हलोर गांव में मतदाता ही निर्मला देवी का चुनाव लड़ रहा है, उनकी विजय सुनिश्चित।। Raebareli news ।।

रजनीकांत अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: त्रिस्तरीय पंचायती चुनाव के मतदान की तिथि नजदीक आते-आते अब चुनावी परिदृश्य खुलने लगा है, और मतदाता खुलकर अपना रुख जाहिर करने लगे हैं। आज हमारी टीम ने हलोर गांव का दौरा किया, तो यहां का नजारा अलग ही दिख रहा था। यहां तो निवर्तमान ग्राम प्रधान निर्मला देवी का चुनाव निर्मला देवी खुद ना लड़के बल्कि गांव के अधिकांश मतदाता निर्मला देवी को प्रधान चुनने के लिए चुनाव प्रचार में उतर पड़े हैं। जिससे मुकाबला एकदम एक तरफा दिखाई पड़ने लगा है। शेष प्रत्याशियों के पाले में गिने-चुने लोग ही नजर आ रहे हैं।

     आपको बता दें कि, हलोर ग्राम पंचायत की कुल आबादी लगभग 6000 है, और मतदाताओं की तादाद 4100 के करीब है। इस गांव में हलोर के अलावा पूरे गुलाल सिंह, बैसन का पुरवा, रामपुर, पूरे मोहनी, पूरे कहारन, नाथ गंज, शिवपुर और तकिया मजरे लगते हैं। जहां अब तक जाने-माने समाजसेवी संत कुमार चौधरी की पत्नी निर्मला देवी ग्राम प्रधान थी। गांव वाले कहते हैं कि, निर्मला देवी ने अपने पूरे कार्यकाल में गांव का जितना विकास किया है, ग्रामीणों की जितनी सहायता की है, किसी अन्य प्रधान ने कभी नहीं किया। यहां तक की जात-पात से ऊपर उठकर निर्मला देवी ने सभी जातियों, सभी धर्मों के लोगों के साथ बराबरी का व्यवहार किया।

     उनके विकास कार्यों के बारे में चर्चा करते हुए गांव के 65 वर्षीय बुजुर्ग शांति देवी का कहना है कि, निर्मला देवी और उनके पति संत कुमार ने दिन रात का ख्याल ना करके बेसहारा और गरीबों की सेवा की है। उनके राज में ही पूरी ग्राम सभा में 700 से अधिक शौचालय गांव में बनवाए गए। एक अन्य बुजुर्ग महिला मतदाता ने बताया कि, वह छप्पर के नीचे जीवन यापन कर रही थी। प्रधान से उन्होंने कहा भी नहीं, एक बार वह हमारे घर आए। फिर मेरा फार्म भरवा कर आवेदन कराया, और शासन से आवास स्वीकृत कराकर पैसा हमारे खाते में डलवा दिया, अब वह बुजुर्ग महिला पक्के मकान में रह रही हैं।

    इसी प्रकार कई लोगों ने दिल खोलकर प्रधानी के कार्यकाल को हलोर का स्वर्णिम युग बताते हुए कहा कि, रिकॉर्ड तोड़ तादाद में यहां कालोनिया बनी, सैकड़ों पात्र लोगों को सामाजिक पेंशनें बनवाई गई। गांव को साफ सफाई के मामले में अव्वल बनाए रखने के उद्देश्य से नालियों का निर्माण कराया गया। जल निकास की बेहतर व्यवस्था कराई गई। इसके अलावा गांव में प्रधान ने कोशिश करके बड़ी तादाद में सोलर लाइटें और हाई मास्क लाइटें लगवाई। कई लोगों ने तो यह भी बताया कि, गांव में कोई भी व्यक्ति अगर बीमार पड़ जाता है, तो प्रधान पति संत कुमार चौधरी अपने वाहन से उसे अस्पताल अथवा जिला अस्पताल तक पहुंचाते हैं, और मरीजों का इलाज तब तक कराते हैं, जब तक कि, वह पूर्ण रूप से स्वस्थ ना हो जाए।

    ग्रामीणों ने बताया कि, प्रधान और उनके देवर श्रवण कुमार हर गरीब मुसीबत में पड़े व्यक्ति की दिल खोलकर आर्थिक मदद भी करते हैं। गांव में अगर अग्निकांड जैसी कोई दुर्घटना हो जाए, तो पीड़ित परिवार को महीनों राशन पानी निशुल्क देने का काम भी प्रधान और उनके परिवार के द्वारा किया जाता है। कुछ ग्रामीणों ने तो बताया कि, पिछली बार कोरोना काल में जब संपूर्ण lock-down लगा था, तो लगातार एक महीने तक प्रधान पति संत कुमार और उनके भाई सरवन कुमार ने बेसहारा और गरीब लोगों को न केवल मुक्त में राशन बांटा, बल्कि पका पकाया खाना भी उनके घरों को पहुंचाया।

      लॉकडाउन के दौरान जो प्रवासी श्रमिक बाहर फंसे थे, उनको गांव सुरक्षित लाने में भी प्रधान पति ने बड़ा सराहनीय कार्य किया था। अब ऐसे सर्व सुलभ सज्जन प्रकृति के व्यक्ति को हम वोट नहीं देंगे, तो क्या ऐसे लोगों को जिताएंगे, जो चुनाव में इस मंशा के साथ खड़े हैं कि, चुनाव जीतने के बाद सरकारी धन की लूट खसोट करेंगे, और भ्रष्टाचार का बोलबाला हो जाएगा।

    हमने अपने सर्वेक्षण में लगभग 100 लोगों से अलग-अलग स्थानों पर जाकर, अलग-अलग जाति वर्ग के लोगों से अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों से बातचीत की, तो उसमें 90 फ़ीसदी व्यक्ति निर्मला देवी को ही प्रधान बनाने के लिए संकल्पित दिखे। शेष उम्मीदवारों के पक्ष में इक्का-दुक्का लोग ही नजर आए, तो हमें पता चल गया कि, यहां तो मतदाता ही निर्मला देवी का चुनाव लड़ रहा है। उनकी विजय सुनिश्चित है।

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