महराजगंज/रायबरेली: पंचायती चुनाव 2021 में एक बार फिर सिकंदरपुर प्रधानी की सीट गांव के सबसे प्रतिष्ठित राजनीतिक परिवार के पास फिर पहुंच गई है। लगातार तीन बार से इस परिवार का दबदबा कायम है। इस बार की जीत तो रिकॉर्ड मतों से हुई, और प्रधानी में उनको चुनौती देने वाले उस परिवार का सूपड़ा साफ हो गया, जिसके बारे में मशहूर है कि, वह गांव की मड़हिया में बैठकर गांव को विधानसभा की तरह चलाने का दावा कर रहे थे।
आपको बता दें कि, सिकंदरपुर गांव सभा का इतिहास बहुत पुराना है। बुजुर्ग बताते हैं कि, प्रदेश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद से प्रधानी हमेशा डब्बू सिंह के पूर्वजों के इर्द गिर्द बनी रही। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 1947 में जब देश आजाद हुआ था, तब ताजुद्दीनपुर और मूंग ताल दोनों मिलकर एक ग्रामसभा थे। पहले चुनाव में ताजुद्दीनपुर के चंद्र भूषण सिंह इस सम्मिलित ग्राम सभा के प्रधान बने थे। 1949 में मूंग ताल और ताजुद्दीनपुर गांव सभाएं अलग हुई, तो ग्रामसभा मूंग ताल के पद पर इसी परिवार के लोगों ने गांव के अपने खासम खास रामदयाल कोरी को 6 माह के लिए ग्राम प्रधान बनाया था।
इसके बाद जब पुनः चुनाव हुए तो, इसी परिवार के शिव प्रसाद सिंह मूंग ताल के प्रधान चुने गये। वह लगातार 10 सालों तक प्रधान की कुर्सी पर बैठे। उसके उपरांत 1962 में जब फिर चुनाव का नंबर आया तो, शिवप्रसाद सिंह के सामने कोई खड़ा ही नहीं हुआ, और वह दो बार लगातार निर्विरोध प्रधान बने। वहीं 1972 में एक बार फिर चुनाव हुए, तो इस बार प्रतिद्वंदी सक्रिय हो गए, और चुनाव हुआ, शिव प्रसाद सिंह ने पुनः बाजी मारी, वह फिर प्रधान चुन लिए गए।
उसके बाद 1981 के 11 दिसंबर को प्रधान पद पर रहते हुए ही शिव प्रसाद सिंह की मृत्यु हो गई, और 1982 में प्रधानी का सेहरा शिवप्रसाद सिंह के पुत्र जगदीश सिंह के सिर बंधा। 1988 से 1995 तक जगदीश नारायण सिंह ही प्रधान बनते रहे। इसी दौरान पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण व्यवस्था लागू हुई, तो गांव के ही हरिचरन पासी को इस परिवार ने समर्थन देकर लगातार दो बार प्रधान बनाया। इसके अतिरिक्त एक पंचवर्षीय हरचरन पासी ने 5 साल के लिए स्वयं प्रधानी की और यह पद परिवार से बाहर गया।
सन् 2010 में प्रधानी की सीट अनारक्षित हुई तो, जगदीश सिंह ने अपनी पत्नी शहीदर कुमारी को मैदान में उतारा। शहीद कुमारी सिंह भी भारी बहुमत से प्रधान चुन ली गई। लेकिन 5 वर्ष बाद आरक्षण प्रक्रिया में यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हुई, तो इस परिवार के खासम खास मथुरा प्रसाद को चुनाव में उतारा गया। वह भी भारी मतों से जीते, और ग्राम प्रधानी संचालन के लिए मथुरा प्रसाद ने डब्बू सिंह को बागडोर सौंप दी, जिसके बाद डब्बू सिंह ने बहुत ही निपुणता पूर्वक 5 साल तक प्रधानी में मथुरा प्रसाद को सहयोग दिया। परिणाम यह रहा कि, ग्राम पंचायत सिकंदरपुर में विकास के नए नए आयाम लिखे गए, और सिकंदरपुर की चर्चा सारे जनपद में होने लगी।
अब 2021 में जब पुनः चुनाव आए, तो सीट महिला हो गई। फिर इस परिवार ने रोहिताश उर्फ डब्बू सिंह की पत्नी संध्या सिंह को उम्मीदवार बनाया और चुनाव काफी दिलचस्प ढंग से लड़ा गया। संध्या सिंह के मुकाबले परंपरागत प्रतिद्वंदी मैदान में उतरे, जिसमें समरहा गांव के रहने वाले सूरज अवस्थी की पत्नी शालिनी अवस्थी और पूर्व प्रधान हरिचरन पासी की पुत्रवधू सुनीता मैदान में उतरी। पूरे चुनाव में प्रतिद्वंदीगणों ने सारे राजनीतिक हथकंडो का इस्तेमाल किया। एक बार तो लगा कि, चुनाव बड़े कांटे का होगा। लेकिन मतदान के ही दिन यह संकेत मिल गया था कि, यह परिवार न केवल चुनाव जीतेगा, बल्कि रिकॉर्ड मतों से कामयाबी हासिल करेगा। हालांकि अवस्थी परिवार द्वारा लगातार दावे किए जाते रहे कि, सिकंदरपुर गांव में ही डब्बू सिंह की पत्नी को वह धूल चटा देंगे, लेकिन उनके ख्वाब पूरे नहीं हुए।
मतगणना के समय संध्या सिंह ने प्रथम चक्र से ही जो बढ़त लेनी शुरू की, तो वह सिलसिला अंत तक जारी रहा। फाइनल मतगणना में संध्या सिंह को जहां 1352 मत मिले, तो वहीं उनके निकटतम प्रतिद्वंदी शालिनी अवस्थी को 696 मत मिले, जबकि सुनीता पासी को महज मात्र 276 मत ही मिल पाए, और संध्या सिंह ने 658 के रेकार्ड मतों से जीत दर्ज की, और यह साबित कर दिया कि, सेवा भाव से राजनीति करने वाले इस परिवार का झंडा हमेशा बुलंद रहेगा। चारों ओर से रोहिताश सिंह उर्फ डब्बू सिंह को बधाइयों के मिलने का सिलसिला जारी है।
बधाई देने वालों में प्रमुख रूप से निवर्तमान ब्लाक सत्येंद्र प्रताप सिंह, अग्रणी व्यवसाई राजकुमार सिंह उर्फ मोंगा, भोलू सिंह, सतीश सिंह, राजू सिंह अध्यक्ष कोऑपरेटिव मऊ आदि ने डब्बू सिंह और उनकी पत्नी को कोटिश: बधाई दी है।

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