◆वैक्सीन बीमारी से ज्यादा सुरक्षा देती है, संक्रमण से कम।
◆कोविड केयर एंड हेल्प सेन्टर सहजौरा में आयोजित 'वैक्सीन जागरूकता सेमीनार में बोले प्रख्यात कार्डियोलोजिस्ट डॉ ज्ञान चतुर्वेदी।
रायबरेली: जिले में डॉ कुमार विश्वास, सोनू सूद आदि की मदद से चल रही साहित्यकार पंकज प्रसून की मुहिम आओ गांव बचाएं के तहत आज सहजौरा गांव के ताज मेमोरियल पब्लिक स्कूल के कोविड केयर एंड हेल्प सेन्टर पर वैक्सीनेशन जागरूकता सेमिनार करवाया गया। पद्मश्री प्राप्त कार्डियोलोजिस्ट डॉ ज्ञान चतुर्वेदी ने ग्राम वासियों को वीडियो विजुअल के माध्यम से वैक्सीन को लेकर फैले भ्रम को दूर करते हुए कहा कि, वैक्सीन को उस दीवार की तरह समझिए, जो वायरस और आपके शरीर के बीच खड़ी हो जाएगी। वायरस को आप तक पहुंचने से पहले उसे दीवार को तोड़ना पड़ेगा। अगर वह दीवार टूट भी जाती है, और यह वायरस इतना कमजोर हो चुका होगा कि, आपको ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा पायेगा।
डॉ ज्ञान चतुर्वेदी ने खुद का उदाहरण देते हुए बताया कि, वह 70 साल के हैं, डायबिटिक भी हैं, उनकी पत्नी की बायपास सर्जरी भी हो चुकी हैं। वह दोनों लोग वैक्सीन की दोनों डोज लेने के 15 दिन बाद पॉजिटिव हो गए थे। होस्पिटल में भी एडमिट हुए लेकिन वैक्सीन लगे होने की वजह से ज्यादा परेशानी नहीं हुई और जान बच गई। ये भी समझना होगा कि, वैक्सीन, बीमारी से सुरक्षा ज्यादा देती है, संक्रमण से कम देती है। अब बीमारी से सुरक्षा का अर्थ है, हमें अस्पताल में जाना जरूरी नहीं होगा, बहुत ज्यादा दवा या वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन कोविड संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर संक्रमण हो सकता है, इस बीच हम दूसरे को भी संक्रमण दे सकते हैं। मगर ऐसे में वैक्सीन हमारा बचाव करेगी।
उन्होंने कहा कि, कई शोधों द्वारा अब यह सिद्ध हो चुका है कि, लैक्टेटिंग मदर यानी दुग्धपान कराने वाली माताएं भी वैक्सीन लगवा सकती हैं। मुहिम के को-कॉर्डिनेटर नीरज शुक्ल और सेंटर प्रभारी मो0 ज़फरूल ने डॉ ज्ञान चतुर्वेदी का धन्यवाद ज्ञापित किया।
इसी क्रम में पंकज प्रसून ने बताया कि, उनके सेंटर्स पर विश्वास कोविड केयर किट, वैपोराइज़र, मास्क, सनेटाइजर्स और राशन का वितरण किया जा रहा है, साथ ही गांवों में जागरूकता फैल रही है।






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