पत्थर दिल पाषण व्यवसायियों का हृदय हुआ है पत्थर दिल
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DM का चला चाबुक : कलेजा कर रहा धुक-धुक
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मिर्जापुर । अहरौरा के चकजाता ग्राम के प्रकाशकोल के उजड़े परिवार में उर्जादेव महादेव के पवित्र दिवस सावन के तीसरे सोमवार को प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री रमाशंकर पटेल पहुँचकर उसके अंधेरे जीवन-आंगन में रोशनी की एक किरण जगाई । तीन बच्चों के पत्थर खदान में हुए मौत के कुएं में समाहित होने पर तीन लाख रुपए, जमीन का आवंटन आदि की व्यवस्था कराई । इस ऊर्जा से संभव है कि दो-ढाई का बचा बच्चा कुल का दीपक बन सके ।
DM के तेवर में तल्खी- प्रथम दृष्टया अधीनस्थों की गलत रिपोर्टिंग के बाद जब DM सुशील कुमार पटेल मौके पर उसी दिन बिना समय गवाएं पहुंचे और नियम-कानूनों पर नजर डाली तो उन्हें लगा कि खदान से हुए गड्ढे के चारों तरफ कटीले तार का घेरा होना चाहिए लेकिन पत्थर व्यवसाई इस कारोबार में लगकर अधिकांश पत्थर दिल हो जाते हैं और नियमकानून किसी तगड़े चट्टान से दबा देते हैं ।
कटीले तार, गड्ढे को मिट्टी से पाटने और पर्यावरण रक्षण न होने के दोषी बच न जाएं
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इस संबन्ध में किसकी क्या भूमिका है, इसका निर्धारण इस मैटर में होना चाहिए । कहीं ऐसे पत्थर व्यवसाई जो नियमों को चट्ट कर जाते हैं, वे बच नहीं जाए।
अक्सर होता यही है
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अक्सर बड़ी घटना में जिसमें पीड़ित निर्बल होता है और आरोपित पैसे से मजबूत, वह बच ही नहीं जाता बल्कि फील्ड में रंग गांठता है कि उसका कोई बाल-बांका नहीं कर सकता।
क्योंकि बहुतेरे इनके साथ खड़े होते हैं- भौतिक युग का प्रभाव है कि ऐसे कथित व्यवसायियों के साथ कुछ लोग घटना होने पर बचाने, माहौल बनाने का कांट्रेक्ट पत्र लेकर दौड़ने लगते हैं। वैसे भी पाषण विभाग में सीसीटीवी की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि प्रायः हर महीने कुछ लोग वहां जो हाजिरी लगाते हैं, वे ऐसे मौके पर ढाल बनने की पेशकश करते हैं ।
लीक करते हैं प्रशासन की कार्रवाई- ऐसे लोग प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी का भी चक्कर लगाकर प्रशासन क्या करने जा रहा है, उसकी सारी सूचना लीक करते हैं ।
इस मामले में भी न्यायालय का चक्कर हो सकता है- इस मामले में न्यायालय का चक्कर यदि कोई लगाए तो उसकी पैरवी जबर्दस्त होनी चाहिए वरना DM की सख्त व्यवस्था को दरकिनार की कोशिश हो सकती है।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।
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DM का चला चाबुक : कलेजा कर रहा धुक-धुक
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मिर्जापुर । अहरौरा के चकजाता ग्राम के प्रकाशकोल के उजड़े परिवार में उर्जादेव महादेव के पवित्र दिवस सावन के तीसरे सोमवार को प्रदेश के ऊर्जा राज्यमंत्री रमाशंकर पटेल पहुँचकर उसके अंधेरे जीवन-आंगन में रोशनी की एक किरण जगाई । तीन बच्चों के पत्थर खदान में हुए मौत के कुएं में समाहित होने पर तीन लाख रुपए, जमीन का आवंटन आदि की व्यवस्था कराई । इस ऊर्जा से संभव है कि दो-ढाई का बचा बच्चा कुल का दीपक बन सके ।
DM के तेवर में तल्खी- प्रथम दृष्टया अधीनस्थों की गलत रिपोर्टिंग के बाद जब DM सुशील कुमार पटेल मौके पर उसी दिन बिना समय गवाएं पहुंचे और नियम-कानूनों पर नजर डाली तो उन्हें लगा कि खदान से हुए गड्ढे के चारों तरफ कटीले तार का घेरा होना चाहिए लेकिन पत्थर व्यवसाई इस कारोबार में लगकर अधिकांश पत्थर दिल हो जाते हैं और नियमकानून किसी तगड़े चट्टान से दबा देते हैं ।
कटीले तार, गड्ढे को मिट्टी से पाटने और पर्यावरण रक्षण न होने के दोषी बच न जाएं
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इस संबन्ध में किसकी क्या भूमिका है, इसका निर्धारण इस मैटर में होना चाहिए । कहीं ऐसे पत्थर व्यवसाई जो नियमों को चट्ट कर जाते हैं, वे बच नहीं जाए।
अक्सर होता यही है
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अक्सर बड़ी घटना में जिसमें पीड़ित निर्बल होता है और आरोपित पैसे से मजबूत, वह बच ही नहीं जाता बल्कि फील्ड में रंग गांठता है कि उसका कोई बाल-बांका नहीं कर सकता।
क्योंकि बहुतेरे इनके साथ खड़े होते हैं- भौतिक युग का प्रभाव है कि ऐसे कथित व्यवसायियों के साथ कुछ लोग घटना होने पर बचाने, माहौल बनाने का कांट्रेक्ट पत्र लेकर दौड़ने लगते हैं। वैसे भी पाषण विभाग में सीसीटीवी की व्यवस्था होनी चाहिए क्योंकि प्रायः हर महीने कुछ लोग वहां जो हाजिरी लगाते हैं, वे ऐसे मौके पर ढाल बनने की पेशकश करते हैं ।
लीक करते हैं प्रशासन की कार्रवाई- ऐसे लोग प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी का भी चक्कर लगाकर प्रशासन क्या करने जा रहा है, उसकी सारी सूचना लीक करते हैं ।
इस मामले में भी न्यायालय का चक्कर हो सकता है- इस मामले में न्यायालय का चक्कर यदि कोई लगाए तो उसकी पैरवी जबर्दस्त होनी चाहिए वरना DM की सख्त व्यवस्था को दरकिनार की कोशिश हो सकती है।
सलिल पांडेय, मिर्जापुर।





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