रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: व्यापार मण्डल के प्रान्तीय नेता मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, कोरोना महामारी में जारी लाकडाउन में सरकारी नौकरी करने वालों को छोड़ कर लगभग सभी की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में शिक्षण संस्थायें भी फीस के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रही है, लोगों को खाने के एक-एक दाने को तरसना पड़ रहा है। वहीं अपने बच्चों की फीस न भर पाने के कारण अभिभावक मानसिक रूप से सदमे की स्थिति में है।
आपको बता दें कि, वैश्विक महामारी कारोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में 24 मार्च से 31 मई तक लाकडाउन किया था। वर्तमान समय में भी सरकारी व प्राइवेट स्कूल बंद हैं। इसके बावजूद स्कूल संचालक अभिभावकों पर स्कूल बन्दी के दौरान फीस लेने का दबाव बना रहे हैं।
श्री रस्तोगी ने कहा कि, यह तो सर्वविदित तथ्य है कि, देश का हर अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ाना चाहता है। प्राइवेट स्कूलों का आलम यह है कि, वो हर कीमत पर बच्चों की पढ़ाई के नाम पर उनके अभिभावकों की जेबें ढीली करता रहता है।
शिक्षा का स्तर भले ही जो हो, लेकिन ये प्राइवेट स्कूल कापी और किताबें मंहगे दामों पर बेंचते हैं। दुर्भागजनक स्थित तो यह है कि, कोरोना महामारी और देश में जारी लाकडाउन के संकट पर भी ये स्कूल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। निजी विद्यालयों के साथ-साथ सरकारी विद्यालय भी आनलाइन पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों का शोषण करने में लगे हुए हैं। श्री रस्तोगी ने आगे कहा कि, जो विद्यालय स्वेच्छा से फीस माफ कर रहे हैं, निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं, उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। किन्तु जो विद्यालय शिक्षा का बाजारीकरण करने में लगे हैं, उन्हें इन विद्यालयों से सीख लेने की आवश्यकता है, जो भी स्कूल आर्थिक स्थिति का रोना रोये, सरकार तुरन्त उस स्कूल की पैरेंट संस्था के खातों की पूरी डिटेल मांगे और झूठ बोलने वाले स्कूलों के सभी बैंक एकाउन्ट को सीज कर उनके संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करायें।
यदि वास्तविक रूप से किसी स्कूल की हालत वाकई खराब है, तो सरकार को उसकी मदद भी करनी चाहिए। श्री रस्तोगी ने कहा कि, देश इस समय बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहा है, किसी को भी मनमानी करने की छूट नहीं देनी चाहिए, साथ ही सरकार को यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि, अर्थव्यवस्था के सामान्य नियमों के सहारे देश नहीं चलाया जाना चाहिए, इसलिए जहाँ भी जरूरत हो, सरकार को खुलकर मदद के लिए सामने आना चाहिए।
श्री रस्तोगी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि, आमजन की भावनाओं को महसूस करते हुए स्कूल बन्दी के दौरान फीस माफ करें, एवं आनलाइन पढ़ाई के नाम पर विद्यालयों द्वारा किये जा रहे शोषण को रोकते हुए मानवता का परिचय दें।
रायबरेली: व्यापार मण्डल के प्रान्तीय नेता मुकेश रस्तोगी ने कहा कि, कोरोना महामारी में जारी लाकडाउन में सरकारी नौकरी करने वालों को छोड़ कर लगभग सभी की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है। ऐसे में शिक्षण संस्थायें भी फीस के लिए अभिभावकों पर दबाव बना रही है, लोगों को खाने के एक-एक दाने को तरसना पड़ रहा है। वहीं अपने बच्चों की फीस न भर पाने के कारण अभिभावक मानसिक रूप से सदमे की स्थिति में है।
आपको बता दें कि, वैश्विक महामारी कारोना के संक्रमण की चेन तोड़ने के लिए प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी ने पूरे देश में 24 मार्च से 31 मई तक लाकडाउन किया था। वर्तमान समय में भी सरकारी व प्राइवेट स्कूल बंद हैं। इसके बावजूद स्कूल संचालक अभिभावकों पर स्कूल बन्दी के दौरान फीस लेने का दबाव बना रहे हैं।
श्री रस्तोगी ने कहा कि, यह तो सर्वविदित तथ्य है कि, देश का हर अभिभावक अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में ही पढ़ाना चाहता है। प्राइवेट स्कूलों का आलम यह है कि, वो हर कीमत पर बच्चों की पढ़ाई के नाम पर उनके अभिभावकों की जेबें ढीली करता रहता है।
शिक्षा का स्तर भले ही जो हो, लेकिन ये प्राइवेट स्कूल कापी और किताबें मंहगे दामों पर बेंचते हैं। दुर्भागजनक स्थित तो यह है कि, कोरोना महामारी और देश में जारी लाकडाउन के संकट पर भी ये स्कूल अपनी मनमानी से बाज नहीं आ रहे हैं। निजी विद्यालयों के साथ-साथ सरकारी विद्यालय भी आनलाइन पढ़ाई के नाम पर अभिभावकों का शोषण करने में लगे हुए हैं। श्री रस्तोगी ने आगे कहा कि, जो विद्यालय स्वेच्छा से फीस माफ कर रहे हैं, निश्चित ही वे बधाई के पात्र हैं, उनकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। किन्तु जो विद्यालय शिक्षा का बाजारीकरण करने में लगे हैं, उन्हें इन विद्यालयों से सीख लेने की आवश्यकता है, जो भी स्कूल आर्थिक स्थिति का रोना रोये, सरकार तुरन्त उस स्कूल की पैरेंट संस्था के खातों की पूरी डिटेल मांगे और झूठ बोलने वाले स्कूलों के सभी बैंक एकाउन्ट को सीज कर उनके संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करायें।
यदि वास्तविक रूप से किसी स्कूल की हालत वाकई खराब है, तो सरकार को उसकी मदद भी करनी चाहिए। श्री रस्तोगी ने कहा कि, देश इस समय बहुत ही कठिन दौर से गुजर रहा है, किसी को भी मनमानी करने की छूट नहीं देनी चाहिए, साथ ही सरकार को यह भी ध्यान रखने की आवश्यकता है कि, अर्थव्यवस्था के सामान्य नियमों के सहारे देश नहीं चलाया जाना चाहिए, इसलिए जहाँ भी जरूरत हो, सरकार को खुलकर मदद के लिए सामने आना चाहिए।
श्री रस्तोगी ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमन्त्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि, आमजन की भावनाओं को महसूस करते हुए स्कूल बन्दी के दौरान फीस माफ करें, एवं आनलाइन पढ़ाई के नाम पर विद्यालयों द्वारा किये जा रहे शोषण को रोकते हुए मानवता का परिचय दें।
0 टिप्पणियाँ