कोरोना काल में आगे चलो तो हूरो पीछे चलो तो थूरो की हालत

कभी आवाज़ आती रही लॉकडाउन हटाओ तो अब लगाओ की पुकार
दर-असल कोरोना खुद बहुत चटोरा है---
मिर्जापुर। मानव-प्रकृति  विरोधास्पद ही रहती है। पानी दिन भर बरसे तो हे भगवान, क्यों तबाही मचा रहे और एक दिन न बरसे, धूप निकल आए तो हे दऊराजा ! पानी बरसाओ, बड़ी तेज गर्मी है, जान निकल रही है, ऐसा मन बोलता है।
आजकल कोरोना से बचने के लिए लॉकडाउन की हो रही मांग--
पिछले एक हफ्ते में 70-80 लोगों के पॉजिटिव रिपार्ट से संचार माध्यमो में DM साहब, लॉकडाउन लगाइए की आवाज आ रही है। जबकि हकीकत में हर जगह सरकारी नियमों का शानो-शौकत से उल्लंघन भी हो रहा है। जो ज्यादा लॉकडाउन की मांग करते हैं, वे भी निजी जीवन में नियम को तार-तार करते दिखते हैं ।
दर-असल कोरोना है बहुत चटोर- ऐसा इसलिए कि जिन्हें चाट, पिज्जा, बर्गर, सैंडविज, मोमोज, नशीली वस्तु पसंद है और उसका सेवन करते हैं, उन्हें कोरोना ढूढ़ लेता है। उन्हें अपना संगी-साथी बना लेता है और फिर अपने राजभवन आइसोलेशन सेंटर ले जाता है।
जिनसे डरता है कोरोना- इसमें ऐसे लोग है जो सूर्योदय पूर्व जाग जाते हैं । प्राणायाम करते हैं । प्राकृतिक आहार जैसे अंकुरित चना, सादा भोजन वह भी जूता-मोजा उतार कर एवं मौन होकर करते हैं, उनसे यही कोरोना थरथराता है। इन दिनों आइसोलेशन सेंटर पर दिए जाने वाले काढ़े को जो घर पर पीएगा, उसका नाम ही सुनकर कोरोना खुद काँपेगा । 
लज़ीज व्यंजन बनाम कटु-आहार- जो जीभ को लुभाने वाला व्यंजन है वह बीमारी का घर है जबकि कटु-तिक्त उसे चिढ़ाने वाला । नगर या जिले में किसी रोड पर धूल-मिट्टी के उड़ने के बावजूद ठेले पर चाट की दुकान को घेर कर प्रायः लोग खड़े दिखाई रहते हैं। दूर से लगता है कि कोई मंदिर है लोग परिक्रमा के मूड में हैं ।
सिर्फ लाकडाउन ही समाधान नहीं- ऐसी स्थिति में सिर्फ लॉकडाउन ही समाधान नहीं । याद करें अप्रैल में लॉकडाउन हटाइए की आवाज उठती थी, अब लगाइए की। इसे ही कहते हैं-  आगे चलो तो हूरो-पीछे चलो तो थूरो
                       सलिल पांडेय, मिर्जापुर
©कापीराइट ऐक्ट का उल्लंघन दण्डनीय है।

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