गंगा की धारा के बीच बने रेत के टीले पर दफनाए गए सैकड़ों शव, कुत्ते घसीट कर गांव तक ले जा रहे अंग, संक्रमण बढ़ने का खतरा

 फोटो: गंगा के बीच रेेेत के टीलों पर दफनाए गए शवोंं के अंगोंं को नोच रहे कुत्ते।

उन्नाव: कोरोना से हो रही मौतों से इन दिनों उन्नाव में बीघापुर तहसील के बक्सर घाट पर अंतिम संस्कार के लिए रेला लगा है। संक्रमण के डर से पंडा, दाह संस्कार कराने से बच रहे हैं। अधिकांश शवों को रेत में दबाया जा रहा है। घाट पर जगह कम पड़ी तो नदी के बीच रेत के टीले पर अंतिम संस्कार किया जा रहा है। इससे क्षेत्र में कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। आसपास बस्ती और गांवों में रहने वाले लोग डरे हुए हैं। एसडीएम ने बताया कि, शवों का अंतिम संस्कार सुरक्षित तरीके से ही होना चाहिए, वह मामले को दिखवाएंगे। 

    आपको बता दें कि, बीघापुर तहसील के बक्सर घाट पर उन्नाव जिले के अलावा पड़ोसी जिला रायबरेली और फतेहपुर जिले से भी लोग शवों का अंतिम संस्कार करने इसी घाट पर पहुंचते हैं। इस समय प्रतिदिन 90 से 120 शवों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है। कोरोना के चलते पंडा भी दाह संस्कार कराने से बच रहे हैं। श्मशान घाट पर मौजूद डोम, नदी के किनारे गड्ढे खोदकर शवों को दफना कर अंतिम संस्कार करा रहे हैं। हालत यह है कि, नदी के किनारे जगह कम पड़ने से अब शवों को नाव से नदी के बीच ले जाकर बने रेत के टीलों पर दफनाया जा रहा है। हालत यह है कि, अब गड्ढे खोदने की जगह नहीं मिल रही है।

    एक दूसरे पर दफनाए गए शवों को कुत्ते खींचकर इधर उधर फैला रहे हैं। इससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। एसडीएम दयाशंकर पाठक ने बताया कि, शवों का अंतिम संस्कार सुरक्षित तरीके से किया जाना चाहिए। शव नदी में प्रवाहित करने पर पूरी तरह से रोक है। अगर लोग असुरिक्षत तरीके से शवों को बालू और रेत में दबा रहे हैं, तो उसे दिखवाया जाएगा।

    आपको यह भी बता दें कि, बक्सर घाट पर बेतरतीबी से दफनाए गए शवों को कुत्ते नोच और खींच रहे हैं। कई बार शव के अंग खींचकर गांवों के अंदर तक ले आते हैं। इससे संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। बक्सर के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान रामप्रसाद चौरसिया के प्रतिनिधि रामबदन ने बताया कि, पहले तो रोजाना 150 से 200 तक शवों का यहां अंतिम संस्कार किया जा रहा था। इधर कुछ दिनों से संख्या कुछ कम हुई है। उन्होंने बताया कि, प्रशासन को सुरक्षित तरीके से शवों के अंतिम संस्कार की व्यवस्था करनी चाहिए। उधर अगर गंगा का जलस्तर बढ़ा तो बक्सर श्मशान घाट के और रेत के टीलों पर दफनाए गए हजारों शव, खुल जाएंगे। पानी के साथ बहकर दूर तक जाएंगे और तेजी से संक्रमण फैलेगा। बक्सर निवासी राजराम, शिवगोविंद, रामेंद्र, शिवकुमार आदि ने बताया कि, अब तो गंगा पुल से भी निकलने में डर लगता है। तेज दुर्गंध से संक्रमित होने का डर बना रहता है।



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                          [शिवाकांत अवस्थी]


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