◆तीन-तीन पूर्व विधायकों की लगी है निगाह।
◆सपा नेतृत्व को प्रत्याशी चयन में करनी होगी कड़ी मशक्कत।
◆धुरंधर खुद तो चुप हैं लेकिन समर्थकों में छिड़ी बहस।
◆जिले की सबसे रोचक सीट हो सकती है महराजगंज प्रथम।
रजनीकांत अवस्थीमहराजगंज/रायबरेली: अब जबकि जिले की सबसे बड़ी कुर्सी के लिए आरक्षण की व्यवस्था का काम पूरा हो चुका है। जिला पंचायत अध्यक्ष की सीट तो पहले ही शासन स्तर पर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित कर दी गई है, वहीं अध्यक्ष चुनने के लिए जिले के सभी वार्डों की आरक्षण सूची भी प्रकाशित हो चुकी है। अब सवाल यह उठता है कि, जिले की अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों पर वह कौन सी सीट होगी, जिससे जिला पंचायत अध्यक्ष चुना जाएगा। इस दौड़ में सबसे ज्यादा रस्साकशी महराजगंज प्रथम जिला पंचायत सदस्य की सीट मानी जा रही है। जोकि चर्चा इस बात की है कि, जनपद के कई दिग्गज नेताओं की दिलचस्पी इसी सीट पर बढ़ गई है।
आपको बता दें कि, सूत्रों से आ रही जानकारी के मुताबिक महराजगंज प्रथम की सीट से जिले की राजनीति में खासा दखल रखने वाले अनुसूचित जाति के तीन बड़े नेता, जो कभी न कभी यहां से विधायक रह चुके हैं। उन्होंने या तो स्वयं या अपने परिवारीजनों को इस सीट पर उतारने का मन बना लिया है, और इसके लिए उन्होंने अपने समर्थकों को सक्रिय कर दिया है। इनमें भाजपा और सपा दोनों दलों के नेता शामिल है। इस राजनैतिक जंग में एक नाम भाजपा से चर्चा में है। बछरावां क्षेत्र से दो बार विधायक रह चुके नेता के बारे में कयास लगाया जा रहा है कि, भाजपा अपने इस पूर्व विधायक को यहां से उतार रही है। शालीन, सौम्य, मिलनसार व्यक्तित्व वाले निर्विवाद इस नेता के बारे में पार्टी में आम सहमति भी दिख रही है। हालांकि बातचीत में इस नेता का कहना है कि, वह पार्टी के निष्ठावान समर्पित कार्यकर्ता है, जो पार्टी हाईकमान निर्णय लेगा, उसका वह पालन करेंगे।
वहीं दूसरी ओर चर्चा में समाजवादी पार्टी की ओर से एक विधायक पुत्र का नाम भी खासा चर्चा में है, हालांकि यह पूर्व विधायक सदैव ही क्षेत्र में जन सरोकारों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सक्रिय रहते हैं। विधायक समर्थक बड़े जोर शोर से इस बात की चर्चा कर रहे हैं कि, यहां से जिला पंचायत सदस्य उनका प्रत्याशी ही होगा, और जिला पंचायत अध्यक्ष पद की कुर्सी भी समाजवादी पार्टी के कब्जे में होगी। क्षेत्र के मोन, हुल्ली का पुरवा, लालगंज, कुबना, मऊ, डेपारमऊ, ठाकुरपुर, जमोलिया, ताजुद्दीनपुर आदि गांवों में इस बात को लेकर सुबह से शाम तक गांव की चौपालों से लेकर खेत खलिहानों तक, व्यापारियों से लेकर नौजवानों तक दिनभर चर्चा छिड़ी रहती है।
वहीं समाजवादी पार्टी खेमे में ही विधायक पद के एक और दावेदार जो पहले विधायक रह चुके हैं, उनका नाम भी अचानक सुर्खियों में आ गया है। उनके समर्थक भी अब खुलकर इस सीट पर अपना हक जताते हुए दावा कर रहे हैं कि, टिकट इन्हीं को मिलेगा। भले चुनाव पूर्व विधायक न लड़ कर उनके परिवार का ही कोई सदस्य लड़े, और यहां से उनकी जीत भी पक्की है। क्योंकि पार्टी का वोट बैंक तो मजबूत ही है। जातीय समीकरण भी उन्हीं के प्रत्याशी के पक्ष में है। उनके समर्थक यह कहने में नहीं हिचकते की स्थानीय निवासी होने के चलते इसका काफी लाभ प्रत्याशी तथा पार्टी को मिलेगा।
विदित हो कि, भले ही यह तीनों प्रत्याशी खुलकर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं। लेकिन तीनों के समर्थकों का दावा है कि, यहां की जनता जिला पंचायत सदस्य नहीं, बल्कि जिला पंचायत अध्यक्ष को चुनने जा रही है। अब सवाल यह उठता है कि, भविष्य में क्या होगा यह तो समय बताएगा। फिर हाल राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है।

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