चरैवेति-चरैवेति के पर्याय स्व माताप्रसाद दुबे को त्रयोदशी पर दी गई श्रद्धांजलि

मिर्जापुर । जिले का हर पथ मिर्जापुरी पहचान के सूचक धोती-कुर्ता और सदरी वाले *पथिक* को ढूंढ रहा था जिसने कभी मंजिल के पाने की कल्पना तक नहीं की हो और जब इस पथिक की श्रद्धांजलि हेतु आयोजित त्रयोदशी संस्कार में हिस्सा लेने लोग जा रहे थे तो आकाश जल की छोटी-छोटी बून्दों से जन-जन को अभिसिंचित भी कर रहा था ।
जन-जन की मौजूदगी
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विंध्यधाम की महत्ता को अपने व्यक्तित्व में समेटे जननेता स्व माताप्रसाद दुबे के दिवंगतोपरांत रविवार, 19 जुलाई को आयोजित त्रयोदशीसंस्कार के लिए उनके पौत्र हर्षनारायण दुबे तथा भतीजे मनीष दुबे ने यद्यपि टेलीफोन से लोगों को आमंत्रित किया था लेकिन स्व दुबे को श्रद्धाजंलि हर तबके की ओर से आम और खास सबने दी । प्रदेश के राज्यमंत्री रमाशंकर पटेल एवं नगरपालिका के अध्यक्ष मनोजकुमार जायसवाल तो निर्वाचित प्रतिनिधियों में थे, जबकि हर दल,  हर वर्ग, हर क्षेत्र के लोग स्व दुबे को श्रद्धांजलि देने उत्तरवाहिनी हुई गंगा-तट पर स्थित उनके मुजहरा गांव पहुंचे थे । 
उत्तर-दक्षिण के समन्वयक स्व दुबे
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मां गंगा के तट के वासी रहे स्व दुबे के व्यक्तित्व में विन्ध्यपर्वत-सी ऊंचाई थी जो श्रद्धांजलि के मौके पर लोगों के विचारों से प्रकट हो रही थी । लोकहित में विन्ध्यपर्वत के झुकने से बढ़ी महत्ता स्व दुबे के भी व्यक्तित्व में समाहित थी । झुकने के बावजूद विन्ध्यपर्वत महनीय और वंदनीय तो है ही, श्रेष्ठ भी है । मातारानी के इस प्रसाद का फल ही रहा कि स्व दुबे जहां भी रहे, सबसे ऊंचे ही रहे।
 दैवी शक्तियां मौजूद रहीं
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त्रयोदशी के इस कार्यक्रम में दैवीशक्तियों की मौजूदगी का एहसास भी हो रहा था। चारों तरफ मौजूद लोग दिवंगत पथिक के पदचिह्नों को ढूढते दिख रहे थे।
                   सलिल पांडेय/विभाव, मिर्जापुर ।

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