बलिदान.......................सारिका अवस्थी

 ।।     बलिदान     ।।

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◆सिर पर मृत्यु का सेहरा बांध,

प्राणो को अर्पित कर दिया ।

धन्य हुआ तेरा लाल ये मां ,

मातृभूमि पर मै बलि गया ।।

◆बढ़ते शत्रुओ के कदमो पर,

हमने  हुंकार मचा दी मां ।

स्वतंत्रिणी  भारत मां पर,

प्राणो की बाजी लगा दी मां ।।

◆सरहद पर खड़ा तेरा लाल ये मां,

मृत्यु से लुका - छिपी करता है ।

प्राणो  को  लिए हथेली पर मै ,

दुश्मन  से अपने ये  लड़ता है ।।

◆आया बनकर था लाल  तेरा ,

भारत का लाल बन जाता हूं ।

देह बिछा भारत के चरणो मे,

प्राणो की भेंट मैं चढ़ाता हूं ।।

◆इस पुण्य बेदी पर चढ़कर मां, 

मन  ही  मन मैं  हरषाता हूं ।

भारत मां की गोद मे सोकर,

खुद को मै धन्य सा पाता हूं ।।

◆सुनकर शहादत की खबर मेरी ,

तुम विचलित मत हो जाना मां ।

धरती  का  कर्ज  चुका  माता  ,

अमर  हुआ  तेरा लाल ये मां ।।

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          ।।   सारिका अवस्थी  ।।

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