रायबरेली और बछरावां के स्वास्थ्य कर्मियों में मिले कोरोना पॉजिटिव से दहशत में जी रहे हैं महराजगंज सीएससी के स्वास्थ्य कर्मी
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दर्जनों कर्मचारी कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते दहशतजदा है। कई कर्मचारी तो पिछलेे कई दिनों से अपने घरों को वापस नहीं लौट रहे हैं। कारण इसका यह है कि, कहीं वह लोग भी तो कोरोना संक्रमित नहीं है, सरकारी निर्देशों के तहत अस्पताल में तैनात सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों के नमूने लेकर उनका कोरोनावायरस टेस्ट कराया जाना था। लेकिन कहने को तो सैंपल लेने के लिए टीम महराजगंज आई, लेकिन इसकी ना तो पूर्व से सूचना किसी भी अधिकारी कर्मचारी को दी गई, न हीं जांच ही कायदे से की गई। जांच टीम ने महज दो स्वीपर और एक वार्ड आया के अलावा अस्पताल परिसर से बाहर 10 दवा विक्रेताओं और 10 सब्जी फल बेचने वालों के नमूने ले लिए और वापस चले गये।
बाद में मरीजों की सीधे संपर्क में काम करने वाले स्टाफ को जब पता चला, तो उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। हालत यह है कि, महराजगंज सीएचसी में 7 डॉक्टर्स 6 स्टाफ नर्स, 2 फार्मेसिस्ट, 4 वार्ड बॉय के अलावा पैथोलॉजी एक्सरे टेक्नीशियन आदि समेत 30 लोग ऐसे हैं, जो सीधे मरीजों के इलाज से जुड़े हुए हैं।
आपको बता दे कि, महराजगंज सीएससी में अब तक 4000 से अधिक आए प्रवासियों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण इन्हीं कर्मचारियों और डाक्टरों के द्वारा किया जा चुका है। अब सवाल ये उठता है कि, मरीज से सीधे जुड़े लोगों का करोना टेस्ट नहीं किया गया, ना ही उनके सैंपल लिए गए। पिछले 3 तारीख को टीम आई थी। महज तीन उन कर्मचारियों का जो रोगियों के परीक्षण में ज्यादा नहीं जुड़े थे, उनका सैंपल ले लिया गया। मेडिकल स्टाफ के उन लोगों को को छोड़ दिया गया। इससे कर्मचारी दहशत में है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, जब से बछरावां सीएचसी और रायबरेली जिला अस्पताल के डाक्टरो व स्टाफ के लोग संक्रमित पाए गए हैं। तब से स्वास्थ्य कर्मियों के अंदर एक दहशत भर गई है। हम मरीजों के संपर्क में आने के बाद, कहीं उन लोगों में भी तो कोरोना का वायरस नहीं घुस गया है, वह कई कई दिनों से अपने घरों को इसलिए नहीं जा रहे हैं कि, अगर उनके अंदर कोरोना के लक्षण पाए गए, और वो कहीं घर चले गए, तो पूरा परिवार संक्रमित हो जाएगा। इससे भलाई यह है कि, यहीं सीएचसी परिसर में ही रह जाए, ताकि संक्रमण घरों तक ना पहुंचे। बाल बच्चे सुरक्षित रहें।
रही बात मेडिकल स्टोर और फल सब्जी बेचने वालों की, तो क्षेत्र में 25 से अधिक मेडिकल स्टोर हैं। वहीं फल और सब्जी विक्रेताओं की तादाद भी लगभग 50 के आसपास है। जांच करने आई टीम ने महज 20 लोगों के सैंपल लेकर परीक्षण के नाम पर केवल मजाक ही किया है। मामले को लेकर कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। कर्मचारियों की मांग है कि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस मामले को सीधे संज्ञान लेना चाहिए और पुन: टीम भेजकर पहले से सूचना देकर पूरे सीएचसी के स्टाफ का सैंपल लेकर जांच करा कर इसका परिणाम घोषित करना चाहिए।
वहीं कर्मचारी एक बात पर और नाराज है कि, जिन तीन सीएचसी कर्मियों और 20 मेडिकल और सब्जी फल विक्रेताओं के सैंपल लिए गए थे उनके रिजल्ट भी आज तक घोषित नहीं किए गये है।
क्या कहते हैं प्रभारी अधीक्षक डॉ भावेश: कोविड-19 के सैंपल लिए जाने के मामले में प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर भावेश कुमार का कहना है कि, इस बारे में कोई उन्हें आधिकारिक तौर पर निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है। टीम आने का पता चला है, विगत 3 जुलाई को टीम आई थी। जिसे महराजगंज कस्बे में फल सब्जी और मेडिकल के दुकानदारों से 50 सैंपल लेने थे। जिनमें उन्होंने बाहर 47 सैंपल लिए थे और शेष तीन लोगों का सैंपल कम पड़ने पर सीएचसी में उन्होंने दो सफाई कर्मियों और एक वार्ड आया का लिया था। प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर भावेश ने आगे बताया कि, इस बारे में उन्हें भी जानकारी नहीं थी। हालांकि अब यह निर्देश जरूर मिला है कि, गांव में जिन लोगों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उनमें यदि किसी में लक्षण पाए जाएं, तो उनका कोरोना टेस्ट कराया जा सकता है। अब यह सुविधा सीएचसी में भी उपलब्ध है।
