सार........
◆डीएम अपूर्वा दुबे ने हुई 100 मौतों को बताया भ्रामक, सियासत हुई तेज।
◆डीएम अपूर्वा दुबे ने मजिस्ट्रेट लगाकर सर्वे कराया और सत्यापन में मरने वालों की संख्या 37 पाई गई। खास बात यह है कि, मरने वाले किसी भी व्यक्ति व उसके घर में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं है।
विस्तार........
रजनीकांत अवस्थी
रायबरेली: उत्तर प्रदेश के जिला फतेहपुर के ललौली गांव में 100 कथित मौत के मामले में अब सियासत भी तेज हो गई है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के निर्देश के बाद प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने प्रदेश महासचिव सुशील पासी, प्रदेश महामंत्री राकेश सचान, जिलाध्यक्ष अखिलेश पांडेय की अगुवाई में एक प्रतिनिधि मंडल का गठन किया था, जो बीते रविवार को ललौली गांव पहुंचा। जिलाध्यक्ष फतेहपुर ने बताया कि, प्रदेश महासचिव सुशील पासी, सचिव अभिमन्यु सिंह, सचिव सदाशिव, ओम प्रकाश गिहार, राकेश प्रजापति, डॉ0 अनुराग श्रीवास्तव की मौजूदगी में पीड़ित परिवारों से मिलेगा, और पीड़ितों को इलाज के लिए दवाएं आदि वितरित की जानी है, लेकिन एडिशनल एसपी ने यह कहते हुए की आपकी मांगे मान ली गई है। इसके बाद कांग्रेेस प्रदेश महासचिव सुशील पासी की अगुवाई में ललौली गांव पहुंचें प्रतिनिधिमंडल को गांव के बाहर ही रोक दिया गया। सुशील पासी ने हमारे संवाददाता को जानकारी देते हुए बताया कि, एडिशनल एसपी के कहने के मुताबिक पुलिस प्रशासन और जिला अधिकारी उस गांव में कैंप कर रहे हैं, और सुबह से सामान्य स्थिति बनी हुई है।
पुलिस चौकी पर ही रोक लिया गया कांग्रेस प्रदेश महासचिव की अगुवाई में पहुंचा काफिला, फोटो: एसके इंडिया न्यूज़।आपको बता दें कि, उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में यमुना नदी किनारे बसे ललौली गांव में लोगों की हो रही मौत के बाद इलाके में दहशत का माहौल है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक विगत एक महीने में गांव में लगभग 37 लोगों की मौत हो गई है। ग्रामीणों की माने तो मौत का कारण सिर्फ साधारण सर्दी-जुकाम, बुखार व डाइबिटीज ही है। आपदा के इस दौर में भले ही सरकारी आंकड़ो में इनकी मौत का कारण कोरोना महामारी न हो, लेकिन 50 हजार से ज्यादा आबादी वाले इस गांव में 37 लोगों की मौत के बाद दहशत का माहौल जरूर है। वहीं कई मीडिया संस्थानों में कथित तौर पर 100 लोगों की मौतों की खबर प्रसारित की गई, जिस पर शनिवार को जिला प्रशासन ने स्थिति साफ कर दी। डीएम अपूर्वा दुबे ने मजिस्ट्रेट लगाकर सर्वे कराया, और सत्यापन में मरने वालों की संख्या 37 पाई गई। खास बात यह रही है कि, मरने वाले किसी भी व्यक्ति व उसके घर में कोरोना पॉजिटिव रिपोर्ट नहीं है।
फतेहपुर जिलेेेे के ललौली गांव मेें हुई मौतों पर सियासत तेजडीएम अपूर्वा दुबे ने बताया कि, ललौली गांव में 37 मौतें हुई है, इसका सत्यापन कराया गया है। कोई भी मौत कोरोना संक्रमण से नहीं हुई है। 14 मौतें सीओपीडी, सांस की बीमारी, चार मौतें मधुमेह, दो मौतें हार्टअटैक और दो मौत कैंसर व अस्थमा से हुई हैं। इसके अलावा खून की कमी, प्लेटलेट्स की कमी, पथरी आपरेशन के दौरन मौत होने की पुष्टि हुई है। 100 लोगो की मौत की जो भ्रामक खबरे चल रही है, इस पर नियमानुसार कार्यवाई की जाएगी।
पुलिस चौकी पर ही रोक लिया गया कांग्रेस प्रदेश महासचिव की अगुवाई में पहुंचा काफिला, फोटो: एसके इंडिया न्यूज़।मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है गांव: यमुना नदी के किनारे बसा 50 हजार से ज्यादा आबादी वाला ललौली गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से जूझ रहा है। चिकित्सा के नाम पर इस गांव में एक प्राथमिक स्वस्थ केंद्र भले ही है, लेकिन यह नाकाफी साबित हो रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि, स्वास्थ्य केंद्र में महज़ दो लोगों का स्टाफ़ है, जो मरीजों को ऑनलाइन किसी नोडल से डॉक्टर विजिट कराते है, वो भी सुबह खुलता है और शाम को बंद हो जाता है। जिसका ज्यादा लाभ नहीं हो मिल पाता, जो सिर्फ ढाक के तीन पात साबित हो रहा है।
गांव केेे बाहर लगे बैरियर पर कांग्रेस प्रदेश महासचिव सुशील पासी से पूछताछ करती पुलिस, फोटो: एसके इंंडिया न्यूज़।एक ही प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र: वहीं ललौली गांव से जिला अस्पताल करीब 30 किलोमीटर दूर है। ऐसे में आकस्मिक चिकित्सा ग्रामीणों की पहुंच से काफी दूर है। गांव में सफाई के मामले में कभी भी सेनेटाइज़ेशन जैसा कोई काम नहीं हुआ है। ग्रामीणों का आरोप है कि, गांव में होने वाली अधिकतर मौतें स्वास्थ अव्यवस्था के अभाव में हुई है। यहां गांव में मुस्लिम आबादी औसतन ज्यादा है। गांव में छोटे-छोटे लगभग 10 कब्रिस्तान है। जिसमे लगभग 1 महीने में दफन लाशे अव्यवस्था की गवाही दे रही है।
फतेहपुर जिलेेेे के ललौली गांव में हुई कथित 100 मौतों केेे मामले में सियासत तेज।विगत एक महीने में 100 कथित मौतों का मामला जब मीडिया में आया तो प्रसाशनिक अमले में हड़कंप मच गया। जिसके बाद प्रशासनिक अफसर व स्वास्थ्य विभाग गांव में पहुंचकर जमीनी हकीकत जानने की कोशिश कर रहा है। संक्रमण से बचाव के लिए गांव में साफ-सफाई के साथ-साथ सेनेटाइजेशन का कार्य कराया जा रहा है।






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