"बढ़ते चलें विकाशों के संग" कमल बाजपेई

◆भूली बिसरी यादों के संग,
जियो सभी तुम वादों के संग,
खट्टी अमियाँ बागों के संग,
ऊंची सोच इरादों के संग ।
◆जीवन में उल्लासों के संग,
रिश्ते नाते साथों के संग,
प्यार और ज़ज़्बातों के संग,
मान मनौवल रातों के संग ।
◆यार दोस्तों नातों के संग,
घातों और प्रतिघातों के संग,
आपा - धापी राहों के संग,
संघर्षों - विश्रामों के संग ।
◆बाग - बगीचे आमों के संग,
खेतों और खलिहानों के संग,
मंदिर - मस्जिद काशी - काबा, 
नौरात्रों - रामज़ानों के संग ।
◆छानी - छप्पर खटिया के संग,
प्यारी - प्यारी बिटिया के संग,
महल - दुमहले ऐसी कूलर,
बरगद छाँव सुराही के संग ।
◆पैदल बैलों की गाड़ी संग,
साइकिल प्यारे रिक्शा के संग,
राजदूत एम्बेस्डर के संग,
उड़ती कार ज़माने के संग ।
◆बादल और कबूतर के संग,
चिट्ठी बीच किताबों के संग,
ट्रंक कॉल आवाज़ों के संग,
लैंडलाइन मोबाइल के संग ।
◆पगडंडी गलियारों के संग,
सड़क और चौबारों के संग,
नेशनल हाईवे, चौड़ी सड़कें,
एयर बसों, स्टीमर के संग ।
◆खेती - पाती हल बैलों संग,
कुआँ ताल रहट दोगला संग,
तिफरा, इंजन, मड़नी के संग,
ट्रैक्टर कटिंग मशीनों के संग ।
◆चुपड़ी, रोटी, हरे नोन संग,
कम्पट, बिस्किट चने जोर संग,
चूरन, टॉफी, मैगी, नूडल,
पिज़्ज़ा, बर्गर, कोल्ड पेय संग ।
◆पाटी, छुइहा, स्याही के संग,
कॉपी, कलम, दावतों के संग,
व्हाइट बोर्ड, अध्यापक के संग,
ऑनलाइन कक्षाओं के संग ।
◆कठिन विषय निः शुल्क क्लास संग,
एक्स्ट्रा क्लास गुरु ज्ञानी संग, 
कोचिंग क्लास सभी पैसे संग,
गूगल गुरु महाज्ञानी संग ।
◆पिढई, आंगन, पत्तल दोना,
पहले पैर हाँथ का धोना,
खड़े खड़े अब खान - पान संग,
लाइन लगाकर लिए नान संग ।
◆गाँवों की बाज़ारों के संग,
फुटपाथों दुकानों के संग,
मॉल गली बाज़ारों के संग,
ऑनलाइन पर्चेजिंग के संग ।
◆गुल्ली डंडा गुलहड़ के संग,
कुश्ती खास अखाड़ों के संग,
हॉकी, क्रिकेट, उछालों के संग
पब-जी गेम बिचारों के संग ।
◆हुक्का और तंबाकू के संग,
बीड़ी चिलम सिगारों के संग,
कायम पान - परागों के संग,
घातक नशा दवाओं के संग ।
◆दही, दूध, लस्सी दोनो संग,
गुड़, शक्कर, ठंढाई के संग,
चाय, छाछ, बादामों के संग,
विस्की, बियर, शराबों के संग ।
◆बच्चे पढ़ें किताबों के संग,
अब कोचिंग प्रतिघातों के संग,
कोटा और दिखावो के संग,
भरम रहे समझौतों के संग ।
◆घर से भगे कमाने के संग,
अपनों से दूर बेगानों के संग,
है विषाणु का खौफ सभी को,
लौटे सभी फेर घर के संग ।
◆खुली हवा शुद्ध खाना संग,
बढ़ा प्रदूषण महानगर संग,
बड़ी महामारी संकट संग,
मुँह में मास्क ढके अंगों संग ।
◆सब कुटुम्ब रहता था संग - संग,
सबके काम सुलझते संग - संग,
फिर एकल परिवार हो गए,
अब लगता फिर सोचे संग - संग ।
◆खेती में सब लगैं,  खाएं जन,
करें नौकरी, खाएं नवोजन,
तन खाहन में खाएं एक जन,
अब तो बेतन हुए सभी जन ।
◆झगड़े आपस बातों के संग,
समझ - बूझ जज़्बातों के संग,
चौखट पंच पंचायतों के संग,
अब न्यायालय वादों के संग ।
◆सुंदर - सुंदर नारों के संग
घर - घर पहुंच प्रचारों के संग,
गाड़ी, मोटर, कारों के संग
नीले वर्ण शृगालो के संग ।
◆दृढ़ विश्वास देशहित के संग,
कर्म करें दिन रात एक संग,
जन कार्यों में लगे सभी जन,
है प्रणाम प्यारे जन गण मन ।
~ By कमल बाजपेयी

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