 वर्षों से पूर्व प्रधान जितेंद्र सिंह इसके मालिक बने हुए हैं।
     शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि, वर्तमान समय में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। जिस पर दबंग पूर्व प्रधान समर्थित महिला ग्राम प्रधान है। पूर्व प्रधान द्वारा उपकृत होने के बाद महिला प्रधान इस कब्जे का विरोध नहीं करती है। जब जब शिकायती पत्र दिए जाते हैं, तो राजस्व कर्मी मौके का मुआयना न करके ऑफिस में बैठकर ही रिपोर्ट लगाकर मामले को दबा देते हैं।
     शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि, बाग में सालाना लाखों रुपए के आम पूर्व प्रधान द्वारा बेचे जाते हैं। यही नहीं गुपचुप तरीके से पूर्व प्रधान ने तमाम पेड़ कटवा कर लकड़ कट्टों के हाथ भेछ दिए हैं। अभी हाल ही में विगत 2 जून को सभी शिकायतकर्ताओं ने उप जिलाधिकारी महराजगंज से मिलकर एक शिकायती पत्र दिया था। जिस पर एसडीएम ने तहसीलदार महोदय को मामले की जांच करा कर आवश्यक वैधानिक कार्यवाही करने के लिखित आदेश भी दिए थे। हालांकि तहसीलदार महोदय ने क्षेत्रीय लेखपाल अमित शुक्ला को तलब करके मामले की निष्पक्ष जांच तुरंत करके रिपोर्ट देने के कड़े निर्देश भी दिए थे।
     लेकिन वाह रे लेखपाल! एसडीएम और तहसीलदार के आदेश और निर्देशों को लेखपाल साहब हजम कर गए और पूर्व प्रधान जितेंद्र सिंह जो स्वयं को वर्तमान प्रधान का प्रतिनिधि बताते है, लेखपाल से सांठगांठ करके शिकायत को दबा दिया है।
     शिकायतकर्ताओं ने जिलाधिकारी को दिए गए पत्र में विगत 2 जून को एसडीएम महराजगंज को दिए गए शिकायती पत्र की छाया प्रति संलग्न कर लेखपाल व पूर्व दबंग प्रधान की करतूतों का सबूत भी दिया है। मामला पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि, जिलाधिकारी महोदय के आदेश और निर्देश को भी कहीं क्षेत्रीय लेखपाल न दवा ले जाए, और मामले में पहले की तरह परिणाम सिफर रहे।

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