महराजगंज/रायबरेली: एक कहावत है कि, "हिम्मते बंदा मदद ए खुदा" यह मसला ज्योना गांव के नवनिर्वाचित कर्मठ और जुझारू तथा व्यक्तित्व के धनी उमेश कुमार उर्फ कुन्नू पर बिल्कुल फिट बैठता है। जिन्होंने भारी झंझावातों का सामना करते हुए डटकर चुनाव लड़ा, और विरोधियों द्वारा रचे गए तमाम षड्यंत्रों को विफल करते हुए एक बार फिर प्रधानी पद पर कामयाबी का झंडा गाड़ कर दिखा दिया। हालांकि इस दौरान उन्हें अपने प्राणों से प्रिय छोटे भाई को गवाना भी पड़ा। लेकिन हिम्मत साधने के बाद ऊपर वाले ने करिश्मा कर दिखाया। जिस प्रधानी की सीट को हर कोई कह रहा था कि, इस बार कुन्नू से यह कुर्सी छिन जाएगी, लेकिन यह बात निर्मूल साबित हुई, और गांव में सबसे लोकप्रिय नेता होने का प्रमाण पत्र जनता ने उमेश कुमार उर्फ कुन्नू को जिता कर दे दिया।
आपको बता दें कि, ब्लॉक क्षेत्र में पिछले 5 वर्षों के कार्यकाल के दौरान जितनी मेहनत अपने गांव वालों की सेवा में उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने की है। वह बात किसी से छुपी नहीं है। इस बार सीट के अनारक्षित होने के बाद लोगों के आग्रह पर उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने स्वयं प्रत्याशी बनने की सलाह मान ली। आपको स्मरण रहे कि, इससे पहले कुन्नू की पत्नी शिवानी 5 वर्ष प्रधान रही हैं, जैसे ही उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने प्रधानी का पर्चा भरा, विपक्षी लामबंद हो गए, और जहां जहां से उमेश कुमार उर्फ कुन्नू को थोक में वोट मिलते थे, वह वहां से लोगों को भड़का कर और उकसा कर प्रत्याशी बना दिया।
आलम यह हो गया कि, लोगों को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि, उमेश कुमार प्रधानी का चुनाव लड़ भी पाएंगे। चुनाव प्रचार के दौरान उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने अपनी पत्नी शिवानी के साथ घर घर जाकर लोगों से संपर्क साधा और निवेदन किया कि, यदि विगत 5 साल में उन्होंने किसी का भी अहित किया हो, तो उन्हें वोट कतई ना देना।
चुनाव जब चरम पर पहुंचा तो, एक हादसा भी हो गया। जबकि एलपीजी गैस सिलेंडर की पाइप फटने से कुन्नू के भाई समेत कई लोग घायल भी हो गए। उनके उपचार की पूरी व्यवस्था में कुन्नू कई दिन तक लगे रहे। कुन्नू के इस काम में व्यस्त होने के बाद उनके प्रचार और प्रसार के लिए जनता ने खुद मोर्चा संभाला, और गांव के अधिकांशत: गरीब कमजोर तबके के लोग एक स्वर से कुन्नू को जिताने का संकल्प ले लिया। हालांकि इसी दौरान उनका भाई अस्पताल में जिंदगी की जंग हार गया और उसकी मौत हो गई। यह सदमा कुन्नू के लिए बहुत बड़ा था।
बावजूद इसके जनता ने हिम्मत नहीं हारी और मतदान के दिन बगैर शोर-शराबे के गांव भर के गरीब कमजोर वर्गों के लोग विशेषकर महिलाएं और युवा वर्ग के लोग ने आक्रामक वोटिंग करके अपना फैसला कुन्नू के पक्ष में दे दिया, जो मत पेटी में बंद हो गया। लेकिन विरोधी खेमे में षड्यंत्रकारी ताकते यह मानने को तैयार ही नहीं थी कि, कुन्नू चुनाव जीतेंगे। हार और जीत की बाजिया लगती गई, दावो पर दावे किए जाते रहे, किंतु उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने मतदाताओं और इश्वर पर अपनी आस्था बनाए रखी, और इसका परिणाम भी 2 मई को सामने आ गया। जबकि मतगणना के दौरान कई बार उतार-चढ़ाव आए लेकिन अंततोगत्वा गांव की जनता ने मतपत्रों पर मोहर लगाकर उमेश कुमार की झोली भर दी थी, और निर्णायक दौर में वह प्रधान पद पर 80 से अधिक मतो से चुनाव जीत गए।
जनता के इस फैसले को सहज स्वीकार करते हुए उमेश कुमार उर्फ कुन्नू ने हमसे बातचीत में बताया कि, जनता जनार्दन ही हमारे लिए भगवान है, उन्होंने अपने समर्थकों मतदाताओं को हृदय से आभार व्यक्त करते हुए वादा किया कि, अब वह पूरी ग्राम सभा के प्रधान हैं, अंतिम सांस तक ज्योना गांव की महान जनता की सेवा करने में पूरी ताकत लगा देंगे।
0 टिप्पणियाँ