●फिर चली हवा प्रधानी की
पैरों पर शीश झुकाने की,
अम्मा, आजी, काकी, चाची से
झूठी बात बनाने की ।।
●फिर हवा चली प्रधानी की।
●कालोनी तुमको हम देंगे।
सरकार नहीं, सब हम देंगे।
भर देंगे पूरा जाब कार्ड,
कर देंगे सब पिछला हिसाब।।
●राशन यूनिट बढ़ जाएगी,
पेंशन पूरी मिल जाएगी।
दो दो कम्बल मिल जाएगा,
हैंड पम्प लग जायेगा।।
●क्या सुबह शाम बहकाने की,
फिर चली हवा प्रधानी की।।
●घर घर उजियारा लायेंगे।
गलियों को साफ कराएंगे।
एक खड़ंजा दो नामों से,
कभी नही लिखवाएंगे।
●इज़्ज़त घर से इज़्ज़त देंगे।
जीवन मे रौनक ला देगे।
जनता के सब सुख दायक हैं,
बस हम ही वोट के लायक हैं।।
●झूठी बात बनाने की,
फिर चली हवा प्रधानी की।।
●जय राम, भीम जय, जय साईं,
बोलें सलाम, गुरु पाय लागी।
रिश्तों में पालिश देते हैं,
पैरों की मालिश करते हैं।।
●मुस्काते हैं, बहकाते हैं।
इठलाते हैं, कतराते हैं।
बहु रूप, रूप धर आते हैं,
सुत भामाशाह बन जाते हैं।
●गिरगिट गुलाल बरसाने की
फिर चली हवा प्रधानी की।
●हलवा पूड़ी, रबड़ी, चम चम,
गरम जलेबी, दूध केशर,
हड्डी, बिरयानी, सब देंगे,
मदिरा अंग्रेजी ला देंगे।
●गोटे वाली साड़ी होगी,
चाचा का कुर्ता रेशम का।
भइया को सजाएंगे कॉटन में,
मोबाइल में नेट पैक भरा।।
●कुछ खुसुर फुसुर बतियाने की,
फिर चली हवा प्रधानी की।।
●हम तो आपके हैं अपने।
देखो किंचित भी न बदले।
सच्चे जनता के सेवक हैं,
सधे हुए हम केवट हैं।।
●अपना मतदान, हमे कर दो,
बदले में चाहे कुछ ले लो।
जन जन से अपना नाता है,
हम हरिश्चन्द्र के भ्राता हैं।।
●घर घर में भेद कराने की,
फिर चली हवा प्रधानी की।
फिर चली हवा प्रधानी की।।
●व्हाट्सएप पर वायरल कविता।

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