पपीता कम समय मेंअधिक पैदावार देने वाला फल वृक्ष है-डॉ राम प्रकाश मौर्य
रजनीकांत अवस्थी
सुल्तानपुर: पपीता अल्प समय में अधिक पैदावार देने वाला फल बृक्ष है, इसकी खेती सघन एवम अन्तरशस्य फसल के रूप में की जा सकती है, यह विटामिन ए का प्रचुर स्रोत एंव विटामिन सी का सामान्य स्रोत वाला फल है। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। यह साढ़े 6 से 7 ph मान की मिट्टी में आसानी से पैदा होता है। उक्त उद्गार रास्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड के सौजन्य से ओंकार सेवा संस्थान द्वारा अलीगंज के ऊंच गांव में आयोजित किसानों के मीट विथ एक्सपर्ट कार्यक्रम में डॉ राम प्रकाश मौर्य ने व्यक्त किए हैं।
आपको बता दें कि, डॉ राम प्रकाश मौर्य ने उपस्थित किसानों के समक्ष पपीते की प्रजातियों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि, पूसा नन्हा, पूसा ड्वार्फ, कोयम्बटूर, पूस डेलिशियस आदि प्रमूख प्रजातियां है, इसके पौधे सामान्यतः जून, जुलाई, परंतु अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में सिंतबर या फिर फरवरी मार्च में भी पौधे लगाए जा सकते है। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 250 ग्राम नत्रजन, 250 ग्राम पोटाश, 150 ग्राम फास्फोरस प्रति पौध प्रतिवर्ष देना चाहिए। नत्रजन की मात्रा 6 भागों में विभाजित करके पौधरोपण के 2 माह बाद देंना शुरू कर दें।
श्री मौर्य ने आगे बताया कि, फास्फोरस और पोटाश की आधी आधी मात्रा दो बार में देनी चाहिए, उर्वरकों को तने से 1 फिट की दूरी पर पेड़ के चारों तरफ मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। एक स्वस्थ पेड़ से 35 से 40 किलोग्राम फल आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
इसी क्रम में कृषि विभाग के बीटीएम बृजेश यादव ने कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में किसानों को विस्तार से बताया तथा जिन किसानों को किसान सम्मान निध का पैसा नही मिल रहा है। उनसे आवश्यक कागजात लेकर उनका त्वरित निराकरण भी किया।
कार्यक्रम समन्वयक सूर्य कुमार त्रिपाठी ने कहा कि, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अशोक तिवारी के दिशा निर्देश में किसानों को नई नई कृषि तकनीकी से रूबरू करवाया जा रहा है। क्लब से जुड़े सभी किसानों की आमदनी निरंतर बढ़ रही है।
गोष्ठी में शारीरिक दूरी बनाते हुए फूचन्द तिवारी, राकेश दुबे, श्रवण तिवारी, राजेश कुमार शुक्ला, अनूप कुमार मुंशी सहित सैकड़ों की संख्या में प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।
रजनीकांत अवस्थी
सुल्तानपुर: पपीता अल्प समय में अधिक पैदावार देने वाला फल बृक्ष है, इसकी खेती सघन एवम अन्तरशस्य फसल के रूप में की जा सकती है, यह विटामिन ए का प्रचुर स्रोत एंव विटामिन सी का सामान्य स्रोत वाला फल है। इसकी खेती के लिए बलुई दोमट या दोमट मिट्टी उपयुक्त होती है। यह साढ़े 6 से 7 ph मान की मिट्टी में आसानी से पैदा होता है। उक्त उद्गार रास्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक नाबार्ड के सौजन्य से ओंकार सेवा संस्थान द्वारा अलीगंज के ऊंच गांव में आयोजित किसानों के मीट विथ एक्सपर्ट कार्यक्रम में डॉ राम प्रकाश मौर्य ने व्यक्त किए हैं।
आपको बता दें कि, डॉ राम प्रकाश मौर्य ने उपस्थित किसानों के समक्ष पपीते की प्रजातियों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि, पूसा नन्हा, पूसा ड्वार्फ, कोयम्बटूर, पूस डेलिशियस आदि प्रमूख प्रजातियां है, इसके पौधे सामान्यतः जून, जुलाई, परंतु अधिक वर्षा वाले क्षेत्र में सिंतबर या फिर फरवरी मार्च में भी पौधे लगाए जा सकते है। अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए 250 ग्राम नत्रजन, 250 ग्राम पोटाश, 150 ग्राम फास्फोरस प्रति पौध प्रतिवर्ष देना चाहिए। नत्रजन की मात्रा 6 भागों में विभाजित करके पौधरोपण के 2 माह बाद देंना शुरू कर दें।
श्री मौर्य ने आगे बताया कि, फास्फोरस और पोटाश की आधी आधी मात्रा दो बार में देनी चाहिए, उर्वरकों को तने से 1 फिट की दूरी पर पेड़ के चारों तरफ मिट्टी में अच्छी तरह मिला देना चाहिए। एक स्वस्थ पेड़ से 35 से 40 किलोग्राम फल आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
इसी क्रम में कृषि विभाग के बीटीएम बृजेश यादव ने कृषि विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के बारे में किसानों को विस्तार से बताया तथा जिन किसानों को किसान सम्मान निध का पैसा नही मिल रहा है। उनसे आवश्यक कागजात लेकर उनका त्वरित निराकरण भी किया।
कार्यक्रम समन्वयक सूर्य कुमार त्रिपाठी ने कहा कि, नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक अशोक तिवारी के दिशा निर्देश में किसानों को नई नई कृषि तकनीकी से रूबरू करवाया जा रहा है। क्लब से जुड़े सभी किसानों की आमदनी निरंतर बढ़ रही है।
गोष्ठी में शारीरिक दूरी बनाते हुए फूचन्द तिवारी, राकेश दुबे, श्रवण तिवारी, राजेश कुमार शुक्ला, अनूप कुमार मुंशी सहित सैकड़ों की संख्या में प्रगतिशील कृषक उपस्थित रहे।

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