कोरोना ठंडा नहीं बल्कि राफेल की तरह उड़ रहा है

 

शवों में अदलाबदली तो बयानों में भी अदल-बदल

मृत्यु मामले में केस हिस्ट्री जारी हो

मिर्जापुर । द्वापर युग के कंस काल में जन्माष्टमी का पर्व गर्भस्थ शिशुओं की अदलाबदली का था तो कलियुग का कोरोना काल *मृतकों की अदलाबदली* के रूप में कहीं और नहीं बल्कि बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में दिखाई पड़ा । यहां स्वास्थ्य विभाग के बड़े पद ACMO तथा पुलिस परिवार के एक व्यक्ति के शवों की अदलाबदली बुधवार को जब हुई तब यह स्पष्ट हो गया कि *कोरोना के चलते लोग सुध-बुध* खो रहे हैं।

कोई आश्चर्य की बात नहीं!

कोरोना के चलते मृतकों को PPE किट में लपेट कर दिया जा रहा है । पाजिटिव केस से मृत  व्यक्ति को जलाने की सावधानी के चलते डॉ जंगबहादुर के परिवार को पुलिस इंस्पेक्टर के पिता केशव चंद श्रीवास्तव का पार्थिव शरीर मिल गया। जहाँ बिना किट खोले डॉक्टर जंगबहादुर के परिवार ने जला दिया जबकि इंस्पेक्टर परिवार ने किट हटाकर मुंह खोला तब भेद भी खुल गया। यह परिवार भी कोरोना के भय से मुंह न खोलता तो यह भेद भेद ही रह जाता ।

डॉक्टर जंगबहादुर की जीवन शैली तो सात्विक थी

स्वास्थ्य विभाग के बड़े पद पर तैनात डॉ जंगबहादुर के कोरोना से मरने पर मिर्जापुर जिले का भी स्वास्थ्य विभाग हतप्रभ और शोकग्रस्त दिखा । आश्चर्य यह है कि डॉ जंगबहादुर का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था । उनके साथ सेवा कर चुके डॉक्टरों का मानना है कि उनका खानपान  बहुत सात्विक था और वे संवेदनशील इंसान थे । ऐसे लोगों का इम्युन सिस्टम भी बेहतर होता है। वे 55 वर्ष के लगभग थे । ऐसे हालात में कोरोना से मृत्यु आश्चर्यजनक ही है।

कोरोना काल मे कहीं कोई तनाव या सदमा तो नही था ?

इस दौर में जनता में भय और तनाव है तो प्रशासनिक खेमे में तनाव न हो तो इससे इनकार नहीं किया जा सकता। अनेकानेक जिलों में कोरोना से जूझते प्रशासनिक अधिकारियों के टेलीफोन स्विच ऑफ होने के आरोप लगते हैं। संसाधनों की कमी और मरीजों की बढ़ती संख्या से शिकायतों का अंबार बढ़ता जा रहा है। जनता अधिकारियों पर तो अधिकारी जनता पर दुर्व्यहार के आरोप लगा रहे हैं।  कहीं कहीं मातहत अधिकारियों पर उच्च अधिकारी डांट-डपट करते सुनाई पड़ रहे है।

डॉ जंगबहादुर की केस-हिस्ट्री सार्वजनिक हो

स्वास्थ्य अधिकारी के कोरोना से मृत्यु से जनता दहल रही है। अतः इनकी केस हिस्ट्री सार्वजनिक होनी चाहिए । लगभग 5 महीने से कोरोना आतंक के दौर में उन्हें किसी तरह का सदमा तो नहीं लगा ? अचानक मृत्यु तो हार्ट अटैक से ही होती है। यह दीगर है कि वे इसी बीच पाजिटिव भी हो गए हों।

चिकित्सा-शिक्षा मंत्री का क्या मामला है

मंगलवार को यहां आए मंत्री सुरेश कुमार खन्ना के लिए बुधवार को सोशल मीडिया पर दो तरह की खबरें आईं । एक में CMO के पद का इस्तेमाल कर उन्हें संक्रमित बताया गया जबकि दूसरी ओर मंत्री ने खुद को स्वस्थ बताया।  फिर CMO की ओर से मंत्री को स्वस्थ बताया गया। मंत्री और CMO जैसे जिम्मेदार पद के बयानों में यह विभेद कहां से हुआ, यह जांच का विषय है। वस्तुस्थिति से यहां के लोग भी वाकिफ होना चाहते हैं क्योंकि इस वाकये के एक दिन पहले मंत्री  जी जिले में आए थे। प्रेस कांफ्रेंस के साथ सरकारी मीटिंग, कोरोना हॉस्पिटल का मुआयना भी किया था।

                           सलिल पांडेय, मिर्जापुर।

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