रजनीकांत अवस्थी
महराजगंज/रायबरेली: महराजगंज उच्चीकृत सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के दर्जनों कर्मचारी कोरोना महामारी के प्रकोप के चलते दहशतजदा है। कई कर्मचारी तो पिछलेे कई दिनों से अपने घरों को वापस नहीं लौट रहे हैं। कारण इसका यह है कि, कहीं वह लोग भी तो कोरोना संक्रमित नहीं है, सरकारी निर्देशों के तहत अस्पताल में तैनात सभी डॉक्टरों व कर्मचारियों के नमूने लेकर उनका कोरोनावायरस टेस्ट कराया जाना था। लेकिन कहने को तो सैंपल लेने के लिए टीम महराजगंज आई, लेकिन इसकी ना तो पूर्व से सूचना किसी भी अधिकारी कर्मचारी को दी गई, न हीं जांच ही कायदे से की गई। जांच टीम ने महज दो स्वीपर और एक वार्ड आया के अलावा अस्पताल परिसर से बाहर 10 दवा विक्रेताओं और 10 सब्जी फल बेचने वालों के नमूने ले लिए और वापस चले गये।
बाद में मरीजों की सीधे संपर्क में काम करने वाले स्टाफ को जब पता चला, तो उन्होंने गहरी नाराजगी जताई। हालत यह है कि, महराजगंज सीएचसी में 7 डॉक्टर्स 6 स्टाफ नर्स, 2 फार्मेसिस्ट, 4 वार्ड बॉय के अलावा पैथोलॉजी एक्सरे टेक्नीशियन आदि समेत 30 लोग ऐसे हैं, जो सीधे मरीजों के इलाज से जुड़े हुए हैं।
आपको बता दे कि, महराजगंज सीएससी में अब तक 4000 से अधिक आए प्रवासियों का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण इन्हीं कर्मचारियों और डाक्टरों के द्वारा किया जा चुका है। अब सवाल ये उठता है कि, मरीज से सीधे जुड़े लोगों का करोना टेस्ट नहीं किया गया, ना ही उनके सैंपल लिए गए। पिछले 3 तारीख को टीम आई थी। महज तीन उन कर्मचारियों का जो रोगियों के परीक्षण में ज्यादा नहीं जुड़े थे, उनका सैंपल ले लिया गया। मेडिकल स्टाफ के उन लोगों को को छोड़ दिया गया। इससे कर्मचारी दहशत में है।
एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि, जब से बछरावां सीएचसी और रायबरेली जिला अस्पताल के डाक्टरो व स्टाफ के लोग संक्रमित पाए गए हैं। तब से स्वास्थ्य कर्मियों के अंदर एक दहशत भर गई है। हम मरीजों के संपर्क में आने के बाद, कहीं उन लोगों में भी तो कोरोना का वायरस नहीं घुस गया है, वह कई कई दिनों से अपने घरों को इसलिए नहीं जा रहे हैं कि, अगर उनके अंदर कोरोना के लक्षण पाए गए, और वो कहीं घर चले गए, तो पूरा परिवार संक्रमित हो जाएगा। इससे भलाई यह है कि, यहीं सीएचसी परिसर में ही रह जाए, ताकि संक्रमण घरों तक ना पहुंचे। बाल बच्चे सुरक्षित रहें।
रही बात मेडिकल स्टोर और फल सब्जी बेचने वालों की, तो क्षेत्र में 25 से अधिक मेडिकल स्टोर हैं। वहीं फल और सब्जी विक्रेताओं की तादाद भी लगभग 50 के आसपास है। जांच करने आई टीम ने महज 20 लोगों के सैंपल लेकर परीक्षण के नाम पर केवल मजाक ही किया है। मामले को लेकर कर्मचारियों में गहरा रोष व्याप्त है। कर्मचारियों की मांग है कि, मुख्य चिकित्सा अधिकारी को इस मामले को सीधे संज्ञान लेना चाहिए और पुन: टीम भेजकर पहले से सूचना देकर पूरे सीएचसी के स्टाफ का सैंपल लेकर जांच करा कर इसका परिणाम घोषित करना चाहिए।
वहीं कर्मचारी एक बात पर और नाराज है कि, जिन तीन सीएचसी कर्मियों और 20 मेडिकल और सब्जी फल विक्रेताओं के सैंपल लिए गए थे उनके रिजल्ट भी आज तक घोषित नहीं किए गये है।
क्या कहते हैं प्रभारी अधीक्षक डॉ भावेश: कोविड-19 के सैंपल लिए जाने के मामले में प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर भावेश कुमार का कहना है कि, इस बारे में कोई उन्हें आधिकारिक तौर पर निर्देश नहीं प्राप्त हुआ है। टीम आने का पता चला है, विगत 3 जुलाई को टीम आई थी। जिसे महराजगंज कस्बे में फल सब्जी और मेडिकल के दुकानदारों से 50 सैंपल लेने थे। जिनमें उन्होंने बाहर 47 सैंपल लिए थे और शेष तीन लोगों का सैंपल कम पड़ने पर सीएचसी में उन्होंने दो सफाई कर्मियों और एक वार्ड आया का लिया था। प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर भावेश ने आगे बताया कि, इस बारे में उन्हें भी जानकारी नहीं थी। हालांकि अब यह निर्देश जरूर मिला है कि, गांव में जिन लोगों का सर्वेक्षण कराया जा रहा है। उनमें यदि किसी में लक्षण पाए जाएं, तो उनका कोरोना टेस्ट कराया जा सकता है। अब यह सुविधा सीएचसी में भी उपलब्ध है।

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