लॉकडाउन बढ़ने के साथ बढ़ी व्यापारियों व मध्यमवर्गीय परिवारों की चिंता।। Raebareli news ।।

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

रजनीकांता अवस्थी

महराजगंज/रायबरेली: कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार के द्वारा कड़े निर्णय लिये जा रहे हैं। मौजूदा हालत को देखते हुए यह निर्णय जरुरी भी है, क्योंकि कोरोना वायरस का संक्रमण फैला तो स्थिति भयावह हो जाएगी। कोरोना की जंग में जीत के लिए लोग घर में रहने को तैयार भी है, पर मुश्किल यह है कि, इस दौरान घर कैसे चलाया जाए। निम्न वर्ग के लिए सरकार ने राहत का पिटारा खोल दिया है, उच्च वर्ग के पास पर्याप्त साधन है, परेशानी निम्न मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए खड़ी हो गयी है। इसमें अधिकांश छोटे दुकान शामिल हैं। जो रोजाना दुकानदारी कर कुछ आय अर्जित करते है जिससे उनका परिवार चल पाता है। लॉकडाउन में किसी तरह परिवार के लिए राशन का इंतजाम कर लिया पर अब जमा पूंजी भी खत्म हो गई है।    

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

      आपको बता दें कि, जब इस संबंध में महराजगंज के व्यापारियों से बात की गई तो उनका कहना है कि, छोटे दुकानदारों की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं रहती है कि, दुकान को बंद कर आसानी से घर चला सके। कोरोना संकट से निपटने के लिए सरकार के हर फैसले में व्यापारी साथ देते है, पर सरकार जिस तरह अन्य वर्ग के लोगो को राहत पहुंचाने की घोषणा करती है। उसी प्रकार व्यापारी वर्ग की भी सुध लिया जाना चाहिए, छोटे व्यापारियों के परिवारों को भी जिंदा रहने के लिए भोजन की आवश्यकता होता है। इस बात को सरकार को समझते हुए राहत प्रदान करने की मांग की जा रही है। 

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

   लॉकडाउन में अनिवार्य सेवा के तहत सिर्फ किराना दुकान, डेलीनिड्स पेट्रोल पंप, सब्जी, मेडिकल को खोलने की अनुमति है। इसको छोड़ अन्य सभी दुकाने बंद है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाक़ डाउन की अवधि बढ़ा दिए जाने से व्यापारी एवं मध्यम वर्ग परेशान हो उठा है, दरअसल सरकार द्वारा सब्जी फल दूध व किराना की दुकानें 4 घंटे के खोलने के लिए आदेश दिए गए थे, परंतु इसके विपरीत सर्राफा कपड़ा व्यवसाई व जूता चप्पल आदि का व्यापारियों के साथ ही अन्य वर्गों के व्यापारी फिर से परेशान हो उठे हैं।

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

    आपको यह भी बता दें कि, मौजूदा समय में शादी विवाह का मौसम चल रहा है, और इसमें लकड़ी से लेकर जेवरात बर्तन व कपड़े सहित विभिन्न प्रकार के वस्तुओं की आवश्यकता पड़ती है, परंतु लॉकडाउन के कारण यह दुकानें खुल नहीं पा रही हैं। इस तरह के विभिन्न धंधो से लगे व्यापारी चोरी-छिपे माल बेच रहे हैं, जो ग्राहकों से मनमाने पैसे वसूल करते हैं। इन परिस्थितियों में ग्राहक को मनमाना सामान भी नहीं मिल पाता है, और मूल्य भी अधिक देना पड़ता है।

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

    वहीं ग्रामीण क्षेत्रों मऊ, मुरैनी, सिकंदरपुर, डेपार मऊ, मोन, हलोर, बावन बुजुर्ग बल्ला के लोगों दिलीप सिंह, राजेश शर्मा, श्याम भवन सिंह, शारदा शरण पांडेय, शैलेंद्र प्रताप उर्फ राहुल साहू, श्रवण कुमार चौधरी आदि का मानना है कि, मौजूदा महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा लगाया गया लॉकडाउन पूर्णतया सही है। मानवता की रक्षा के लिए यह आवश्यक भी है। परंतु यदि समस्त प्रकार की दुकानों को खोलने का आदेश जारी कर दिया जाए, भले ही यह दुकाने प्रातः 7:00 से 11:00 बजे तक खोली जाएं, अगर सरकार द्वारा इस प्रकार का कोई आदेश पारित कर दिया जाता है, तो क्षेत्र के लोगों को भारी राहत मिलेगी।


दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

 वैसे भी लॉकडाउन का असर शहरी क्षेत्रों में ही दिखाई दे रहा है, ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग यही नहीं जानते कि, कोई लॉक डाउन भी लगा हुआ है। वह विधिवत अपने खेतों में धान की नर्सरी तथा खेतों की जुताई में व्यस्त हैं, परंतु जिन लोगों के यहां शादी विवाह इत्यादि कार्यक्रम होने हैं, उन्हें भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर सरकार द्वारा इस दिशा में उचित कदम उठा लिया जाए, तो आवाम को भारी परेशानियों से बचाया जा सकता है।

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

   आपको यह भी बता दें कि, कोरोना की दूसरी लहर में लगे lock-down के चलते जिन दुकानदारों की हालत खस्ता हो गई है, उनमें कपड़ा दुकान, बर्तन दुकान, होटल संचालक, ठेला लगाकर चार्ट, गुपचुप, फास्ट फुड बेचने वाले, मनिहारी सामान बेचने वाले, बिजली मिस्त्री, बिजली सामान बेचने वाले, पान ठेला चलाने वाले, बुक डिपो, साइकिल दुकान, कबाड़ सामान खरीदने वाले, डिस्पोजल सामान बेचने वाले, इत्र विक्रेता, चप्पल जूता विक्रेता आदि शामिल है। इनका व्यवसाय बड़े स्तर से लेकर छोटे स्तर पर चलता है, छोटे दुकानदारों के सामने लॉकडाउन किसी बड़ी आफत से कम नहीं है।

दिन के उजाले में भी वीरान पड़ी सड़कें, कस्बों और गांवों के बाजारों में बंद पड़ी दुकानों से संकट गहराया। व्यापारियों और मध्यम वर्ग के लोगों की चिंता बढ़ी, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।

   उधर लॉकडाउन के चलते दुकाने बंद है, पर मेंटनेस खर्च व्यापारियों को वहन करना पड़ रहा है। सभी दुकानों में बिजली मीटर लगा है, जिसका एवरेज बिल विभाग द्वारा थमा दिया गया है। महराजगंज में सैकड़ों दुकानदार ऐसे हैं, जो किराये की दुकान लेकर व्यवसाय करते हैं। 2 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपए तक दुकान व गोदाम का किराया होता है। किराया राशि देना दुकानदारों की मजबूरी है। वहीं जो कर्मचारी दुकानों में काम करते है। उनकी पगार काटना इस समय उचित नहीं है, कर्मचारियों को वेतन भी देना पड़ेगा। इसके अलावा कुछ अन्य मेंटनेस खर्च है, जो दुकानदारों को लॉकडाउन के बावजूद वहन करना पड़ रहा है। जिन्होंने व्यवसाय करने के लिए बैंक से कर्ज लिया है, उनकी परेशानी और बढ़ गई है।

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